सारंडा जंगल के साल के पत्तों से पत्तल बनाकर आत्मनिर्भर बन रही नुईया गांव की महिलाएं
साल पत्तों से आत्मनिर्भर बन रहीं नुईया गांव की महिलाएं
West Singhbhum News : पश्चिमी सिंहभूम के नुईया गांव की महिलाएं सारंडा के जंगलों से साल के पत्ते एकत्र कर पत्तल बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं. इस कार्य से करीब 20 परिवारों को नियमित आय मिल रही है. पूरी खबर नीचे पढ़ें.
गुवा से संदीप की रिपोर्ट
West Singhbhum News : नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत गुवा थाना क्षेत्र के नुईया गांव की महिलाएं सारंडा के जंगलों से मिलने वाले साल पत्तों के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं. गांव की महिलाएं जंगल से साल के पत्ते जमा कर उनसे पत्तल तैयार करती हैं और उनकी बिक्री कर अपने परिवार के भरण-पोषण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं.
वन विभाग के सहयोग से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर
नुईया गांव के मुंडा दुरसू चाम्पिया ने बताया कि वन विभाग के सहयोग से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह कार्य न केवल महिलाओं की आय बढ़ा रहा है, बल्कि पारंपरिक वन आधारित आजीविका को भी सशक्त बना रहा है.
साल के पत्तों से तैयार हो रहे पत्तल, बढ़ रही आय
ग्रामीणों के अनुसार, सप्ताह में एक दिन महिलाएं और परिवार के अन्य सदस्य सारंडा के जंगलों से साल के पत्ते जमा करते हैं. इसके बाद इन पत्तों से पत्तल तैयार कर बंडल बनाए जाते हैं. एक परिवार सप्ताह में लगभग तीन बंडल तैयार करता है, जिनमें प्रत्येक बंडल का वजन लगभग 10 से 13 किलोग्राम होता है.
20 परिवारों को पत्तल निर्माण से मिल रही नियमित आय
गांव के करीब 20 परिवार इस कार्य से जुड़े हुए हैं और सामूहिक रूप से सप्ताह में लगभग 90 बंडल तैयार कर लेते हैं. ग्रामीणों ने बताया कि सप्ताह में एक बार जराइकेला से वाहन आता है, जिसमें तैयार पत्तलों के बंडलों को प्रति किलोग्राम 45 रुपये की दर से खरीद लिया जाता है. इससे परिवारों को नियमित आमदनी का स्रोत मिल रहा है.
पत्तल से बढ़ रही महिलाओं की आय
वहीं, पत्तल खरीदने वाले वाहन मालिक ने बताया कि इन बंडलों को गोदाम में ले जाकर पहले सुखाया जाता है. इसके बाद मशीनों की सहायता से उन्हें थाली और दोना का आकार देकर विभिन्न बाजारों में बिक्री के लिए भेजा जाता है. इस कार्य से जुड़ी महिलाओं और परिवारों में सारिया सुरीन, गोरजो चाम्पिया, चंद्रमोहन बोदरा सहित कई ग्रामीण सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रहे हैं. ग्रामीणों का मानना है कि यदि इस पहल को और प्रोत्साहन मिले तो सारंडा क्षेत्र के कई अन्य गांवों की महिलाएं भी इससे जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं.
यह भी पढ़ें: हजारीबाग जल संसाधन विभाग को मिले दो नये प्रभारी अभियंता, बलराम मुर्मू और जयपाल मांझी ने संभाली जिम्मेदारी
यह भी पढ़ें: रांची में दूसरे दिन भी जारी रहा मनरेगा कर्मियों का महाधरना, 17 जून से आमरण अनशन की चेतावनी
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Priya Gupta
प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह झारखंड बीट पर काम कर रही हैं, जहां वह खबरों को आसान भाषा में लिखती हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल बीट पर काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने हेल्थ, रेसिपी, मेहंदी डिजाइन और फैशन से जुड़ी खबरों पर काम किया. इसके अलावा, उन्होंने नेशनल प्रिंटर और लोकल चैनलों में भी काम किया है. उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से और मास्टर की पढ़ाई एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड से पूरी की है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










