Dishom Guru Meaning: दिशोम गुरु का क्या होता है मतलब? भावुक संदेश में सीएम हेमंत ने बताया अर्थ

Dishom Guru shibu soren
Dishom Guru Meaning: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन पर पूरा देश शोक में डूब चुका है. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पिता के निधन पर भावुक पोस्ट डाला है. उन्होंने पिता को याद किया और बचपन के दिनों में खोए गए. उन्होंने अपने पोस्ट में सबसे बड़ा खुलासा भी किया है, जिसके बारे में अब तक शायद ही किसी को मालूम हो. उन्होंने बताया कि आखिर शिबू सोरेन को दिशोम गुरु क्यों कहा जाता था? इसका अर्थ क्या होता है.
Dishom Guru Meaning: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पोस्ट में अपने बचपन के दिनों को याद किया. जिसमें उन्होंने अपने पिता से पूछा था कि आखिर उन्हें दिशोम गुरु क्यों कहा जाता है? हेमंत के सवाल पर गुरु जी (शिबू सोरेन) तो पहले मुस्कुराए फिर ‘दिशोम’ का अर्थ समझाया.
दिशोम गुरु क्या अर्थ
दिशोम एक संथाली शब्द है. जिसका अर्थ होता है, “देश या समाज”और गुरु का अर्थ होता है, “मार्गदर्शक”. यानी दिशोम गुरु का अर्थ होता है, देश या समाज का मार्गदर्शक. सीएम हेमंत सोरेन ने भी अपने पोस्ट में दिशोम गुरु का अर्थ बताया है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “बचपन में जब मैं उनसे (पिता शिबू सोरेन) पूछता था. बाबा, आपको लोग दिशोम गुरु क्यों कहते हैं? तो वे मुस्कुराकर कहते, “क्योंकि बेटा, मैंने सिर्फ उनका दुख समझा और उनकी लड़ाई अपनी बना ली.” वो उपाधि न किसी किताब में लिखी गई थी, न संसद ने दी – झारखंड की जनता के दिलों से निकली थी. ‘दिशोम’ मतलब समाज, ‘गुरु’ मतलब जो रास्ता दिखाए. और सच कहूं तो बाबा ने हमें सिर्फ रास्ता नहीं दिखाया, हमें चलना सिखाया.”
मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुजर रहा हूं
हेमंत सोरेन ने अपने भावुक संदेश में लिखा, “मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुज़र रहा हूं. मेरे सिर से सिर्फ पिता का साया नहीं गया, झारखंड की आत्मा का स्तंभ चला गया. मैं उन्हें सिर्फ ‘बाबा’ नहीं कहता था. वे मेरे पथप्रदर्शक थे, मेरे विचारों की जड़ें थे, और उस जंगल जैसी छाया थे जिसने हजारों-लाखों झारखंडियों को धूप और अन्याय से बचाया.
शिबू सोरेन की पूरी जिंदगी संघर्ष में गुजरी
हेमंत सोरेन ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, “मेरे बाबा की शुरुआत बहुत साधारण थी. नेमरा गांव के उस छोटे से घर में जन्मे, जहां गरीबी थी, भूख थी, पर हिम्मत थी. बचपन में ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया. जमींदारी के शोषण ने उन्हें एक ऐसी आग दी जिसने उन्हें पूरी जिंदगी संघर्षशील बना दिया.
मैं डरता था, पर बाबा कभी नहीं डरे : हेमंत सोरेन
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, मैंने उन्हें देखा है, हल चलाते हुए, लोगों के बीच बैठते हुए, सिर्फ भाषण नहीं देते थे, लोगों का दुःख जीते थे. बचपन में मैंने उन्हें सिर्फ संघर्ष करते देखा, बड़े बड़ों से टक्कर लेते देखा. मैं डरता था, पर बाबा कभी नहीं डरे. वे कहते थे, “अगर अन्याय के खिलाफ खड़ा होना अपराध है, तो मैं बार-बार दोषी बनूंगा.”
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शिबू सोरेन ने कभी सत्ता को उपलब्धि नहीं माना
हेमंत सोरेन ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, “बाबा का संघर्ष कोई किताब नहीं समझा सकती. वो उनके पसीने में, उनकी आवाज में, और उनकी चप्पल से ढकी फटी एड़ी में था. जब झारखंड राज्य बना, तो उनका सपना साकार हुआ, पर उन्होंने कभी सत्ता को उपलब्धि नहीं माना. उन्होंने कहा, “ये राज्य मेरे लिए कुर्सी नहीं, यह मेरे लोगों की पहचान है.”
झारखंड की हर पगडंडी में, मांदर की थाप में, खेत की मिट्टी में आप हो बाबा : हेमंत
हेमंत सोरेन ने पिता शिबू सोरेन का याद करते हुए अपने भावुक पोस्ट में लिखा, “आज बाबा नहीं हैं, पर उनकी आवाज मेरे भीतर गूंज रही है. मैंने आपसे लड़ना सीखा बाबा, झुकना नहीं. मैंने आपसे झारखंड से प्रेम करना सीखा बिना किसी स्वार्थ के. अब आप हमारे बीच नहीं हो, पर झारखंड की हर पगडंडी में आप हो. हर मांदर की थाप में, हर खेत की मिट्टी में, हर गरीब की आंखों में आप झांकते हो.”
मैं झारखंड को झुकने नहीं दूंगा : हेमंत सोरेन
सीएम हेमंत सोरेन ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, “आपने जो सपना देखा, अब वो मेरा वादा है. मैं झारखंड को झुकने नहीं दूंगा, आपके नाम को मिटने नहीं दूंगा. आपका संघर्ष अधूरा नहीं रहेगा. बाबा, अब आप आराम कीजिए. आपने अपना धर्म निभा दिया. अब हमें चलना है, आपके नक्शे-कदम पर. झारखंड आपका कर्जदार रहेगा. मैं, आपका बेटा, आपका वचन निभाऊंगा. वीर शिबू जिंदाबाद – ज़िन्दाबाद, जिंदाबाद, दिशोम गुरु अमर रहें. जय झारखंड, जय जय झारखंड.”
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झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
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बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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