प्राइवेट ड्राइवरों के भरोसे रांची पुलिस की गश्ती गाड़ियां, कैसे बचेगी गोपनीयता?

Updated at : 23 Mar 2026 11:14 AM (IST)
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Ranchi Police News

रांची पुलिस की गश्ती वाहन चलाता प्राइवेट ड्राइवर. फोटो: प्रभात खबर

Ranchi Police News: रांची में पुलिस गश्ती वाहनों को प्राइवेट ड्राइवर चला रहे हैं, जिससे गोपनीयता पर सवाल उठ रहे हैं. डीजीपी के निर्देश के बावजूद कई थानों में निजी चालक तैनात हैं. इससे सुरक्षा जोखिम बढ़ने की आशंका है, जबकि नए वाहन मिलने के बाद भी चालक की कमी की समस्या बनी हुई है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से अजय दयाल की रिपोर्ट

Ranchi Police News: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 13 मार्च को झारखंड पुलिस को पहले चरण में 1475 गश्ती वाहन सौंपे हैं, जिनमें 638 चारपहिया व 849 दोपहिया वाहन शामिल हैं. रांची जिले को 80 बोलेरो और 849 दोपहिया वाहन मिले हैं. राज्य पुलिस ने अपराध नियंत्रण के लिए ये वाहन दिये हैं. नये वाहन तो मिले लेकिन अब भी जिला के अधिकतर थानों में प्राइवेट चालक ही गश्ती वाहन चला रहे हैं. हालांकि जिला में आरक्षी चालक 214 तथा हवलदार चालक 24 कुल 238 चालक की पोस्टिंग है. एसएसपी, एसपी, डीएसपी व थाना प्रभारियों के वाहनों में सरकारी चालक हैं, लेकिन गश्ती वाहन के लिए अधिकतर थाना अब भी प्राइवेट चालक के भरोसे है. वर्तमान में जैप, एसआइआरबी तथा एसआइएसएफ में कुल 328 चालकों की पोस्टिंग है.

अधिकतर थाना प्राइवेट चालक के भरोसे

धुर्वा थाना में दो पुराना व एक नया वाहन मिला कर तीन वाहन हैं, लेकिन वहां दो प्राइवेट चालक हैं. जगन्नाथपुर में एक नया वाहन मिला कर तीन वाहन हैं, वहां भी एक प्राइवेट चालक है. एयरपोर्ट थाना में एक पुराना व एक नया पेट्रोलिंग वाहन है, वहां भी एक प्राइवेट चालक है. डोरंडा थाना में नये और पुराने मिला कर चार वाहन हैं, लेकिन वहां भी दो प्राइवेट चालक हैं. अरगोड़ा थाना में दो नये और दो पुराने वाहन हैं, वहां एक प्राइवेट चालक है.

सुखदेवनगर में चार गश्ती वाहन हैं, जिनमें दो प्राइवेट चालक हैं. कोतवाली में नये पुराने मिला कर चार वाहन हैं, वहां भी दो प्राइवेट चालक हैं. लोअर बाजार में चार वाहन हैं, जिनमें दो प्राइवेट चालक हैं. सदर थाना में चार वाहन हैं, जिनमें दो प्राइवेट चालक हैं. बरियातू में दो नये और दो पुराने वाहन हैं, पुराने वाहन जर्जर होने के कारण नये वाहनों से गश्ती हो रही है, दोनों गश्ती वाहन प्राइवेट चालकों के भरोसे हैं.

चुटिया में एक नया गश्ती वाहन मिला है, वहां भी एक प्राइवेट चालक है. डेली मार्केट में 20 साल पुराना गश्ती वाहन की जगह नया वाहन मिला है, वह भी प्राइवेट चालक के भरोसे है. गोंदा व लालपुर में भी एक-एक प्राइवेट चालक है.

30 पीसीआर और 15 हाइवे पेट्रोलिंग में 90 चालक

जिला में 30 पीसीआर व 15 हाइवे पेट्रोलिंग सहित 45 वाहन हैं. इनमें दो शिफ्ट में काम होता है. सभी वाहनों में सरकारी चालक से काम लिया जाता है. हर वाहन में दो चालक की पोस्टिंग की गयी है. इस प्रकार से 45 वाहनों में 90 चालकों की पोस्टिंग है. ये वाहन 24 घंटे काम करते हैं. हाइवे पेट्रोलिंग मुख्य रूप से एनएच तथा रिंग रोड पर तैनात होते हैं.

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डीजीपी का निर्देश, प्राइवेट चालक और मुंशी न रखें

अगस्त 2025 में डीजीपी ने थाना व ओपी में प्राइवेट चालक व मुंशी को हटाने का निर्देश सभी जिलों के एसपी को दिया था. डीजीपी का कहना था कि थाना में प्राइवेट चालक व मुंशी रहने पर गोपनीयता भंग होने की संभावना रहती है. थाना और ओपी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज रहते हैं, जिनसे राज्य ही नहीं देश की गोपनीयता भंग होने की आशंका है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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