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Seraikela Kharsawan News :परंपरा, शिल्प व भक्ति का संगम है हरिभंजा की रथयात्रा

Updated at : 25 Jun 2025 11:01 PM (IST)
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Seraikela Kharsawan News :परंपरा, शिल्प व भक्ति का संगम है हरिभंजा की रथयात्रा

हरिभंजा में 250 साल पुरानी रथयात्रा की परंपरा, पुरी की तर्ज पर आयोजन

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खरसावां. खरसावां के हरिभंजा में प्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा काफी भव्य और पारंपरिक तरीके से निकाली जाती है. यह रथयात्रा करीब 250 साल पुरानी है, जिसकी शुरुआत 17वीं सदी में सिंहदेव वंश के जमीदारों द्वारा जगन्नाथ मंदिर की स्थापना के साथ हुई थी. तब से लेकर आज तक यहां प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन की पूजा होती आ रही है. यहां की रथयात्रा समेत तमाम धार्मिक अनुष्ठान पुरी (ओडिशा) की परंपरा और शैली के अनुरूप होते हैं. रथयात्रा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर वर्ष हरिभंजा पहुंचते हैं. सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार विशिष्ट रस्मों और विधियों के साथ रथयात्रा निकाली जाती है.

छेरा-पहंरा के साथ होती है रथयात्रा की शुरुआत

पुरी की तरह ही हरिभंजा में पारंपरिक “छेरा-पहंरा ” रस्म का विशेष महत्व है. रथयात्रा की शुरुआत इससे ही होती है. इस रस्म के अंतर्गत गांव के जमीदार विद्या विनोद सिंहदेव सड़क पर चंदन जल छिड़कते हुए झाड़ू लगाते हैं, जो प्रभु के प्रति सेवा भाव का प्रतीक है. इसके बाद प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं को झुलाते हुए (‘पोहंडी’ विधि) मंदिर से रथ तक ले जाया जाता है. इस दौरान प्रभु को विशेष रूप से तैयार मुकुट पहनाया जाता है, जिसे बाद में रथ पर विराजमान करने के बाद भक्तों के बीच वितरित कर दिया जाता है.

रथ के आगे चलते हैं संकीर्तन व घंटवाल दल

हरिभंजा की रथयात्रा में आगे-आगे संकीर्तन और घंटवाल दल चलते हैं. लगभग 50 सदस्यीय यह दल भजन-कीर्तन करते हुए रथ के आगे चलता है. इस दल को विशेष रूप से ओडिशा से आमंत्रित किया जाता है, जो यात्रा में धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण को जीवंत कर देता है.

आकर्षण का केंद्र बना नवनिर्मित जगन्नाथ मंदिर

हरिभंजा स्थित नव-निर्मित जगन्नाथ मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. वर्ष 2015 में इसका पुनर्निर्माण ओडिशा के कारीगरों द्वारा कलिंग वास्तुशैली के अनुरूप किया गया. मंदिर की बाहरी दीवारों पर भगवान विष्णु के दशावतार की सुंदर मूर्तियां स्थापित की गयी हैं, जबकि भीतर द्वारपाल, जय-विजय और दश दिग्पालों की प्रतिमाएं विराजमान हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ATUL PATHAK

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By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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