असामयिक मौत से टूट गया परिवार, डालसा ने बढ़ाया मदद का हाथ

नोवामुंडी के महुदी मुंडा साई में पीड़ित परिवार के घर पर डालसा की प्रतिनिधि. फोटो: प्रभात खबर
Noamundi News: नोवामुंडी के महुदी गांव में अजय सोरेन की असामयिक मौत के बाद डीएलएसए चाईबासा ने पीड़ित परिवार को मदद का भरोसा दिया है. परिवार को मुआवजा दिलाने और दोनों बच्चियों को स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़कर शिक्षा व पालन-पोषण सुनिश्चित करने की पहल की गई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
नोवामुंडी से सुबोध मिश्रा की रिपोर्ट
Noamundi News: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी प्रखंड के महुदी मुंडा साई निवासी अजय सोरेन की असामयिक मृत्यु ने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है. घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य की मौत के बाद पत्नी शांति लागुरी और उनकी दो मासूम बेटियां पूरी तरह बेसहारा हो गयी हैं. परिवार पर अचानक आर्थिक और मानसिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा है. घटना के बाद गांव और आसपास के लोगों में भी शोक का माहौल है.
पिता का साया उठने से बच्चियों का भविष्य संकट में
मृतक अजय सोरेन की छह वर्षीय बेटी निवृति सुरेन और दो वर्षीय आश्रीता सुरेन अभी काफी छोटी हैं. पिता की मौत के बाद दोनों बच्चियों के सिर से सहारा छिन गया है. परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही सामान्य थी, लेकिन अब कमाने वाले सदस्य के नहीं रहने से हालात और गंभीर हो गये हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार अजय सोरेन परिवार की पूरी जिम्मेदारी संभालते थे. उनकी असामयिक मौत ने पत्नी और बच्चियों के सामने जीवनयापन की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. ग्रामीणों का कहना है कि परिवार को तत्काल सहायता की जरूरत है.
पीएलवी प्रमिला पत्रा पहुंचीं पीड़ित परिवार के घर
घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) चाईबासा की ओर से पहल की गयी. प्रधान न्यायाधीश और सचिव के निर्देश पर पीएलवी प्रमिला पत्रा पीड़ित परिवार से मिलने महुदी गांव पहुंचीं. उन्होंने शोकाकुल परिवार से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया. इस दौरान उन्होंने परिवार की स्थिति की जानकारी ली और हरसंभव कानूनी तथा सामाजिक सहायता देने का भरोसा दिलाया. पीएलवी ने कहा कि डीएलएसए पीड़ित परिवार को अकेला नहीं छोड़ेगा और हर स्तर पर सहयोग किया जाएगा.
पति को याद कर भावुक हुईं शांति लागुरी
परिवार से मुलाकात के दौरान मृतक की पत्नी शांति लागुरी भावुक हो उठीं. उन्होंने रोते हुए बताया कि पति की मौत के बाद उनका जीवन पूरी तरह अंधकारमय हो गया है. उन्होंने कहा कि अब बच्चियों की परवरिश और घर चलाने की चिंता उन्हें लगातार परेशान कर रही है. शांति लागुरी ने कहा कि अजय सोरेन ही परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे. उनके नहीं रहने से पूरा परिवार टूट गया है. इस दौरान गांव की महिलाओं और स्थानीय लोगों ने भी उन्हें सांत्वना दी.
बच्चियों की शिक्षा और पालन-पोषण में मिलेगी मदद
डीएलएसए की ओर से परिवार को आश्वस्त किया गया कि मृतक के आश्रितों को जल्द मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया में सहायता की जाएगी. साथ ही दोनों बच्चियों को स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ने की पहल भी की जाएगी, ताकि उनकी शिक्षा और पालन-पोषण की व्यवस्था सुनिश्चित हो सके. पीएलवी प्रमिला पत्रा ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी करायी जाएगी. उन्होंने बताया कि बच्चियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित किया जाएगा.
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प्रशासनिक सहयोग से जगी उम्मीद
इस पहल के बाद पीड़ित परिवार और ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि कठिन परिस्थितियों में परिवार को सहारा मिलेगा. स्थानीय लोगों ने डीएलएसए की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि समय पर मिला प्रशासनिक और कानूनी सहयोग परिवार के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि बच्चियों की शिक्षा और परिवार की आर्थिक सहायता सुनिश्चित हो जाती है, तो अजय सोरेन के परिवार को नई उम्मीद मिल सकेगी. लोगों ने प्रशासन से भी परिवार की मदद के लिए आगे आने की अपील की है.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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