Kharsawan: पूर्णाहुति के साथ श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का समापन, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Updated at : 24 Mar 2026 5:25 PM (IST)
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Shrimad Bhagwat Katha

पूर्णाहुति पर हवन करते श्रद्धालु

Kharsawan: खरसावां में भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का समापन पूर्णाहुति के साथ किया गया. श्रीधाम वृंदावन से आए कथा वाचक रजत रसराज जी ने भक्तों से कहा कि भागवत कथा केवल सुनने से नहीं, बल्कि जीवन में उसे उतारने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

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शचिंद्र कुमार दाश
Kharsawan: खरसावां के बेहरासाही सामुदायिक भवन परिसर में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का मंगलवार को समापन हो गया. पूर्णाहुति के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने यज्ञ में पूर्णाहुति दी. पूर्णाहुति के बाद आरती हुई. साथ ही लोगों में प्रसाद का वितरण किया गया. अंतिम दिन हवन कुंड में पूर्णाहुति और विशेष पूजा के साथ भागवत कथा का समापन हुआ. श्रीधाम वृंदावन से पधारे कथा वाचक रजत रसराज जी महाराज ने पूर्णाहुति के अवसर पर कहा कि आपने नौ दिन तक जो श्रीमद् भागवत कथा का रसपान किया, उसे जीवन में उतारना चाहिए, तभी इसकी सार्थकता होगी.

आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार करवाती है भागवत कथा

रजत रसराज जी महाराज ने कहा कि नित्य भगवान नाम का स्मरण करना चाहिए, क्योंकि कलयुग में भगवान नाम का स्मरण ही कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा. उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता का महत्व समझाते हुए कहा, भगवत गीता में मनुष्य के जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण सार समाहित है. श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान का वह भंडार है जो आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार करवाकर उसके बैकुंठ ले जाने का मार्ग का प्रशस्त करती है. कथा की सार्थकता तभी है जब इसे हम अपने जीवन में धारण कर निरंतर हरि स्मरण करते हुए जीवन को आनन्दमय और मंगलमय बनाकर आत्मकल्याण करें.

भागवत कथा के श्रवण से सोया वैराग्य जागृत होता है

कथा व्यास ने कहा कि जब सौभाग्य का उदय होता है, तब ही भागवत कथा सुनने को मिलती है. श्रीमद भागवत कथा श्रवण और माता-पिता की सेवा से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक और आध्यात्मिक विकास होता है. सोया हुआ ज्ञान वैराग्य कथा श्रवण से जाग्रत हो जाता है. कथा कल्पवृक्ष के समान है. श्रीमद्भागवत मोक्ष दायिनी है. श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई. ईश्वर की लीला, ईश्वर प्रेम, माता पिता की सेवा आदि का मर्म भागवत कथा के माध्यम से बताया.

इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष पंकज तिवारी, सचिव अभिलाश ज्योतिषी, उपाध्यक्ष आदर्श मिश्रा, कोषाध्यक्ष कृष्ण गोपाल ज्योतिषी, सूरज नापित, संदीप साहू, मदन नापित, आदर्श मिश्रा, अजय नापित, सिद्धार्थ सामल, प्रीतम मोदक, सौरभ ज्योतिषी समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे.

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AmleshNandan Sinha

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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