Political News : सदानों को ग्राम प्रधान/अध्यक्ष बनाया जाये : मोर्चा

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 28 Feb 2025 5:19 PM

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मूलवासी सदान मोर्चा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने पेसा कानून को लेकर सरकार द्वारा जो मसौदा ड्राफ्ट तैयार किया गया है और जिस तरह ओबीसी सर्वेक्षण में फर्जीवाड़ा हो रहा है, उसे लेकर पंचायती राज्यमंत्री दीपिका पांडेय सिंह से मिलकर आपत्ति जतायी

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रांची (संवाददाता). मूलवासी सदान मोर्चा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने पेसा कानून को लेकर सरकार द्वारा जो मसौदा ड्राफ्ट तैयार किया गया है और जिस तरह ओबीसी सर्वेक्षण में फर्जीवाड़ा हो रहा है, उसे लेकर पंचायती राज्यमंत्री दीपिका पांडेय सिंह से मिलकर आपत्ति जतायी और सही तरीके से ओबीसी का सर्वेक्षण कराने का आग्रह किया. श्री प्रसाद ने पंचायती राज्यमंत्री से कहा 74% गैर आदिवासियों में 65% मूलवासी सदानों की आबादी है, जो सदा से झारखंडी हैं. इसके बाद भी 112 प्रखंडों के सभी पंचायतों को आरक्षित कर दिया गया और मूलवासी सदानों को मुखिया, प्रमुख, जिला परिषद अध्यक्ष बनने से वंचित कर दिया गया और अब पेसा कानून के तहत सदानों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा. कहा कि सरकार द्वारा जनजातियों हितों के लिए बनाये जाने वाले कानून का मूलवासी सदान विरोधी नहीं हैं, लेकिन भारतीय संविधान द्वारा प्रदत मौलिक अधिकारों का हनन होने पर मूलवासी सदान प्रबल विरोध करेंगें. श्री प्रसाद ने कहा कि इतिहास में बहुसंख्यकों की इस तरह की उपेक्षा का कोई उदाहरण नहीं मिलता है. कहा, मूलवासी सदान मोर्चा स्थापना काल से ही सभी झारखंडवासियों के अधिकार व हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करते रहा है. किंतु मूलवासी सदान मोर्चा सदानों की हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेगा.

कहा कि महाधिवक्ता की राय के बाद विधि विभाग ने पेसा के प्रारूप पर सहमति दी है. इस मसौदा से मूलवासी सदान उपेक्षित व अपने अधिकारों से वंचित रह जायेंगे. मसौदा के अनुसार झारखंड के वनोत्पादों, निजी वृक्षों एवं अन्य औषधिय उत्पादों पर सिर्फ जनजातियों का अधिकार होना दुर्भाग्यपूर्ण है. झारखंड की सामाजिक व्यवस्था में मूलवासी सदानों अल्पसंख्यकों एवं जनजातियों के बीच एक परंपरागत सम्न्वय पारस्परिक सहयोग हमेशा से रहा है लेकिन नये कानून से सदानों की उपेक्षा एवं राजनीतिक ध्रुवीकरण के तहत झारखंड के पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था पर एक गहरी चोट है.

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