आय से अधिक संपत्ति मामले में विनय चौबे रिमांड पर, साले से पूछताछ जारी

Updated at : 29 Jan 2026 9:42 AM (IST)
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Ranchi News

आय से अधिक संपत्ति मामले में फंसे आईएएस विनय चौबे. फाइल फोटो

Ranchi News: आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने कार्रवाई तेज कर दी है. एसीबी के अधिकारियों के अनुसार, आरोपी विनय चौबे को एसीबी ने रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर एसीबी ने विनय चौबे को […]

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Ranchi News: आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने कार्रवाई तेज कर दी है. एसीबी के अधिकारियों के अनुसार, आरोपी विनय चौबे को एसीबी ने रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर एसीबी ने विनय चौबे को गिरफ्तार किया था. अब रिमांड के दौरान उनसे अवैध संपत्ति, निवेश और मनी ट्रेल को लेकर गहन पूछताछ की जा रही है. एसीबी अधिकारियों का कहना है कि केस में आगे अनुसंधान पूरा कर जल्द ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जाएगी. इस मामले में विनय चौबे के साले, पत्नी और रिश्तेदारों से भी पूछताछ की जा रही है.

विनय चौबे से लगातार पूछताछ

एसीबी अधिकारियों के अनुसार, विनय चौबे से पूछताछ का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि उन्होंने आय से अधिक संपत्ति कैसे और किन माध्यमों से अर्जित की. रिमांड के दौरान उनसे बैंक ट्रांजेक्शन, प्रॉपर्टी डील, शेल कंपनियों और परिजनों के नाम पर किए गए निवेश को लेकर सवाल किए जा रहे हैं. एसीबी को शुरुआती जांच में ऐसे कई दस्तावेज मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि अवैध धन को अलग-अलग माध्यमों से घुमाया गया. अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ में कई अहम सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर केस का दायरा और बढ़ सकता है.

पत्नी, साला और रिश्तेदारों से पूछताछ

इस केस में एसीबी अब तक विनय चौबे की पत्नी, साला, सरहज सहित परिवार के कई सदस्यों से पूछताछ कर चुकी है. पूछताछ के दौरान संपत्ति खरीद-बिक्री, कंपनियों में निवेश और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई. एसीबी अधिकारियों के मुताबिक, परिजनों से पूछताछ में कई नई जानकारियां सामने आई हैं, जिससे यह साफ हुआ है कि संपत्ति और निवेश सिर्फ आरोपी के नाम पर सीमित नहीं थे, बल्कि परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर भी लेन-देन किया गया.

चेतन डील मार्क कंपनी पर एसीबी की नजर

एसीबी को जांच के दौरान यह जानकारी भी मिली थी कि विनय चौबे कोलकाता की एक कंपनी “चेतन डील मार्क” के जरिए भी काले धन का निवेश करते थे. इस बिंदु को लेकर एसीबी की टीम फिलहाल गहराई से जानकारी जुटा रही है. अधिकारियों के अनुसार, इस कंपनी के बैंक खातों, डायरेक्टर्स, शेयरहोल्डिंग पैटर्न और ट्रांजेक्शन डिटेल की जांच की जा रही है. एसीबी यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या यह कंपनी सिर्फ निवेश का जरिया थी या फिर मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल की जा रही थी.

कई ठिकानों पर हो चुकी है छापेमारी

केस के अनुसंधान के दौरान मनी ट्रेल का पता लगाने के लिए एसीबी ने विभिन्न लोगों और ठिकानों पर छापेमारी भी की है. छापेमारी के दौरान कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक से जुड़े कागजात मिले हैं. एसीबी अधिकारियों का कहना है कि इन दस्तावेजों की फॉरेंसिक और वित्तीय जांच कराई जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अवैध धन कहां से आया और किन-किन खातों व कंपनियों के जरिए उसे घुमाया गया.

साले के चार्टर्ड अकाउंटेंट से पूछताछ

बुधवार को एसीबी की टीम ने विनय चौबे के साले शीपिज त्रिवेदी के चार्टर्ड अकाउंटेंट उपेंद्र शर्मा से भी पूछताछ की. उनसे कंपनी के लेन-देन, निवेश, आय-व्यय और टैक्स से जुड़े मामलों पर सवाल किए गए. एसीबी के अनुसार, सीए से एक दिन पहले भी पूछताछ हो चुकी है. हालांकि, कई अहम सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाए हैं. जो जानकारियां मिली हैं, उनका सत्यापन आगे की जांच में किया जाएगा.

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चार्जशीट की तैयारी, दायरा बढ़ने के संकेत

एसीबी अधिकारियों का कहना है कि केस में लगातार नए इनपुट मिल रहे हैं. विनय चौबे की रिमांड अवधि में पूछताछ पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. जिस तरह से परिवार, कंपनियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट तक जांच पहुंची है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में इस केस में और नाम सामने आ सकते हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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