अब मतदाता सीधे शिकायती वीडियो भेज सकेंगे चुनाव आयोग को : ओम प्रकाश रावत

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Jun 2018 1:35 AM

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कोलकाता : देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने कहा है कि चुनाव प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास जारी है. इस कड़ी में अब हर चुनाव में चुनाव आयोग का एक ऐप जारी किया जायेगा, जिसके जरिये मतदाता को लगता है कि कहीं कोई गड़बड़ी हो रही है, तो […]

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कोलकाता : देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने कहा है कि चुनाव प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास जारी है. इस कड़ी में अब हर चुनाव में चुनाव आयोग का एक ऐप जारी किया जायेगा, जिसके जरिये मतदाता को लगता है कि कहीं कोई गड़बड़ी हो रही है, तो वीडियो लेकर उस ऐप के जरिये सीधे चुनाव आयोग को भेज सकता है.
यह वीडियो मुख्य चुनाव अधिकारी, डीएम आदि को भी चला जायेगा. ऐप के जरिये वीडियो की अवस्थिति (लैटीट्यूड व लॉन्गीट्यूड) भी मिल जायेगी. आयोग की ओर से इसके बाद कदम उठाना और आसान हो जायेगा. इस ऐप को कर्नाटक चुनाव में इस्तेमाल किया गया था. इसके जरिये आयोग को 780 वीडियो मिले थे. इस ऐप से मतदाता को एक शक्ति दी जा रही है. यह ऐप लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में भी इस्तेमाल किया जायेगा. ऐप में भी सुधार किया जा रहा है. वीडियो भेजनेवाले की पहचान गुप्त रह सके, अब वह विशेषता भी उसमें जोड़ी जायेगी.
मर्चेंट्स चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की ओर से आयोजित परिचर्चा में श्री रावत ने सोशल मीडिया के जरिये चुनाव को प्रभावित करने की प्रवृत्ति के चलन पर भी चिंता जतायी. उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हो गये हैं कि मतदाता गौण हो गया है. सोशल मीडिया के जरिये मतदाताओं के व्यवहार व अन्य जानकारियों के तथ्य लेकर उसके मुताबिक कदम उठाने की घटना देखी गयी है. हालांकि करीब 875 मिलियन मतदाता में से केवल पांच लाख के तथ्यों के ही चोरी की बात सामने आयी है, जो सामग्रिक चुनाव के नतीजे को प्रभावित नहीं कर सकते. लेकिन यह गंभीर स्थिति है इसपर नजर रखी जा रही है.
श्री रावत ने इवीएम की गड़बड़ी की शिकायतों के संबंध में कहा कि गत वर्ष जुलाई महीने से मतदान को वीवीपैट से जोड़ा जा रहा है, जिसके जरिये मतदान सही हुआ है इसकी पुष्टि हो सकती है. गड़बड़ी पर उनका कहना था कि कई बार चुनाव कर्मी प्रशिक्षण के दौरान ध्यान नहीं देते और इवीएम के खराब आदि होने की शिकायत मिलती है. लेकिन हारनेवाले राजनीतिक दलों को तो बलि का बकरा चाहिए, इसलिए वे इवीएम में गड़बड़ी की शिकायत करते हैं. चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगानेवालों के संबंध में श्री रावत का कहना था, ‘गेट वेल सून’.
एक हजार से अधिक राजनीतिक दल हो चुके हैं डिलिस्ट
कोलकाता. देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने बताया कि पिछले दो वर्षों में करीब एक हजार से अधिक राजनीतिक दलों को डिलिस्ट किया गया है. ऐसा देखा गया है कि कई राजनीतिक दल सूचीबद्ध तो हो जाते हैं, लेकिन चुनाव या अन्य राजनीतिक प्रक्रियाओं में उनका कोई योगदान नहीं होता.
तब उन्होंने ऐसे राजनीतिक दलों की पहचान शुरू की, जो निष्क्रिय हैं. ऐसे राजनीतिक दल जिन्हें पत्र भेजे जाने पर वह लौट आता है. या तो पता या पते पर दर्ज व्यक्ति नहीं मिलता, तो उन्हें डिलिस्ट किया गया है. ऐसे एक हजार से अधिक दलों को डिलिस्ट किया जा चुका है. यह प्रक्रिया दो वर्ष पहले शुरू की गयी.
श्री रावत ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स के संबंध में कहा कि इस बाबत चुनाव आयोग की ओर से तथ्य इकट्ठा किये जा रहे हैं. इसके बाद ही आयोग अपने रुख को स्पष्ट कर सकेगा.
लोकसभा व विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की बाबत उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग कानून के तहत ही काम कर सकता है. लोकसभा या विधानसभा चुनाव, मियाद के खत्म होने के अधिक से अधिक छह महीने पहले ही कराये जा सकते हैं. चुनावों को एक साथ कराने के लिए संविधान में बदलाव की जरूरत पड़ेगी.
उन्होंने नाम न बताते हुए कहा कि एक बार एक राज्यपाल ने चुनाव की तारीखों तक को तय कर लिया और आयोग को कहा कि फलां तारीखों को चुनाव कराये जाये. लेकिन आयोग ने स्पष्ट कर दिया कि चुनाव कराने और तिथि तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास ही है. इसके बाद उक्त राज्यपाल ने कुछ न कहा.
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