समान वेतन की मांग को लेकर सहायक अध्यापकों ने फूंका आंदोलन का बिगुल

Updated at : 01 Jul 2024 12:04 AM (IST)
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समान वेतन की मांग को लेकर सहायक अध्यापकों ने फूंका आंदोलन का बिगुल

मशाल जुलूस निकाल कर सरकार पर वादाखिलाफी का लगाया आरोप

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साहिबगंज. सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा (राज्य कमेटी) के द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार जिले के सहायक अध्यापकों ने महागठबंधन की सरकार के वादाखिलाफी के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया. आंदोलन की शुरुआत संथाल हूल दिवस पर मशाल जुलूस निकालकर आंदोलन की चेतावनी दी. वेतनमान, सामान्य भविष्य निधि, अनुकंपा सेवा अवधि 65 साल समेत अन्य मांग एवं समस्या को लेकर झारखंड के समस्त सहायक अध्यापक 23 जून को रांची के मोरहाबादी मैदान में बैठक कर आंदोलन की रणनीति बनायी. इसकी सूचना मुख्यमंत्री समेत सत्ता पक्ष के मंत्री व विधायकों व अधिकारियों को दी. महागठबंधन की सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी के द्वारा 2019 के विधानसभा चुनाव के मेनिफेस्टो एवं चुनावी सभाओं में झारखंड के पारा शिक्षकों से वादा कर सत्ता में आयी थी कि सरकार बनने के तीन महीने के भीतर झारखंड के पारा शिक्षकों को समान काम का समान वेतन दिया जायेगा. अब तक यह वादा पूरा नहीं किया गया है. यही नहीं 14 दिसंबर 2021 को सरकार व संगठन के बीच हुए समझौते को भी सरकार अभी तक लागू नहीं कर सकी है. एकतरफ जहां राज्य सरकार सर्व शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत अन्य कर्मियों /आउटसोर्सिंग पर एक साल के लिए ठेका पर बहाल कंपनी के कर्मी को सामान्य भविष्य निधि ( EPF) का भुगतान करती है. 20 वर्षों से काम कर रहे पारा शिक्षकों को भविष्य निधि की राशि देने में सरकार आनाकानी कर रही है. हेमंत सोरेन ने पारा शिक्षक नियमावली को कैबिनेट से पारित करवाने के बाद अपनी बाहबाही बटोरी. कैबिनेट में पारित नियमावली के तहत अनुकंपा का लाभ एक भी मृत पारा शिक्षक के आश्रित को अभी तक नहीं मिल सका है, जबकि इस दौरान करीब 700 सहायक अध्यापकों की मौत हो चुकी है. 20 वर्ष काम करने के बाद सहायक अध्यापकों को फूटी कौड़ी सरकार नहीं दे रही है, जबकि विगत 20 साल से झारखंड के पारा शिक्षक प्राथमिक शिक्षा के रीढ़ बने हुए हैं, एक तरफ जहां महागठबंधन की सरकार के द्वारा अल्पसंख्यक एवं संस्कृत विद्यालय में बिना किसी परीक्षा लिए शिक्षकों की नियुक्ति कर 9300– 34800 का वेतनमान एवं पुरानी पेंशन की स्वीकृति दी गई वहीं झारखंड के पारा शिक्षक सरकार के दोयम दर्जे का दंश झेलने को भी विवश होकर आंदोलन की राह पर निकल पड़े हैं. मशाल जुलूस का नेतृत्व जिला अध्यक्ष अशोक कुमार शाह, जिला सचिव चंदन सिंह व साहिबगंज प्रखंड अध्यक्ष जितेंद्र हरि प्रखंड सचिव मोहसिन अजमल की अगुआई में निकाला गया. मशाल जुलूस रेलवे जेनरल इंस्टीट्यूट के मैदान से निकलकर नगर थाना, विवेकानंद चौक होते हुए स्टेशन परिसर तक निकाला गया. मौके पर विकास कुमार चौधरी ,अध्यापिका रेखा कुमारी, स्नेहलता, नफीस नसरीन, ज्योति हसदा, मेरी मरांडी, बबीता शर्मा, फुलवंती देवी सहायक अध्यापक सुनील चौधरी, धर्मराज मंडल, सोनू ओझा, परदेसी मुदियारी, सदन शर्मा, आनंद सौरभ, चंदन झा, लुत्फुर रहमान, बबलू चौधरी नज्मस साकिब, मुजीबुर रहमान, गौहर अली, मो हनीफ, सफीक आलम, दीपक मंडल, मो आजाद विनोद आदि मौजूद थे.

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