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झारखंड : झामुमो ने इडी से पूछा, बड़गांई की 8.5 एकड़ जमीन कैसे हेमंत सोरेन की है

Updated at : 12 Mar 2024 4:44 AM (IST)
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झारखंड : झामुमो ने इडी से पूछा, बड़गांई की 8.5 एकड़ जमीन कैसे हेमंत सोरेन की है

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि दरअसल जब इस जमीन को 17 बार 17 लोगों के बीच बेचने की सूचना मिली.

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रांची : झामुमो ने बड़गांई अंचल की 8.5 एकड़ जमीन का मुद्दा एक बार फिर उठाते हुए इडी से सवाल किया है कि यह जमीन कैसे हेमंत सोरेन के नाम से है, इडी प्रमाण दें. झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने सोमवार को प्रदेश कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर जमीन से संबंधित कागजात भी जारी किया है. उन्होंने बताया कि इडी का पूरा खेल झारखंड के जल, जंगल, जमीन पर कब्जा करने के लिए है, जिसे हेमंत सोरेन ने रोकना चाहा, तो उन्हें जेल में डाल दिया गया है.श्री भट्टाचार्य ने कहा कि जिस भुइंहरी जमीन को सामने लाया गया है, दरअसल वह राजकुमार पाहन की जमीन है. वर्तमान में भी वह जमीन श्री पाहन के पास ही है. 2015 में उन्होंने 8.5 एकड़ जमीन हिलारियस कच्छप के नाम से रजिस्टर्ड डीज के माध्यम से लीज पर दिया था. हिलारियस कच्छप ने इस जमीन को खेती के लिए लिया था. जमीन पर बिजली कनेक्शन के लिए श्री कच्छप ने ही आवेदन दिया और उनके नाम से कनेक्शन भी लिया. बिजली बिल का भुगतान भी किया.

श्री भट्टाचार्य ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब 2015 में इस जमीन का लीज हिलारियस कच्छप के नाम से रजिस्टर्ड होता है, बिजली कनेक्शन भी मिलता है और बिल भी नियमित रूप से जमा होता है तो यह हेमंत सोरेन की जमीन कैसे हो गयी. इडी किसा आधार पर क्लेम करती है कि यह जमीन हेमंत सोरेन की है. उनके पास क्या आधार क्या है. किसी भी जमीन की पहचान खाता, खेवट और खतियान से होती है और इसमें कहीं भी हेमंत सोरेन का नाम नहीं है. श्री भट्टाचार्य ने कहा कि दरअसल जब इस जमीन को 17 बार 17 लोगों के बीच बेचने की सूचना मिली, तब राजकुमार पाहन ने जमीन वापस करने का आवेदन दिया और उन्हें जमीन वापस भी कर दी गयी. तो किस आधार पर यह हेमंत की जमीन बतायी जा रही है, जबकि जमीन उसके मालिक पास सुरक्षित है.

इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत : विजय हांसदा

राजमहल के सांसद विजय हांसदा ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक एवं स्वागत योग्य है. कोर्ट ने तुरंत ही एसबीआइ को इलेक्टोरल बॉन्ड की सूची जारी करने का निर्देश दिया है. जो स्वयं को भ्रष्टाचार से मुक्त पार्टी कहती है वे अब बतायें कि कहां से कितना पैसा आया है. वहीं सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि इडी बताये कि किन-किन कंपनियों पर छापेमारी की गयी और उसके बाद इन कंपनियों द्वारा 375 करोड़ का इलेक्टोरल बॉन्ड कैसे खरीद कर सत्ताधारी पार्टी को दिया गया.

प्रत्याशी ही चुनाव आयुक्त का चुनाव कैसे कर सकता है

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि पीएम मोदी खुद ही प्रत्याशी घोषित किये गये हैं.अब 15 मार्च को वह चुनाव आयुक्त का चुनाव कैसे कर सकते हैं. क्या प्रत्याशी ही तय करेगा कि वोट का रखवाला कौन हो. पीएम, गृहमंत्री दोनों ही प्रत्याशी हैं और दोनों ही चुनाव आयुक्त को नियुक्त कैसे कर सकते हैं. क्या ये लोग संविधान बदलने की तैयारी कर रहे हैं.

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