बर्दवान विवि से इतिहास में पीएचडी के लिए काउंसेलिंग पर रोक, मचा बवाल
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 09 Jul 2024 9:41 PM
भारतीय संविधान में उल्लेख है कि शिक्षा पाने का अधिकार सबको है, किसी इच्छुक को इससे वंचित नहीं किया जा सकता. यहां तक कि जेल में बंद विचाराधीन कैदी या सजायाफ्ता मुजरिम भी यदि चाहे, तो शिक्षा पा सकता है. लेकिन बर्दवान विश्वविद्यालय ने इतिहास में पीएचडी करने के लिए जरूरी मेधा आधारित काउंसेलिंग पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिससे हड़कंप मच गया है.
बर्दवान.
भारतीय संविधान में उल्लेख है कि शिक्षा पाने का अधिकार सबको है, किसी इच्छुक को इससे वंचित नहीं किया जा सकता. यहां तक कि जेल में बंद विचाराधीन कैदी या सजायाफ्ता मुजरिम भी यदि चाहे, तो शिक्षा पा सकता है. लेकिन बर्दवान विश्वविद्यालय ने इतिहास में पीएचडी करने के लिए जरूरी मेधा आधारित काउंसेलिंग पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिससे हड़कंप मच गया है. शिक्षा जगत के कई लोग विश्वविद्यालय के इस कदम को हुगली जेल में बंद पूर्व माओवादी नेता अर्णब दाम को इतिहास में शोध करने से वंचित रखने की कोशिश बता रहे हैं. हालांकि बर्दवान विश्वविद्यालय के कुलपति ने साफ किया है कि पीएचडी में दाखिले के लिए जरूरी काउंसेलिंग पर रोक अस्थायी है. सजायाफ्ता पूर्व माओवादी अर्णब दाम के आवेदन से कुछ दुविधा की स्थिति बनी है, जिससे काउंसेलिंग टाली गयी है. इतिहास में पीएचडी के लिए काउंसेलिंग पर अस्थायी रोक की अधिसूचना बर्दवान विश्वविद्यालय से जारी होते ही घमासान मच गया है. सीएम नाराज, ब्रात्य से की बातइधर, राज्य सचिवालय नवान्न के सूत्रों की मानें, तो सोमवार रात ही घटना से राज्य की मुख्यमंत्री को अवगत करा दिया गया है. उसके बाद से नाराज मुख्यमंत्री ने शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु से बातचीत कर मामले को देखने को कहा है. जंगलमहल में शांति बहाली का श्रेय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दिया जाता है. राज्य सरकार के मानवीय पैकेज से आकर्षित होकर कई माओवादियों ने हथियार डाले और समाज की मुख्यधारा में लौटे हैं. पूर्व माओवादी अर्णब दाम अभी हुगली जेल में सजा काट रहा है. अलबत्ता, बर्दवान विश्वविद्यालय के ताजा कदम को मुख्यमंत्री के प्रयासों को झटके के तौर पर देखा जा रहा है. इस बार पीएचडी की भर्ती प्रक्रिया को रोकने से माहौल गरमा गया है. मालूम रहे कि 15 फरवरी 2010 को पश्चिम मेदिनीपुर के झाड़ग्राम उपमंडल के लालगढ़ ब्लॉक के सिलदा में इएफआर कैंप पर माओवादी हमले में 23 जवान शहीद हो गये थे. कोर्ट ने मामले में पूर्व माओवादी अर्णब दाम उर्फ विक्रम समेत 23 लोगों को दोषी पाया था. कोर्ट ने उसे भी उम्रकैद की सजा सुनायी थी. अर्णब ने बर्दवान विश्वविद्यालय से इतिहास में पीएचडी के लिए आवेदन किया था, जो स्वीकार कर लिया गया. उसके बाद पुलिस के पहरे में अर्णब ने बर्दवान विश्वविद्यालय में जाकर इंटरव्यू भी दिया. मंगलवार को उनके दाखिले का दिन था. लेकिन उससे पहले शाम को, बर्दवान विश्वविद्यालय से अधिसूचना जारी कर बताया गया कि इतिहास में पीएचडी में दाखिले के लिए होनेवाली मेधा आधारित काउंसेलिंग को अपरिहार्य परिस्थितिवश अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया गया है. इस बाबत अगला निर्देश विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर आयेगा. .
इधर, राज्य में शिक्षा जगत के बड़े वर्ग का दावा है कि चूंकि अर्णब दाम पीएचडी की प्रवेश परीक्षा में 250 अभ्यर्थियों में से प्रथम स्थान पर रहा, लिहाजा उसे आधार पर प्रवेश में प्राथमिकता देनी होगी. लेकिन विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने मेरिट आधारित काउंसेलिंग टाल दी है.क्या कहते हैं कुलपति
हमें नहीं पता कि अर्णब दाम माओवादी है या नहीं, नियमानुसार उसे परीक्षा में बैठने की इजाजत दी गयी और उसका चयन हो गया. लेकिन छह माह की जो फिजिकल क्लास होगी, उसे वह कैसे अटेंड करेगा. इसको लेकर जानकारी मांगी गयी है. स्क्रूटिनी को फिलहाल रोका गया है, ना कि बंद किया गया है.
गौतम चंद्रा,
कुलपति, बर्दवान विविडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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