गैस के लिए 35 दिन का वनवास! चाईबासा के होटलों में फिर लौटा 'कोयला युग', धुएं के आंसू रो रहे कारोबारी

Published by : Sameer Oraon Updated At : 01 Apr 2026 4:22 PM

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चाईबासा के होटलों में लौटा कोयला युग, Symbolic Image Credit- AI

LPG Crisis In Chaibasa: अमेरिका-ईरान युद्ध की आंच अब चाईबासा के किचन तक पहुंच गई है. कॉमर्शियल गैस की कीमतों में लगी आग और गायब होती सप्लाई ने होटल कारोबारियों की कमर तोड़ दी है. 2235 रुपये के पार पहुंचे सिलेंडर के बावजूद, डीलरों के पास गैस नहीं है, जिससे लोग अब 900 रुपये क्विंटल वाली लकड़ी और कोयले के धुएं में खाना बनाने को मजबूर हैं. क्या चाईबासा में फिर से बढ़ेगा खाने की थाली का दाम? पढ़ें हमारी ये रिपोर्ट

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LPG Crisis In Chaibasa, चाईबासा : वैश्विक परिस्थितियों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब चाईबासा के किचन और होटलों पर साफ दिखने लगा है. क्षेत्र में न केवल कॉमर्शियल गैस की कीमतों में 218 रुपये का भारी उछाल आया है, बल्कि बाजार से सप्लाई भी लगभग पूरी तरह गायब है. इस दोहरी मार ने आम जनता से लेकर बड़े कारोबारियों तक को, एक बार फिर कोयले और लकड़ी के जहरीले धुएं के बीच जीने को विवश कर दिया है.

आसमान छूती कीमतें और रुकी हुई सप्लाई

पश्चिमी सिंहभूम में कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत अब बढ़कर ₹2,247 (चाईबासा दर लगभग ₹2,235.50) के पार पहुंच गई है. चौंकाने वाली बात यह है कि, रिकॉर्ड दाम बढ़ने के बावजूद उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है. घरेलू उपभोक्ताओं की स्थिति भी बदतर है, जिन्हें एक रिफिल के लिए 25 से 35 दिन का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे बड़े परिवारों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है.

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होटल कारोबारियों की बढ़ी मुसीबत

गैस सप्लाई ठप होने का सबसे बुरा असर होटल और ढाबा उद्योग पर पड़ा है. होटल संचालकों को अब सुबह होते ही लकड़ी और कोयले के टालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. भट्टी जलाते ही पूरा होटल धुएं से भर जाता है, जिससे न केवल कामगारों की आंखों में आंसू आ रहे हैं, बल्कि होटल की दीवारें और बर्तन भी काले पड़ रहे हैं. ईंधन की लागत बढ़ने के कारण, कई दुकानदारों ने मजबूरी में खाने की थाली और मीनू के दाम बढ़ाने के संकेत दिए हैं.

बाजार में वैकल्पिक ईंधन की वर्तमान दरें (चाईबासा):

बोटा लकड़ी: 900 रुपये प्रति क्विंटल.

डस्टयुक्त गुल: 190 – 200 रुपये (20 किलोग्राम).

साइकिल बोझा लकड़ी: 320 रुपये (जंगल/अन्य स्रोत से)

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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