विपक्ष नेता पद से वशीमूल का इस्तीफा, उषा को दायित्व

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 May 2018 4:02 AM

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आसनसोल : त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की गहमागहमी के बीच आसनसोल नगर निगम में बुधवार को बड़ी राजनीतिक घटना हुई. माकपा पार्षद सह नगर निगम के विपक्षी दल के नेता माकपा पार्षद वशीमूल हक ने नगर निगम मुख्यालय में बुधवार को मेयर जितेंद्र तिवारी को विपक्ष नेता पद से त्याग पत्र सौंप दिया. मेयर श्री तिवारी […]

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आसनसोल : त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की गहमागहमी के बीच आसनसोल नगर निगम में बुधवार को बड़ी राजनीतिक घटना हुई. माकपा पार्षद सह नगर निगम के विपक्षी दल के नेता माकपा पार्षद वशीमूल हक ने नगर निगम मुख्यालय में बुधवार को मेयर जितेंद्र तिवारी को विपक्ष नेता पद से त्याग पत्र सौंप दिया.

मेयर श्री तिवारी ने उनका त्याग पत्र स्वीकार कर लिया. इधर माकपा ने कहा कि विपक्ष नेता के पद पर पार्षद का चुनाव पंचायत चुनाव के रिजल्ट के बाद किया जायेगी. नये घटनाक्रम में मेयर श्री तिवारी ने अपने अधिकार का उपयोग करते हुए माकपा पार्षद उषा पासवान को विपक्ष का नेता नियुक्त कर दिया.

इस आशय का आधिकारिक पत्र सुश्री पासवान ने स्वीकार कर लिया. पूरे घटनाक्रम से माकपा नेतृत्व स्तब्ध है. इधर तृणमूल सूत्रों ने दावा किया है कि माकपा के कई अल्पसंख्यक पार्षद रमजान के पवित्र महीने के बाद पार्टी में योगदान करेंगे.

