हाईकोर्ट एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने के मामले में हुआ सख्त, मांगी जांच रिपोर्ट

Updated at : 08 Apr 2026 6:56 PM (IST)
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Jharkhand High Court

झारखंड हाईकोर्ट का मुख्य द्वार.

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने चाईबासा सदर अस्पताल में एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने के मामले में सख्ती दिखाई है. कोर्ट ने राज्य सरकार से जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी और कहा कि केवल एफआईआर पर्याप्त नहीं है. दोषियों पर कार्रवाई और एसआईटी जांच की मांग भी उठी है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड में एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने के गंभीर मामले पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. चाईबासा सदर अस्पताल से जुड़े इस मामले में अदालत ने राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए जांच की प्रगति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अदालत में सुनवाई

इस मामले की सुनवाई जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अदालत में हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और पाया कि मामले की गंभीरता के बावजूद जांच की प्रगति स्पष्ट नहीं है. इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जांच से जुड़ी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करे.

अदालत की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सिर्फ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नौनिहालों को संक्रमित खून चढ़ाना बेहद गंभीर लापरवाही है, जिससे उनके जीवन पर सीधा खतरा उत्पन्न हो गया है. अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द चिन्हित कर उन्हें न्याय के कटघरे में लाना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.

राज्य सरकार के जवाब पर नाराजगी

कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाब पर भी नाराजगी जताई. अदालत ने कहा कि सरकार का जवाब केवल प्राथमिकी दर्ज करने तक सीमित है, जबकि जांच की प्रगति के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है. यह स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के लिए संतोषजनक नहीं मानी जा सकती. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है.

21 अप्रैल को अगली सुनवाई

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है. इस दौरान राज्य सरकार को जांच की अद्यतन स्थिति के साथ विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी. माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में कोर्ट इस मामले में आगे की कार्रवाई और दिशा तय कर सकता है.

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याचिकाकर्ताओं की मांग

यह याचिका दीपिका हेंब्रम और अन्य की ओर से दायर की गई है. याचिका में मांग की गई है कि मामले में सिर्फ एफआईआर दर्ज करने के बजाय एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर निष्पक्ष जांच कराई जाए. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस मामले में लापरवाही की गहन जांच जरूरी है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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