बाहुड़ा रथ यात्रा की तैयारी हुई पूरी, आज श्रीमंदिर लौटेंगे महाप्रभु जगन्नाथ

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23 केएसएन 5 : खरसावां में गुंडिचा मंदिर के सामने खड़ा प्रभु जगन्नाथ का रथ | Prabhat Khabar Network

गुंडिचा मंदिर के सामने खड़ा प्रभु जगन्नाथ का रथ | Prabhat Khabar Network

सरायकेला-खरसावां में बाहुड़ा रथ यात्रा की तैयारियां पूरी। भगवान जगन्नाथ आज मौसीबाड़ी से श्रीमंदिर के लिए रवाना होंगे. जानें यात्रा और परंपराओं की पूरी जानकारी.

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सरायकेला-खरसावां जिले में महाप्रभु जगन्नाथ की वापसी यात्रा यानी बाहुड़ा रथ यात्रा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. गुंडिचा मंदिर (मौसीबाड़ी) में एक सप्ताह से अधिक समय तक रहने के बाद शुक्रवार को भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा रथ पर सवार होकर श्रीमंदिर के लिए रवाना होंगे.

सरायकेला, खरसावां, हरिभंजा और चांडिल सहित पूरे क्षेत्र में रथों और मंदिरों को आकर्षक तरीके से सजाया गया है. श्रद्धालुओं में बाहुड़ा यात्रा को लेकर उत्साह देखा जा रहा है.

विधि-विधान के साथ हुआ दक्षिणामुख संस्कार

बाहुड़ा यात्रा से पहले गुंडिचा मंदिर में वैदिक मंत्रों के साथ भगवान जगन्नाथ के नंदिघोष रथ को श्रीमंदिर की दिशा में मोड़ा गया. इस परंपरा को दक्षिणामुख संस्कार कहा जाता है.

सरायकेला में बाहुड़ा यात्रा दो दिनों तक चलेगी. शुक्रवार को रथ रवाना होने के बाद रास्ते में रात्रि विश्राम करेगा और शनिवार को श्रीमंदिर पहुंचेगा. वहीं खरसावां, हरिभंजा, चांडिल, सीनी, गम्हरिया और आदित्यपुर में यात्रा एक ही दिन में पूरी होगी.

रथ पर सवार भगवान के दर्शन का है विशेष महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रथ पर विराजमान महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन का विशेष महत्व है. श्रद्धालु मानते हैं कि भगवान के दर्शन से जीवन में सुख-शांति और आशीर्वाद प्राप्त होता है.

छप्पन भोग और मां लक्ष्मी को मनाने की निभेगी परंपरा

हरिभंजा में श्रीमंदिर पहुंचने के बाद चतुर्धा मूर्ति को छप्पन भोग और अधरपणा की परंपरा पूरी की जाएगी. इसके बाद भगवान जगन्नाथ और मां लक्ष्मी के बीच मान-मनौवल की परंपरा निभाई जाएगी.

मान्यता है कि नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में रहने के कारण मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं और श्रीमंदिर का द्वार बंद कर देती हैं. इसके बाद भगवान जगन्नाथ उन्हें रसगुल्ला भेंट कर मनाते हैं और मंदिर का द्वार खोला जाता है. गुरुवार को सरायकेला स्थित गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ ने भक्तों को मत्स्य और कच्छप (कछुआ) अवतार के रूप में दर्शन दिए. गुरु सुशांत महापात्र और उनके सहयोगियों द्वारा की गई विशेष वेश-सज्जा सरायकेला की गुंडिचा मंदिर परंपरा की खास पहचान है. इस विशेष दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे.


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Sachindra Dash

लेखक के बारे में

By Sachindra Dash

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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