Ranchi : शहर को चार जोन में बांट कर 3211 करोड़ से बिछेगी सीवरेज पाइपलाइन

डीपीआर प्रस्तुत करते हुए कंपनी के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2057 में रांची शहर की आबादी 30,25,792 हो जायेगी.
रांची : राजधानी को स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए सीवरेज सिस्टम का होना जरूरी है. शहर में सीवरेज पाइपलाइन बिछाने का कार्य एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से रांची नगर निगम व जुडको करेगा. इसके लिए परामर्शी कंपनी एनजेएस ने डीपीआर तैयार किया है. शहर के हर घर को सीवरेज सिस्टम से जोड़ने के लिए 3211 करोड़ रुपये खर्च होंगे. डीपीआर पर सुझाव व आपत्तियों के लिए रांची नगर निगम सभागार में मंगलवार को एनजेएस की ओर से स्टेक होल्डर मीटिंग बुलायी गयी थी.कंपनी के अधिकारी योगेश गोखले और मंदार पिपुलकर ने बताया कि इस योजना के लिए पूरे शहर को चार जोन में बांटा गया है. जोन वन का काम पहले से ही रांची नगर निगम करवा रहा है. शेष तीन जोन में सीवरेज सिस्टम के लिए डीपीआर बनाया गया है. हर जोन में एक-एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनेगा. यह एसटीपी भरम, होटवार और हेथू में बनेगा. बैठक में विधायक सीपी सिंह, नगर निगम के प्रशासक अमित कुमार, गोपालजी, अपर प्रशासक कमलाकांत गुप्ता, उप प्रशासक रवींद्र कुमार, मो अनवर हुसैन, जुडको के महाप्रबंधक एसएस सेनगुप्ता और उप परियोजना निदेशक उत्कर्ष मिश्र शामिल हुए.
2057 में शहर की आबादी होगी 30.25 लाख : डीपीआर प्रस्तुत करते हुए कंपनी के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2057 में रांची शहर की आबादी 30,25,792 हो जायेगी. वहीं, घरों की संख्या भी 3,41,336 हो जायेगी. इस आबादी पर कुल 449.59 एमएलडी सीवेज निकलने का अनुमान लगाया गया है. इसी को ध्यान में रखकर पूरे शहर में सीवरेज पाइपलाइन बिछायी जायेगी.
जोनवार प्रमुख क्षेत्र :जोन एक : मोरहाबादी, चिरौंदी, पंडरा, कांके, डुमरदगा, टैगोर हिल एरिया, रातू रोड, बजरा, बूटी मोड़ आदि क्षेत्र हैं, जहां सीवरेज पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है.
जोन दो : लालपुर, वर्धमान कंपाउंड, अलबर्ट एक्का चौक, पुरूलिया रोड, कोकर, नामकुम के क्षेत्र. यहां काम होना बाकी है.जोन तीन : पहाड़ी मंदिर, हरमू, अशोक नगर, हीनू व कडरू का एरिया.
जोन चार : धुर्वा, एचइसी, हटिया, बिरसा चौक, हेसाग, तुपुदाना, जगन्नाथ मंदिर आदि इलाके.
पाइप बिछाने के साथ करें सड़क को रिस्टोर : बैठक में विधायक सीपी सिंह ने कहा कि पाइप बिछाने के बाद शहर के कई मोहल्ले में सड़कों को उसी हाल में छोड़ दिया जाता है. इससे लोगों को काफी परेशानी होती है. इसलिए पाइप बिछाने के साथ ही सड़क को रिस्टोर किया जाये. बैठक में एनएचएआइ, पथ निर्माण एवं जियो फाइबर की ओर से भी सुझाव दिये गये.
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