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जूट उत्पादन की लागत कम करने की जरुरत : राष्ट्रपति

Updated at : 01 Aug 2014 10:03 PM (IST)
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जूट उत्पादन की लागत कम करने की जरुरत : राष्ट्रपति

कोलकाता : अनाज तथा चीनी में जूट बोरी को तरजीह देने पर जोर देते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को कहा कि इसकी उत्पादन लागत को कम करने के लिये निश्चित रुप से कदम उठाये जाने चाहिए. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च ऑन जूट एंड एलॉयड फाइबर के एक सम्मेलन में श्री मुखर्जी ने कहा […]

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कोलकाता : अनाज तथा चीनी में जूट बोरी को तरजीह देने पर जोर देते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को कहा कि इसकी उत्पादन लागत को कम करने के लिये निश्चित रुप से कदम उठाये जाने चाहिए. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च ऑन जूट एंड एलॉयड फाइबर के एक सम्मेलन में श्री मुखर्जी ने कहा कि जूट स्वच्छ पर्यावरण की जरूरत के अनुकूल है.

यह उपयुक्त होगा कि यह खाद्यान्न तथा चीनी की पैकेजिंग के लिए तरजीही विकल्प बना रहे. हालांकि, उत्पादन लागत कम करने के लिए कदम उठाये जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इसके लिए बेहतर मशीनरी का विकास करना होगा, ऊर्जा के लिए उपाय तथा कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अपनाया जाना चाहिए और विनिर्माण तथा गुणवत्ता आश्वासन प्रक्रिया को उन्नत बनाना होगा.

राष्ट्रपति ने कहा कि हल्के सिंथेटिक बैग जैसी पैकेजिंग सामग्री से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिये विभिन्न प्रकार के जूट थैले बनाने को लेकर विविधीकरण जरुरी है. उदाहरण के लिये हाइड्रोकार्बन मुक्त जूट के बैग बडे घरेलू बाजार की जरुरत को पूरा कर सकता है. साथ ही निर्यात मांग को पूरा कर सकता है. आम लोगों द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले जूट से बने थैले तथा हस्तशिल्प के विनिर्माण में नवप्रवर्तन पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इन उत्पादों के लिये पूर्वी क्षेत्र के साथ देश के अन्य भागों में बडे विनिर्माण आधार स्थापित किये जा सकते हैं और इससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन में मदद मिलेगी.

मुखर्जी ने कहा कि जूट पैकेंजिंग उत्पादों की हल्की छवि को विविध उपयोगकर्ताओं के लिये बेहतर मूल्यवर्द्धित उत्पादों के जरिये बेहती बनाने के प्रयास करने होंगे. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशक के दौरान जूट उद्योग में वृद्धि की कमी रही है और अन्य संबंधित उत्पादों खासकर सिंथेटिक से मिलने वाली कडी प्रतिस्पर्धा के कारण यह पैकेजिंग सामग्री के रुप में अपनी छवि गंवायी है.न्होंने क्षेत्र में आधुनिकीकरण का अभाव, सरकारी आर्डर पर अत्यधिक निर्भरता, उत्पादकता स्तर स्थिर होने का जिक्र किया. राष्ट्रपति ने कहा कि जूट क्षेत्र के विकास के लिये सभी संबद्ध पक्षों द्वारा समन्वित प्रयास जरुरी है.

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