एमएस धोनी ने फिर बनाया रिकॉर्ड, झारखंड-बिहार के सबसे बड़े टैक्सपेयर बने

क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी.
MS Dhoni: पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी एक बार फिर झारखंड और बिहार के सबसे बड़े व्यक्तिगत आयकरदाता बने हैं. आयकर विभाग ने इसकी पुष्टि की है. धोनी की आय क्रिकेट, आईपीएल, विज्ञापन और बिजनेस निवेश से होती है. झारखंड ने टैक्स संग्रह में बिहार को पीछे छोड़ दिया है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
रांची से विवेक चंद्र की रिपोर्ट
MS Dhoni: पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (एमएस धोनी) एक बार फिर झारखंड और बिहार क्षेत्र के सबसे बड़े व्यक्तिगत आयकरदाता बन गए हैं. इसकी जानकारी झारखंड-बिहार के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त डी सुधाकर राव ने रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी. हालांकि, आयकर विभाग ने गोपनीयता नियमों का हवाला देते हुए धोनी द्वारा चुकाई गई टैक्स की राशि का खुलासा नहीं किया. बावजूद इसके, धोनी का लगातार शीर्ष व्यक्तिगत करदाताओं में शामिल होना उनकी मजबूत आर्थिक स्थिति और ब्रांड वैल्यू को दर्शाता है.
क्रिकेट से बिजनेस तक कई स्रोतों से होती है कमाई
रांची निवासी महेंद्र सिंह धोनी लंबे समय से झारखंड और बिहार के सबसे बड़े टैक्सपेयर के रूप में जाने जाते हैं. उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा क्रिकेट, इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल), विज्ञापनों, बिजनेस निवेश और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से आता है. धोनी कई बड़ी कंपनियों में निवेशक भी हैं और विभिन्न ब्रांड्स के प्रमोशन से भी उन्हें बड़ी आय प्राप्त होती है. क्रिकेट से संन्यास के बाद भी उनकी लोकप्रियता और व्यावसायिक सक्रियता में कोई कमी नहीं आई है.
झारखंड ने टैक्स कलेक्शन में बिहार को छोड़ा पीछे
प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त डी सुधाकर राव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित 20 हजार करोड़ रुपये के टैक्स संग्रह लक्ष्य को विभाग ने हासिल कर लिया है. इसमें झारखंड की हिस्सेदारी बिहार से अधिक रही. उन्होंने बताया कि कुल टैक्स संग्रह में 12 हजार करोड़ रुपये झारखंड से प्राप्त हुए, जबकि बिहार से आठ हजार करोड़ रुपये का कर संग्रह हुआ. उन्होंने कहा कि औद्योगिक गतिविधियों और पीएसयू की मौजूदगी के कारण झारखंड का योगदान अधिक रहा.
टैक्स चोरी के खिलाफ विभाग की बड़ी कार्रवाई
आयकर विभाग ने पिछले वित्तीय वर्ष में टैक्स चोरी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया. विभाग की ओर से 12 बड़े व्यापारिक समूहों पर छापेमारी की कार्रवाई की गई. इन कार्रवाइयों के दौरान 150 से अधिक व्यापारी जांच के दायरे में आए. वहीं कर चोरी और कर भुगतान नहीं करने के मामलों में झारखंड और बिहार में 90 से अधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं. हालांकि, विभाग ने संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया. अधिकारियों का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे की जानकारी साझा की जाएगी.
पांच करोड़ पैन धारकों में सिर्फ 40 लाख भरते हैं रिटर्न
डी सुधाकर राव ने बताया कि झारखंड और बिहार में करीब पांच करोड़ पैन कार्ड धारक हैं, लेकिन इनमें से केवल 40 लाख लोग ही आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं. उन्होंने कहा कि विभाग को सबसे अधिक कर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) और केंद्रीय संस्थानों से प्राप्त होता है. कुल टैक्स संग्रह का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा पीएसयू और केंद्रीय एजेंसियों से आता है, जबकि केवल 20 प्रतिशत करदाता कारोबारी और वेतनभोगी वर्ग से हैं. उन्होंने बताया कि सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड यानी सीसीएल झारखंड और बिहार में सबसे अधिक कर देने वाला पीएसयू है.
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नए आयकर अधिनियम पर जागरूकता अभियान
आयुक्त ने बताया कि अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए आयकर अधिनियम 2025 को लेकर विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है. इसके तहत चार्टर्ड अकाउंटेंट, व्यापारिक संगठनों और करदाताओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आयकर अधिकारियों के लिए भी क्षमता विकास कार्यक्रम चलाया जा रहा है. रांची में आयोजित कार्यशाला में बिहार और झारखंड के 100 से अधिक आयकर अधिकारियों को नए प्रावधानों की जानकारी दी गई. प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य आयकर आयुक्त कन्हैयालाल कनक और राजेश कुमार झा भी मौजूद थे.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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