महात्मा गांधी ने 1937 में कोलकाता में देखा था सरायकेला का छऊ नृत्य, रॉयल डांस ग्रुप का था कार्यक्रम

Updated at : 30 Jan 2026 10:38 AM (IST)
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Mahatma Gandhi Death Anniversary

कोलकाता में सरायकेला के प्रसिद्ध छऊ नृत्य को देखते महात्मा गांधी.

Mahatma Gandhi Death Anniversary: साल 1937 में महात्मा गांधी ने कोलकाता में सरायकेला राजघराने के रॉयल डांस ग्रुप का छऊ नृत्य देखा. राधा-कृष्ण नृत्य ने गांधी जी को प्रभावित किया. यह नृत्य भारतीय सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला की अमूल्य धरोहर का प्रतीक है. पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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सरायकेला से शचिंद्र दाश की रिपोर्ट

Mahatma Gandhi Death Anniversary: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यादें केवल स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत के साथ भी जुड़ी हुई हैं. 1937 में गांधी जी ने पहली बार सरायकेला के विश्व प्रसिद्ध छऊ नृत्य का दर्शन किया, और इसके अद्भुत प्रस्तुति से बेहद प्रभावित हुए.

कोलकाता में हुआ नृत्य कार्यक्रम

1937 में यह ऐतिहासिक नृत्य प्रदर्शन कोलकाता में शरत चंद्र बोस के निवास पर आयोजित किया गया था. कार्यक्रम में सरायकेला राजघराने की अगुआई में रॉयल डांस ग्रुप ने भाग लिया. इस अवसर पर राजघराने के कुंअर विजय प्रताप सिंहदेव, राजकुमार सुधेंद्र नारायण सिंहदेव और नाटशेखर बन बिहारी पट्टनायक अपनी टीम के साथ गांधी जी के सामने छऊ नृत्य प्रस्तुत कर रहे थे.

राधा-कृष्ण नृत्य का प्रभाव

इस नृत्य कार्यक्रम में प्रस्तुत राधा-कृष्ण का नृत्य गांधी जी के लिए विशेष रूप से यादगार रहा. उन्होंने अपने पहले अनुभव में ही कहा था कि नृत्य देखने पर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वे वृंदावन में खड़े हैं और उनके सामने राधा-कृष्ण का नृत्य चल रहा है. इस टिप्पणी से स्पष्ट होता है कि गांधी जी को नृत्य की आत्मा और भावनात्मक गहराई ने कितना प्रभावित किया.

गांधी जी की प्रशंसा

नृत्य के बाद गांधी जी ने सरायकेला राजघराने और उनके डांस ग्रुप की जमकर प्रशंसा की. उन्होंने इसे भारतीय सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत उदाहरण बताया और कहा कि यह नृत्य न केवल कला का प्रदर्शन है, बल्कि भारतीय परंपरा और आध्यात्मिकता का प्रतीक भी है.

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सांस्कृतिक विरासत और महत्त्व

सरायकेला का छऊ नृत्य आज भी विश्व प्रसिद्ध है और इसे भारतीय नृत्य कला की अमूल्य धरोहर माना जाता है. गांधी जी के इस अनुभव ने यह संदेश भी दिया कि भारतीय संस्कृति की गहराई को सिर्फ पढ़ाई या किताबों से नहीं, बल्कि कला और प्रदर्शन के माध्यम से भी समझा जा सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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