कहीं पढ़ी नात, कहीं लगे नारे, निकला मातमी जुलूस

Updated at : 13 Oct 2016 4:23 AM (IST)
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कहीं पढ़ी नात, कहीं लगे नारे, निकला मातमी जुलूस

मुहर्रम. जिले में झांकी व हैरतअंगेज करतबाें के साथ अखाड़ों ने निकाला जुलूस, आकर्षण के केंद्र रहे ताजिया शहर के सभी 11 अखाड़ों की ओर से मुहर्रम जुलूस निकाला गया चाईबासा में सात लाइसेंसी समेत 23 अखाड़ों ने निकाला जुलूस चक्रधरपुर : चक्रधरपुर में मुहर्रम का अखाड़ा जुलूस भव्य तरीके से निकाला गया. बुधवार की […]

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मुहर्रम. जिले में झांकी व हैरतअंगेज करतबाें के साथ अखाड़ों ने निकाला जुलूस, आकर्षण के केंद्र रहे ताजिया

शहर के सभी 11 अखाड़ों की ओर से मुहर्रम जुलूस निकाला गया
चाईबासा में सात लाइसेंसी समेत 23 अखाड़ों ने निकाला जुलूस
चक्रधरपुर : चक्रधरपुर में मुहर्रम का अखाड़ा जुलूस भव्य तरीके से निकाला गया. बुधवार की सुबह नवमी का तथा शाम में दसवीं मुहर्रम का जुलूस निकाला गया. शहर के सभी 11 अखाड़ों की ओर से जुलूस निकाला गया. उर्दू स्कूल के समीप मेन रोड पर तथा सिमिदीरी स्कूल मैदान में इकट्ठा होकर देर रात तक पारंपरिक खेलों का प्रदर्शन किया जाता रहा. दंदासाई, बंगलाटांड, लोको, चांदमारी, ग्वाला पट्टी, सौदागर पट्टी, वार्ड संख्या 6 मुजाहिद नगर, पोटका, पापड़हाता समेत कुल नौ अखाड़ा अपने मुहल्लों से निकल कर मुख्य सड़क स्थित उर्दू स्कूल के सामने पहुंचे. जबकि सिमीदीरी, चोंगासाई, मंडलसाई, आजादबस्ती, पारसाई के युवा स्कूल मैदान में इकट्ठा होकर ग्रामीण क्षेत्र में ही पारंपरिक खेलों का प्रदर्शन किया. शहरी क्षेत्र में सबसे पहले दंदासाई का जुलूस मुख्य अखाड़ा स्थल तक पहुंचा.
पवन चौक तक अखाड़ा गया और वापस उर्दू स्कूल के पास रूक कर घंटों परंपरागत खेलों का प्रदर्शन किया. दंदासाई के बाद शेष सभी 8 अखाड़े भी उर्दू स्कूल के पास इकट्ठा हुए. अखाड़ों में कई आकर्षक झांकियां प्रदर्शित की गयी. ढोल व तासे के बीच अखाड़े चलते रहे. कहीं नात पढ़ी गयी, तो कहीं नारे लगाये गये. अनुमंडल प्रशासन की ओर से अखाड़ा स्थल पर नियंत्रण कक्ष बनाया गया था, जिसमें अधिकारी व राजनेता समेत मुहर्रम सेंट्रल कमेटी के पदाधिकारी मौजूद थे.
हजारों की संख्या में दर्शक अखाड़ा स्थल पर पहुंचे थे. फातिहा व अलम रहा मिसाल. मुहर्रम की दसवीं में मुख्य अखाड़ा स्थल के पास अनेकों लोग जायनमाज बिछा कर फातिहा ख्वानी करते रहे. रोट, शीरीनी, आदि लोग लेकर आते, जिन पर फाहिता पढ़ी जाती रही. उर्दू स्कूल के सामने ही एक बांस का घेरा बनाया था, जिसमें विभिन्न अखाड़ों से लाये गये झंडे अलम को बांध कर रखा गया था. ऐसी परंपरा है कि नवमी के जुलूस में अलम को लाकर बांध दिया जाता है और दसवीं के जुलूस के साथ वापस ले जाया जाता है. लगी मिठाई की विशेष दुकानें. मुहर्रम में जिस तरह रोट, मलीदा, खिचड़ा आदि अपनी अहमियत रखते हैं.
उसी तरह यहां कि विशेष मिठाइयों की भी अपनी अलग पहचान है. तीन चार हिंदू भाइयों द्वारा हर वर्ष विभिन्न प्रकार की मिठाई बनायी जाती है, जो बरफी का ही एक रूप होता है, जिनकी खूब मांग होती है. इन मिठाई की दुकानों से लोग मिठाई खरीद कर ही फातिहा दिलाते हैं. प्रशासन रहा मुस्तैद. दो त्योहारों को लेकर पुलिस प्रशासन मुस्तैद रहा. 11 अक्तूबर रात तीन बजे तक प्रतिमाओं का विसर्जन होता रहा. इसके एक घंटे के बाद ही मुहर्रम की नवमी का जुलूस निकला और शाम में दसवीं अखाड़ा जुलूस निकला. त्योहारों को शांतिपूर्वक संपन्न कराने में पुलिस जवान मुस्तैद रहे.
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