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Dishom Guru Meaning: दिशोम गुरु का क्या होता है मतलब? भावुक संदेश में सीएम हेमंत ने बताया अर्थ

Updated at : 05 Aug 2025 1:17 PM (IST)
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Dishom Guru shibu soren

Dishom Guru shibu soren

Dishom Guru Meaning: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन पर पूरा देश शोक में डूब चुका है. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पिता के निधन पर भावुक पोस्ट डाला है. उन्होंने पिता को याद किया और बचपन के दिनों में खोए गए. उन्होंने अपने पोस्ट में सबसे बड़ा खुलासा भी किया है, जिसके बारे में अब तक शायद ही किसी को मालूम हो. उन्होंने बताया कि आखिर शिबू सोरेन को दिशोम गुरु क्यों कहा जाता था? इसका अर्थ क्या होता है.

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Dishom Guru Meaning: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पोस्ट में अपने बचपन के दिनों को याद किया. जिसमें उन्होंने अपने पिता से पूछा था कि आखिर उन्हें दिशोम गुरु क्यों कहा जाता है? हेमंत के सवाल पर गुरु जी (शिबू सोरेन) तो पहले मुस्कुराए फिर ‘दिशोम’ का अर्थ समझाया.

दिशोम गुरु क्या अर्थ

दिशोम एक संथाली शब्द है. जिसका अर्थ होता है, “देश या समाज”और गुरु का अर्थ होता है, “मार्गदर्शक”. यानी दिशोम गुरु का अर्थ होता है, देश या समाज का मार्गदर्शक. सीएम हेमंत सोरेन ने भी अपने पोस्ट में दिशोम गुरु का अर्थ बताया है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “बचपन में जब मैं उनसे (पिता शिबू सोरेन) पूछता था. बाबा, आपको लोग दिशोम गुरु क्यों कहते हैं? तो वे मुस्कुराकर कहते, “क्योंकि बेटा, मैंने सिर्फ उनका दुख समझा और उनकी लड़ाई अपनी बना ली.” वो उपाधि न किसी किताब में लिखी गई थी, न संसद ने दी – झारखंड की जनता के दिलों से निकली थी. ‘दिशोम’ मतलब समाज, ‘गुरु’ मतलब जो रास्ता दिखाए. और सच कहूं तो बाबा ने हमें सिर्फ रास्ता नहीं दिखाया, हमें चलना सिखाया.”

मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुजर रहा हूं

हेमंत सोरेन ने अपने भावुक संदेश में लिखा, “मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुज़र रहा हूं. मेरे सिर से सिर्फ पिता का साया नहीं गया, झारखंड की आत्मा का स्तंभ चला गया. मैं उन्हें सिर्फ ‘बाबा’ नहीं कहता था. वे मेरे पथप्रदर्शक थे, मेरे विचारों की जड़ें थे, और उस जंगल जैसी छाया थे जिसने हजारों-लाखों झारखंडियों को धूप और अन्याय से बचाया.

शिबू सोरेन की पूरी जिंदगी संघर्ष में गुजरी

हेमंत सोरेन ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, “मेरे बाबा की शुरुआत बहुत साधारण थी. नेमरा गांव के उस छोटे से घर में जन्मे, जहां गरीबी थी, भूख थी, पर हिम्मत थी. बचपन में ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया. जमींदारी के शोषण ने उन्हें एक ऐसी आग दी जिसने उन्हें पूरी जिंदगी संघर्षशील बना दिया.

मैं डरता था, पर बाबा कभी नहीं डरे : हेमंत सोरेन

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, मैंने उन्हें देखा है, हल चलाते हुए, लोगों के बीच बैठते हुए, सिर्फ भाषण नहीं देते थे, लोगों का दुःख जीते थे. बचपन में मैंने उन्हें सिर्फ संघर्ष करते देखा, बड़े बड़ों से टक्कर लेते देखा. मैं डरता था, पर बाबा कभी नहीं डरे. वे कहते थे, “अगर अन्याय के खिलाफ खड़ा होना अपराध है, तो मैं बार-बार दोषी बनूंगा.”

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शिबू सोरेन ने कभी सत्ता को उपलब्धि नहीं माना

हेमंत सोरेन ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, “बाबा का संघर्ष कोई किताब नहीं समझा सकती. वो उनके पसीने में, उनकी आवाज में, और उनकी चप्पल से ढकी फटी एड़ी में था. जब झारखंड राज्य बना, तो उनका सपना साकार हुआ, पर उन्होंने कभी सत्ता को उपलब्धि नहीं माना. उन्होंने कहा, “ये राज्य मेरे लिए कुर्सी नहीं, यह मेरे लोगों की पहचान है.”

झारखंड की हर पगडंडी में, मांदर की थाप में, खेत की मिट्टी में आप हो बाबा : हेमंत

हेमंत सोरेन ने पिता शिबू सोरेन का याद करते हुए अपने भावुक पोस्ट में लिखा, “आज बाबा नहीं हैं, पर उनकी आवाज मेरे भीतर गूंज रही है. मैंने आपसे लड़ना सीखा बाबा, झुकना नहीं. मैंने आपसे झारखंड से प्रेम करना सीखा बिना किसी स्वार्थ के. अब आप हमारे बीच नहीं हो, पर झारखंड की हर पगडंडी में आप हो. हर मांदर की थाप में, हर खेत की मिट्टी में, हर गरीब की आंखों में आप झांकते हो.”

मैं झारखंड को झुकने नहीं दूंगा : हेमंत सोरेन

सीएम हेमंत सोरेन ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, “आपने जो सपना देखा, अब वो मेरा वादा है. मैं झारखंड को झुकने नहीं दूंगा, आपके नाम को मिटने नहीं दूंगा. आपका संघर्ष अधूरा नहीं रहेगा. बाबा, अब आप आराम कीजिए. आपने अपना धर्म निभा दिया. अब हमें चलना है, आपके नक्शे-कदम पर. झारखंड आपका कर्जदार रहेगा. मैं, आपका बेटा, आपका वचन निभाऊंगा. वीर शिबू जिंदाबाद – ज़िन्दाबाद, जिंदाबाद, दिशोम गुरु अमर रहें. जय झारखंड, जय जय झारखंड.”

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ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

मुख्यधारा की पत्रकारिता में 14 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. खेल जगत में मेरी रुचि है. वैसे, मैं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर काम करता हूं. झारखंड की संस्कृति में भी मेरी गहरी रुचि है. मैं पिछले 14 वर्षों से प्रभातखबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इस दौरान मुझे डिजिटल मीडिया में काम करने का काफी अनुभव प्राप्त हुआ है. फिलहाल मैं बतौर शिफ्ट इंचार्ज कार्यरत हूं.

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