23 फरवरी को एग्जाम सेंटर कैसे पहुंचेंगे छात्र? झारखंड में जैक इंटर और आईसीएसई परीक्षा पर चुनाव भारी

Updated at : 28 Jan 2026 9:16 AM (IST)
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23 फरवरी को एग्जाम सेंटर कैसे पहुंचेंगे छात्र? झारखंड में जैक इंटर और आईसीएसई परीक्षा पर चुनाव भारी
झारखंड राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ.

Jharkhand Civic Elections: झारखंड में 23 फरवरी 2026 को नगर निकाय चुनाव और जैक इंटर व आईसीएसई 12वीं की परीक्षाएं एक ही दिन पड़ने से गार्जियन और छात्रों की चिंता बढ़ गई है. मतदान के बीच एग्जाम सेंटर तक पहुंचना बड़ी चुनौती बन गया है. ट्रैफिक, सुरक्षा और परीक्षा केंद्रों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. गार्जियन सरकार और निर्वाचन आयोग से छात्रों के लिए अलग व्यवस्था और विशेष सुविधा की मांग कर रहे हैं. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

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Jharkhand Civic Elections: झारखंड राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने मंगलवार को नगर निकाय चुनावों का ऐलान कर दिया. लेकिन, जैक इंटर और आईसीएसई 12वीं की परीक्षा पर नगर निकाय चुनाव भारी पड़ता दिखाई दे रहा है. निर्वाचन आयुक्त ने 23 फरवरी को मतदान कराने की तारीख की घोषणा की है और इसी दिन झारखंड में जैक इंटर और आईसीएसई 12वीं की परीक्षा भी है. ऐसे में परीक्षा देने वाले छात्रों के गार्जियन के लिए यह चुनौती और चिंता बन गई है कि वे अपने बच्चों को एक्जाम सेंटर तक लेकर कैसे जाएंगे?

गार्जियन और छात्रों की बढ़ी चिंता

राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने मंगलवार को नगर निकाय चुनाव की तारीखों का ऐलान करते हुए बताया कि राज्य के 48 नगर निकायों में 23 फरवरी 2026 को एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा. लेकिन, इसी दिन झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की इंटर परीक्षा और आईसीएसई 12वीं बोर्ड की परीक्षा भी होनी है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदान के बीच छात्र अपने एग्जाम सेंटर तक कैसे पहुंचेंगे? यह सवाल इसलिए भी पैदा हो रहा है, क्योंकि उस दिन चुनावी बंदोबस्त, सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक डायवर्जन और मतदान केंद्रों की भीड़ की वजह से छात्रों और उनके गार्जियन कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा.

48 नगर निकायों में एक साथ मतदान

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, झारखंड के 09 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायतों में एक साथ चुनाव कराए जाएंगे. मतदान की प्रक्रिया बैलेट पेपर से होगी. इस बार नोटा का विकल्प नहीं रहेगा. चुनाव की अधिसूचना 2 फरवरी को जारी होगी, उसी दिन से राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी. चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए राज्यभर में संवेदनशील और अति-संवेदनशील बूथ चिह्नित किए जा रहे हैं. बड़ी संख्या में पुलिस बल, दंडाधिकारी और चुनावकर्मियों की तैनाती होगी. इसका सीधा असर यातायात, स्कूल-कॉलेज परिसरों और परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है.

23 फरवरी को किन परीक्षाओं की टक्कर चुनाव से

23 फरवरी को झारखंड में एक साथ कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं आयोजित हो रही हैं. इस दिन जैक इंटर (आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स) के छात्रों के लिए कम्प्लसरी कोर लैंग्वेज हिंदी बी और मातृभाषा की परीक्षा है. इसी दिन आईसीएसई 12वीं बोर्ड की केमिस्ट्री की परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होगी. इसके साथ ही आईसीएसई 10वीं के छात्रों की भी रोबोटिक एंड एआई और बेसिक डाटा इंटरप्रेटर विषय की परीक्षा आयोजित की जाएगी. इसका मतलब यह है कि पूरे राज्य में एक साथ मतदान और परीक्षा दोनों कैसे संभव है?

