दक्षिण अफ्रीका में नौकरी दिलाने के नाम पर 9.50 लाख की ठगी, थाने में केस दर्ज

Updated at : 08 Apr 2026 7:07 PM (IST)
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Cyber Fraud

मोबाइल पर चैट करता साइबर ठग. एआई जेनरेटेड प्रतीकात्मक फोटो.

Fraud Case: रांची में दक्षिण अफ्रीका में नौकरी दिलाने के नाम पर पांच युवकों से 9.50 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. फर्जी ऑफर लेटर, टिकट और वीजा देकर आरोपियों ने धोखा दिया. एयरपोर्ट पर सच सामने आया. पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से अमन तिवारी की रिपोर्ट

Fraud Case: झारखंड की राजधानी रांची में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है. दक्षिण अफ्रीका की पेट्रोलियम कंपनी में नौकरी दिलाने का झांसा देकर पांच युवकों से करीब 9.50 लाख रुपये ठग लिए गए. इस मामले में रांची के लोअर बाजार थाना में केस दर्ज किया गया है, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.

शिकायत के आधार पर केस दर्ज

मामले में गोरखपुर निवासी 28 वर्षीय रोशन कुमार की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई है. केस में गोरखपुर निवासी मो. सुफियान और अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है. पुलिस ने बताया कि दर्ज मामले के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है.

सोशल मीडिया के जरिए फंसाया जाल

शिकायतकर्ता के अनुसार, रोस्पा टावर स्थित एक ऑफिस के पते पर दक्षिण अफ्रीका में नौकरी का विज्ञापन जारी किया गया था. यह विज्ञापन सोशल मीडिया पर भी प्रसारित किया गया था. विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर एक व्यक्ति ने खुद को सुफियान बताया और नौकरी दिलाने का भरोसा दिया. इसके बाद युवकों से व्हाट्सएप के जरिए उनका सीवी मांगा गया. सीवी भेजने के कुछ समय बाद ही कथित तौर पर ऑफर लेटर भेज दिया गया, जिसमें 700 अमेरिकी डॉलर वेतन देने का उल्लेख था. आकर्षक सैलरी और विदेश में नौकरी के लालच में युवक इस जाल में फंसते चले गए.

टिकट और वीजा के नाम पर वसूली

रोशन कुमार के साथ राम मनोज यादव और सोनू यादव सहित अन्य युवकों ने जब नौकरी के लिए हामी भरी, तो आरोपियों ने उनसे अलग-अलग मदों में पैसे मांगने शुरू कर दिए. सीवी प्रोसेसिंग, टिकट बुकिंग, वीजा और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर कुल 9.50 लाख रुपये वसूले गए. युवकों को व्हाट्सएप पर ही फ्लाइट टिकट भेजा गया, जिससे उन्हें भरोसा हो गया कि प्रक्रिया सही है. इसके अलावा मेडिकल जांच के नाम पर भी प्रत्येक युवक से पांच-पांच हजार रुपये अतिरिक्त लिए गए.

दिल्ली एयरपोर्ट पर खुला ठगी का राज

जब सभी युवक दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे, तो वहां उनकी मुलाकात दो अन्य युवकों से हुई, जो इसी तरह के ऑफर के तहत आए थे. इस दौरान जब उन्होंने आरोपी से संपर्क कर टिकट कंफर्म कराने को कहा, तो वह टालमटोल करने लगा. संदेह होने पर एयरपोर्ट पर जब टिकट और वीजा की जांच कराई गई, तो वे पूरी तरह फर्जी निकले. इसके बाद युवकों को अहसास हुआ कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं.

ऑफिस पहुंचने पर मिला ताला

ठगी का शिकार हुए सभी युवक दिल्ली से रांची पहुंचे और रोस्पा टावर स्थित बताए गए ऑफिस गए. लेकिन वहां पहुंचने पर ऑफिस बंद मिला और ताला लटका हुआ था. इसके बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि यह एक सुनियोजित ठगी का मामला है.

पासपोर्ट जब्त करने का भी आरोप

युवकों ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उनका पासपोर्ट भी अवैध तरीके से अपने पास रख लिया है. यह मामला और भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि इसमें न केवल आर्थिक ठगी, बल्कि दस्तावेजों के दुरुपयोग की भी आशंका है.

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पुलिस जांच में जुटी

लोअर बाजार थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश की जा रही है और जल्द ही इस गिरोह का खुलासा किया जाएगा. यह घटना एक बार फिर यह चेतावनी देती है कि विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले आकर्षक ऑफर से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूरी है, ताकि इस तरह की ठगी से बचा जा सके.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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