नोवामुंडी के बाहा मिलन समारोह में उमड़ा जनसैलाब, संस्कृति का दिखा भव्य संगम

Updated at : 10 Apr 2026 8:23 PM (IST)
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Noamundi News

नोवामुंडी में बाहा पूजा करते श्रद्धालु. फोटो: प्रभात खबर

Noamundi News: नोवामुंडी में बाहा मिलन समारोह उत्साह और परंपरा के साथ संपन्न हुआ. पूजा-अर्चना, नृत्य-गीत और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी ने आयोजन को भव्य बनाया. वक्ताओं ने बाहा पर्व के महत्व और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया, साथ ही युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश भी दिया गया. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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नोवामुंडी से सुबोध मिश्रा की रिपोर्ट

Noamundi News: झारखंड के नोवामुंडी में आदिवासी एसोसिएशन द्वारा आयोजित ‘बाहा मिलन समारोह’ पारंपरिक उत्साह और सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ. इस भव्य आयोजन में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सैकड़ों ग्रामीणों की भागीदारी ने कार्यक्रम को खास बना दिया. पूरा माहौल आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया.

पारंपरिक पूजा-अर्चना से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत लिपुंगा गांव से आए दियूरि द्वारा विधि-विधान और पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना से हुई. इस दौरान प्रकृति और परंपरा के प्रति आस्था का अनूठा दृश्य देखने को मिला. पूजा के बाद उपस्थित अतिथियों और ग्रामीणों ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया.

अतिथियों का पारंपरिक स्वागत बना आकर्षण

समारोह में मुख्य अतिथि अनुमंडल पदाधिकारी, जगन्नाथपुर महेंद्र छोटन उरांव का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया. उन्हें साल पत्ते की टोपी भेंट कर सम्मानित किया गया, जो आदिवासी संस्कृति और पहचान का प्रतीक है. इस स्वागत ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक गौरव की झलक प्रस्तुत की.

नृत्य-गीतों से सजा सांस्कृतिक मंच

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक दलों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक नृत्य और गीतों ने सभी का मन मोह लिया. ढोल-नगाड़ों की थाप और लोकगीतों की धुन पर कलाकारों ने अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया. दर्शक भी इस उत्सव में झूमते नजर आए. पूरा वातावरण उत्सवमय और आनंदपूर्ण हो गया.

बाहा पर्व के महत्व पर दिया गया जोर

समारोह में वक्ताओं ने बाहा पर्व के महत्व को विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि यह पर्व प्रकृति, प्रेम और सामुदायिक एकता का प्रतीक है. साथ ही उन्होंने आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया.

समाजिक मुद्दों पर भी हुई चर्चा

मुख्य अतिथि महेंद्र छोटन उरांव ने अपने संबोधन में शिक्षा, स्वास्थ्य, अंधविश्वास और नशाखोरी जैसी समस्याओं पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने और जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभाते हैं. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी परंपराओं को समझें और समाज के विकास में सक्रिय योगदान दें.

जनप्रतिनिधियों ने सराहा आयोजन

पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा ने भी कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज के लिए प्रेरणादायक होते हैं. उन्होंने आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और आगे बढ़ाने पर बल दिया.

बड़ी संख्या में ग्रामीणों की रही मौजूदगी

इस अवसर पर आदिवासी संगठन के अध्यक्ष घनश्याम हेंब्रम, मिथुन चंपीया, मुंडा घसूवा बारजो, अल्बर्ट मुंडा, सुबोध सिनकु, पानी लागूरी, मालती लागूरी, शुभनी, अल्बर्ट मुंडा, फिरोज अहमद सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे. सभी ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया.

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धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत में पूर्व मुखिया मतीयस सुरेंन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन दिया गया. इसके साथ ही ‘बाहा मिलन समारोह’ का समापन हुआ. यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक उत्सव रहा, बल्कि समाज को जोड़ने और परंपराओं को जीवित रखने का एक सशक्त माध्यम भी बना.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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