कोलकाता व दिल्ली से सात बच्चे मुक्त

Updated at : 07 Oct 2017 5:19 AM (IST)
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कोलकाता व दिल्ली से सात बच्चे मुक्त

साहिबगंज : जिले के सात बच्चों को अलग-अलग शहरों से बरामद कर लाया गया है. सभी बच्चे घर से भाग कर या भटक कर दूसरे शहर चले गये थे. सात बच्चों में चार लड़की व तीन लड़के हैं. बच्चों को कोलकाता व दिल्ली से बरामद कर लाया गया है. बाल संरक्षण पदाधिकारी पूनम कुमारी ने […]

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साहिबगंज : जिले के सात बच्चों को अलग-अलग शहरों से बरामद कर लाया गया है. सभी बच्चे घर से भाग कर या भटक कर दूसरे शहर चले गये थे. सात बच्चों में चार लड़की व तीन लड़के हैं. बच्चों को कोलकाता व दिल्ली से बरामद कर लाया गया है. बाल संरक्षण पदाधिकारी पूनम कुमारी ने बताया कि रांची की टीम ने झारखंड के विभिन्न जिलों के रहनेवाले कुछ 56 बच्चों को रेस्क्यू कर गुरुवार को लाया गया. रांची से साहिबगंज के बच्चों को शुक्रवार को लाया गया.

सभी सात बच्चों को रांची पुलिस बल के जवान राम भूवन यादव व महिला पुलिस रोपमई तिग्गा ने सुरक्षा व्यवस्था में साहिबगंज बाल कल्याण समिति को सौंप दिया. सभी बच्चे को गृह जांच करने के बाद परिजनों को सौंपा जायेगा. फिलहाल लड़कों को बाल गृह तथा लड़कियों को चाइल्ड लाइन में रखा गया है. मौके पर जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी पूनम कुमारी, बाल कल्याण समिति के शिवशंकर दुबे, नवीन सिंह, विनय कृष्ण, मोनिका कुमारी, चाइल्ड लाइन के मनीष, खालीद अंसारी, बाल गृह के अनिश मंडल, रंजीत सिंह उपस्थित थे.

दिल्ली से तीन बालक विकास महतो तीनपहाड़, शेख सहमद मनीष कुमार महाराजपुर, कोलकाता से बालिका बमली पहाड़िन, मरिना पहाड़िन, ठकरान टुडू रांगा व बुलबुल मंडल को लाया गया. बच्चे को देख कर परिजन खुश दिखे. ज्ञात हो कि इन बच्चों को कुछ लोगों ने बहला-फुसला कर कमाने के लिए दिल्ली ले गये थे.

कोलकाता से सात वर्ष बाद लौटी बुलबुल
साहिबगंज शहर के राजस्थान स्कूल के निकट रहने वाली कपिलदेव मंडल की दिव्यांग पुत्री बुलबुल मंडल सात साल बाद अपने घर लौटी है. उसने बताया कि तीसरी कक्षा में एक दिन स्कूल से लौटते वक्त खेलते-खेलते स्टेशन चली आयी. वहां ट्रेन में बैठ गये और हम कोलकाता पहुंच गये. वहां मां-पिताजी की काफी याद आती थी.
बुलबुल के पिता रिक्शा चालक हैं. घर वापस आकर उनके परिजन खुश हैं. गृह जांच होने के बाद परिजन को सौंप दिया जायेगा. उन्होंने जांच टीम को तालाब स्कूल में पढ़ने व राजस्थान बाजार के पास रहने की बात कही. इनके परिजन कई वर्षों तक खोजबीन की, लेकिन नहीं मिल सके. मिलने पर काफी खुशी व्यक्त करते हुए बाल कल्याण विभाग व बाल संरक्षण पदाधिकारी को बधाई दी है.
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