बंगाल चुनाव 2026 की उल्टी गिनती शुरू, जानें कब से लगेगी आचार संहिता और क्या होगा असर

West Bengal Assembly Elections 2026: क्या आपको पता है कि आदर्श आचार संहिता कब लगता है? इसके लागू होने के बाद क्या-क्या बदल जाता है? आईए, यहां आदर्श आचार संहिता के लागू होने से लेकर उसके असर तक के बारे में जानते हैं.
खास बातें
West Bengal Assembly Elections 2026: बंगाल चुनाव 2026 की उल्टी गिनती शुरू हो गयी है. पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा कभी भी हो सकती है. क्या आप जानते हैं कि कब से पश्चिम बंगाल में आचार संहिता लगेगी और इसका क्या असर होगा? आइए, आपको बताते हैं कि किसी भी राज्य में आचार संहिता कब लगती है और उसकी वजह से क्या-क्या बदलाव आते हैं.
7 मई को खत्म हो रहा है बंगाल विधानसभा का कार्यकाल
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में इलेक्शन कमीशन की फुल बेंच ने 9-10 मार्च को कोलकाता का दौरा पूरा कर लिया. चूंकि वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 7 मई, 2026 को समाप्त हो रहा है, इसलिए चुनाव की घोषणा अब कभी भी हो सकती है. अप्रैल के अंत तक मतदान प्रक्रिया पूरी हो जाने की उम्मीद है.
कब से लगेगी आचार संहिता और क्या होगा असर?
इलेक्शन कमीशन जैसे ही किसी राज्य में विधानसभा चुनाव की घोषणा करती है, उसके साथ ही पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct – MCC) लागू हो जाती है. आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार किसी जनकल्याणकारी योजना को लागू नहीं कर सकती. राज्य में काम करने वाले अधिकारियों को कोई निर्देश नहीं दे सकती. राज्य सरकार के सभी अधिकारी भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के अधीन आ जाते हैं. इलेक्शन कमीशन के आदेश पर ही काम करते हैं.
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आदर्श आचार संहिता का असर
- नयी घोषणाओं पर रोक : राज्य सरकार किसी भी नयी योजना, वित्तीय लाभ या उद्घाटन की घोषणा नहीं कर पायेगी.
- प्रशासनिक नियंत्रण : पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले और तैनाती का सीधा नियंत्रण चुनाव आयोग के पास चला जायेगा.
- राजनीतिक विज्ञापन : सरकारी खर्च पर होने वाले विज्ञापनों और होर्डिंग्स को तुरंत हटा दिया जायेगा.
सुरक्षा के कड़े इंतजाम : 480 कंपनियां तैनात
पश्चिम बंगाल में हिंसा मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए इलेक्शन कमीशन ने पहले ही 480 कंपनियां (CAPF) बंगाल भेज दी हैं. चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने अपने कोलकाता दौरे में स्पष्ट कर दिया कि कानून का राज बिना किसी डर या पक्षपात के लागू होगा. उत्तर 24 परगना, मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना जैसे संवेदनशील जिलों में सुरक्षा बलों की सर्वाधिक तैनाती की गयी है.
60 लाख वोटर्स पर ‘सस्पेंस’
वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद करीब 60 लाख मतदाता अभी न्यायिक जांच (Under Adjudication) के दायरे में हैं. हालांकि, आयोग ने भरोसा दिया है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम नहीं काटा जायेगा. न्यायिक प्रक्रिया के बाद सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी की जायेगी.
West Bengal Assembly Elections 2026: प्रमुख जानकारियां
| कुल विधानसभा सीटें | 294 |
| बहुमत का आंकड़ा | 148 |
| वोटिंग का समय | अप्रैल-मई 2026 (संभावित) |
| सुरक्षा | केंद्रीय बलों का रूट मार्च 14 मार्च तक पूरा करने का निर्देश |
चुनाव शांतिपूर्ण और भयमुक्त माहौल में कराना हमारी प्राथमिकता है. हिंसा बर्दाश्त नहीं की जायेगी और असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई होगी.
ज्ञानेश कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त, 10 मार्च को कोलकाता में दिया गया बयान
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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