कौन है उषा पासवान
वर्ष 2015 में नगरनिगम की चुनाव में माकपा की टिकट पर जामुड़िया क्षेत्र के वार्ड संख्या 10 से 40 वर्षीय उषा पासवान ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी तृणमूल की सुधा नोनिया को 760 मतों के अंतर से हराकर पहली बार पार्षद बनी. वह निंघा इमली धौड़ा की निवासी है. पति रूपनारायणपुर केनरा बैंक में ग्रूप डी के पद पर कार्य करते है. दो बेटी और दो बेटा कुल चार संतान है.
वह निंघा की ही बेटी है. पिता भाषो पासवान इसीएल के कर्मी थे. उन्होंने कहा कि मेयर ने उन्हें बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है. इसे सही तरीके से पालन करना एक चुनौती है. इस पद पर आकर वे जनता की और भी ज्यादा मदद कर सकेंगी.
संभावना क्या है इसके बाद
कानूनी जानकारों के अनुसार माकपा यदि मेयर के इस निर्णय के खिलाफ जाती है और उषा पासवान के जगह किसी दूसरे को इस पद पर लाना चाहती है तो सबसे आसान तरीका यह होगा कि वह श्रीमती पासवान को पार्टी से निष्कासित कर दे. जिससे यह पद स्वतः रिक्त हो जायेगा और वह दूसरे व्यक्ति का नाम विरोधी दल नेता के रूप में पेश करे.
हालांकि यह करने से हिंदी भाषी और पिछड़ी जाति के लोगों के लिए माकपा के प्रति नाराजगी उभर कर सामने आ सकती है और उसके पार्षदों की संख्या में कमी आ जायेगी. माकपा नेता इस विषय मे अभी कुछ भी कहने से परहेज कर रहे है. जिला सचिव श्री चटर्जी ने कहा कि पार्टी की बैठक में इस विषय पर निर्णय लिया जायेगा कि आगे की कार्यवाई क्या होगी ?
क्या कहता है कानून
पश्चिम बंगाल म्युन्सिपल एक्ट की धारा 18 में कहा गया है कि नगर निगम में विरोधी दल नेता होना अनिवार्य है. सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी जो होगी, विरोधी दल नेता का चयन उसी पार्टी से ही किया जायेगा. नगर निगम के मेयर विरोधी दल नेता का चयन करेंगे. मेयर श्री तिवारी ने कहा कि म्युन्सिपल एक्ट की धारा 18 के तहत मेयर को विरोधी दल नेता चुनने का अधिकार है.
नगरनिगम वगैर विरोधी दल नेता के नहीं चल सकता है. बुधवार को विरोधी दल नेता श्री हक के इस्तीफा देने के उपरांत यह पद रिक्त हुआ था. कानून के दायरे में श्रीमती पासवान को विरोधी दल नेता की नियुक्ति दी गयी है. महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए श्रीमती पासवान को यह पद का दायित्व दिया गया.
नगरनिगम में पार्षदों की स्थिति क्या है
वर्ष 2015 में हुए चुनाव में 106 पार्षदों वाली आसनसोल नगर निगम में तृणमूल सबसे बड़ी पार्टी के रूप में 78 सीट प्राप्त की. माकपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में 14 सीट, भाजपा को आठ सीट, कांग्रेस को तीन सीट, फारवर्ड ब्लाक को दो और भाकपा की एक सीट प्राप्त हुयी थी. वर्तमान में विभिन्न रार्टी के अनेकों पार्षद टूटकर तृणमूल में शामिल हो जाने के बाद तृणमूल की कुल पार्षदों की संख्या 90 हो गयी है. माकपा के 12, भाजपा के तीन और भाकपा के एक पार्षद ही शेष रह गए है.
ये कहना है माकपा जिला सचिव
माकपा के जिला सचिव गौरांग चटर्जी ने कहा कि गणतंत्र के तहत विरोधी दल नेता चुनने का अधिकार उस पार्टी का होता है जिस पार्टी का विरोधी दल नेता होता है. मेयर ने गणतंत्र की खिलाफ विरोधी दल नेता का चयन किया है. इसके खिलाफ विभिन्न जगहों पर शिकायत की जायेगी. जरूरत पड़ी तो कानून का सहारा लिया जायेगा.
माकपा में बने रहेंगे वशीमूल
विपक्ष के नेता रहे श्री हक ने कहा वे माकपा में बने रहेंगे. उन्होंने अपने वरिष्ठ नेताओं से स्वीकृति लेकर ही विपक्ष के नेता पद से त्याग पत्र दिया है. उन्होंने कहा कि वे विपक्षी दल के प्रमुख की जिम्मेवारी का सही ढंग से निर्वाह नहीं कर पा रहे हैं. वे दी गयी जिम्मेदारियों एवं विपक्षी दल के नेता होने के नाते दिये गये दायित्व की भूमिका का पालन करने की मंशा रखते हुए भी अपने काम से संतुष्ट नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि नगर निगम में उन्हें नेता विपक्ष का महत्वपूर्ण दायित्व दिया गया था. उन्होंने अपने दायित्व के पालन के लिए हमेशा इमानदारी से प्रयास किया है. परंतु वे अपने कार्यों एवं उपलब्धियों से संतुष्ट नहीं हैं. इसके लिए उन्होंने किसी को भी दोषी मानने से इंकार कर दिया. भविष्य में तृणमूल में योगदान दिये जाने के मुददे पर खुल कर बोलने से इंकार करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति है यहां कभी भी कुछ भी हो सकता है.
शीघ्र नये नेता का चुनाव करेगी माकपा
माकपा की जिला सचिव मंडली के सदस्य पार्थ मुखर्जी ने कहा कि श्री हक पार्टी में बने रहेंगे. श्री हक ने अपने सीनियर नेताओं से विचार विमर्श करने के बाद उनकी अनुमति से ही निगम के नेता विपक्ष के पद से त्यागपत्र दिया है. पंचायत चुनावों के रिजल्ट आने के बाद बैठक कर नगर निगम के नेता विपक्ष के नाम का निर्धारण किया जायेगा.
मेयर ने नहीं दिया माकपा को मौका
नगरनिगम के इतिहास में पहली बार हिंदी भाषी अनुसूचित जाति की महिला तथा 10 नंबर वार्ड (जामुड़िया) की माकपा पार्षद उषा पासवान विरोधी दल की नेता बनी. वर्ष 2015 की चुनाव में वह माकपा के टिकट पर चुनाव जीत कर आयी थी. मेयर श्री तिवारी ने तत्काल इस पद पर श्रीमती पासवान का चयन कर बुधवार को उन्हें विरोधी दल नेता की नियुक्ति पत्र सौंप दिया. मेयर ने उन्हें बधाई दी. श्रीमती पासवान ने कहा कि इस पद के मिलते ही उनका दायित्व काफी बढ़ गया है. इस पद पर रहकर जनता के लिए और भी बेहतर तरीके से कार्य कर पायेंगी.
रमजान बाद कई अल्पसंख्यक पार्षद बदलेंगे पाला
आसनसोल. नगरनिगम में माकपा के पार्षद व पूर्व विरोध दल नेता वशिमूल हक के नेतृत्व में माकपा के कुछ पार्षद रमजान के बाद तृणमूल में शामिल होंगे. श्री हक कुछ दिनों पहले राज्य के युवा व क्रीड़ा मंत्री सह तृणमूल के जिला ऑब्ज़र्वर अरूप विश्वास के घर उनके मां के श्राद्ध कार्यक्रम में शरीक हुए थे. उसी समय से यह चर्चा तेज है कि श्री हक अपने कुछ अल्पसंख्यक पार्षदों को लेकर तृणमूल में शामिल होंगे.
श्री हक ने कहा कि राजनीति में कुछ भी सम्भव है. जिंदगी भर बामपंथ में रहने के बाद भी जरूरत के आधार पर कांग्रेस का समर्थन किया. इसलिए राजनीति में कब क्या होगा, यह कोई नहीं कह सकता है. तृणमूल में शामिल होने के मुद्दे पर उन्होंने फिलहाल कुछ नहीं कहा.
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