Jharkhand Liquor Scam: झारखंड पुलिस की बड़ी लापरवाही! टीम को चकमा देकर भाग निकला किंगपिन

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Jharkhand Liquor Scam: झारखंड के शराब घोटाला मामले में पुलिस बड़ी लापरवाही सामने आई है. आरोपी भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया और नवीन केडिया के फरार होने के बाद एसीबी की जांच में पुलिस टीम की गंभीर चूक उजागर हुई. चीफ एडीजी प्रिया दुबे के निर्देश पर छत्तीसगढ़ गई टीम को सस्पेंड कर दिया गया है. इससे पहले भी नवीन केडिया केस में आठ पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके हैं. नीचे पढ़ें पूरी खबर…

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रांची से अमन तिवारी की रिपोर्ट

Jharkhand Liquor Scam: झारखंड के शराब घोटाला मामले में प्रमुख आरोपी (किंगपिन) छत्तीसगढ़ का शराब कारोबारी भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया पुलिस की लापरवाही के कारण भागने में सफल रहा. उसे गिरफ्तार करने छत्तीसगढ़ गयी पुलिस टीम खाली हाथ लौट आई. इस मामले में दूसरा प्रमुख आरोपी नवीन केडिया की भी दोबारा गिरफ्तार करने का निर्देश मिला था, लेकिन वह भी टीम को चकमा देकर अब तक फरार है. इसकी जानकारी मिलने पर एसीबी की चीफ एडीजी प्रिया दुबे ने पूरे मामले की जांच कराई. अब लापरवाही बरतने का मामला उजागर होने पर पूरी पुलिस टीम को निलंबित कर दिया गया है. भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया ही भाटिया वाइंस एंड कंपनी का मालिक है. उसे जांच के बाद एसीबी ने केस में अप्राथमिकी अभियुक्त बनाया है.

आरोपियों को फरार होने का कैसे मिला मौका?

एसीबी की चीफ एडीजी प्रिया दुबे के निर्देश पर एसीबी के अधिकारियों ने जब जांच शुरू की. जांच के दौरान उन्होंने पाया कि अगर टीम ने ठीक से छापेमारी की होती, तो आरोपी गिरफ्तार कर लिए जाते. लेकिन, टीम ने छापेमारी के दौरान ठीक से काम नहीं किया. इस कारण आरोपियों को बच कर भागने का मौका मिला.

कौन कर रहा था टीम का नेतृत्व?

झारखंड पुलिस की टीम सब इंस्पेक्टर (एसआई) गगन कुमार के नेतृत्व में छापेमारी के लिए छत्तीसगढ़ गई थी. उन्हें छापेमारी में सहयोग के लिए दो आरक्षी भी मिले थे. आरक्षियों में सत्येंद्र कुमार और प्रभाकर शामिल हैं. सब-इंस्पेक्टर और दोनों आरक्षी रांची जिला पुलिस बल के हैं. रांची पुलिस ने अतिरिक्त पुलिस बल की मांग पर तीनों पुलिस कर्मियों को एसीबी को उपलब्ध कराया था. भूपेंद्रपाल सिंह भाटिया ने अदालत में पहले ही जमानत याचिका भी दायर की थी. लेकिन, उसे खारिज कर दिया गया था.

नवीन केडिया मामले में आठ सस्पेंड

जानकारी के अनुसार, इससे पहले नवीन केडिया मामले में एसीबी ने इंस्पेक्टर सहित आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था. जिन्हें निलंबित किया गया था, उनमें इंस्पेक्टर विजय केरकेट्टा, सब-इंस्पेक्टर राहुल, शशिकांत और एएसआइ राजू शामिल हैं. इन पुलिस पदाधिकारियों के अलावा अलावा चार आरक्षियों को भी निलंबित कर दिया ���या था.

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निगरानी में भी फेल रहे पुलिस के अधिकारी

निलंबित पदाधिकारियों और आरक्षियों को नवीन केडिया की ट्रांजिट बेल के दौरान उस पर निगरानी रखने की जिम्मेवारी मिली थी. लेकिन, पुलिस पदाधिकारियों और जवानों ने निगरानी करने के बजाय सिर्फ खानापूर्ति की और आरोपी नवीन केडिया ट्रांजिट बेल की अवधि पूरी होने के बाद सरेंडर करने की बजाय भाग निकला.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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