जहां होगी परीक्षा, वहीं बनेगा पोलिंग बूथ

जैक की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार मैट्रिक की परीक्षा में करीब 4,23,861 छात्र शामिल होंगे, जिनके लिए 1232 केंद्र बनाए गए हैं. इंटरमीडिएट परीक्षा में 2,12,547 छात्र परीक्षा देंगे, जिनके लिए 757 केंद्र बनाए गए हैं. अधिकतर परीक्षा केंद्र वही स्कूल और कॉलेज हैं, जिन्हें चुनाव के दौरान मतदान केंद्र भी बनाया जाता है. ऐसे में केंद्रों पर पहले से ही बैलेट, सुरक्षा बल और चुनावकर्मी मौजूद रहेंगे. यही वजह है कि शिक्षा विभाग और अभिभावकों के बीच यह चिंता गहराती जा रही है कि इन स्कूल और कॉलेजों में पहले परीक्षा होगी या फिर मतदान कराया जाएगा?

ट्रैफिक, सुरक्षा और समय बड़ी चुनौतियां

गार्जियन के लिए पोलिंग बूथ और एक्जाम सेंटर ही सबसे बड़ी चुनौती नहीं है. चुनाव के दिन शहरों और कस्बों में आमतौर पर जगह-जगह बैरिकेडिंग, गाड़ियों की चेकिंग, रूट डायवर्जन और पुलिस की गश्त जैसी व्यवस्थाएं लागू रहेंगी. ऐसे हालात में लाखों छात्रों का समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचना आसान नहीं होगा. खासकर, ग्रामीण इलाकों से शहरों में परीक्षा देने आने वाले छात्रों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. परीक्षार्थियों के गार्जियन का कहना है कि अगर सुबह से मतदान शुरू रहेगा तो दोपहर की परीक्षाओं में भी ट्रैफिक और भीड़ की समस्या बनी रह सकती है.

शिक्षकों की ड्यूटी भी बनेगी बड़ी समस्या

मतदान और परीक्षा एक दिन कराने से कोई एक समस्या नहीं है, बल्कि समस्याओं का अंबार खड़ा दिखाई दे रहा है. एक बड़ी समस्या यह भी है कि अब तक के करीब-करीब सभी चुनावों में बड़ी संख्या में शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी में लगाया जाता रहा है. नगर निकाय चुनाव में भी शिक्षकों की तैनाती लगभग तय मानी जा रही है. ऐसी स्थिति में जो शिक्षक परीक्षा केंद्र अधीक्षक, वीक्षक और रूम कंट्रोलर होंगे, वे मतदान कैसे कराएंगे? यह भी एक बड़ा सवाल बन गया है.

आठवीं, नौवीं और 11वीं की परीक्षाएं भी होंगी प्रभावित

सिर्फ इंटर और आईसीएसई की ही नहीं, बल्कि जैक की ओर से घोषित 8वीं की परीक्षा (24 फरवरी), 9वीं की परीक्षा (28 फरवरी से) और 11वीं की परीक्षा (25, 26 और 27 फरवरी) भी इसी चुनावी अवधि में आयोजित होनी हैं. इसका मतलब है कि पूरा परीक्षा कैलेंडर चुनावी माहौल के बीच चलेगा, जिससे शिक्षा विभाग की चुनौतियां और बढ़ने वाली हैं.

गार्जियन की मांग: बच्चों के लिए बने अलग व्यवस्था

गार्जियन लगातार यह मांग उठा रहे हैं कि छात्रों के लिए अलग ट्रैफिक कॉरिडोर बने, परीक्षा केंद्रों तक पास या विशेष अनुमति दी जाए और सेंसेटिव इलाकों में परीक्षार्थियों के लिए गाड़ी सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी भी छात्र का भविष्य चुनावी अव्यवस्था की भेंट न चढ़े.

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सबकी नजर अब सरकार और आयोग के फैसले पर

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राज्य सरकार, निर्वाचन आयोग और शिक्षा विभाग मिलकर कोई स्पेशल कोऑर्डिनेशन प्लान बनाएंगे या फिर छात्र, गार्जियन और स्कूल प्रशासन अपने स्तर पर ही इस बड़ी चुनौती से निपटने को मजबूर होंगे? 23 फरवरी अब सिर्फ मतदान की तारीख नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों छात्रों के लिए भविष्य की परीक्षा भी बन गई है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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