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उम्रकैद की सजा काट रहे 37 कैदियों की लगी लॉटरी, जल्द होंगे रिहा

Updated at : 17 Feb 2025 6:50 PM (IST)
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hemant soren meeting

झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की 33वीं बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और अलग-अलग विभागों के पदाधिकारी. फोटो : प्रभात खबर

Jharkhand News: झारखंड के जेलों में बंद उम्रकैद की सजा काट रहे 37 कैदियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की 33वीं बैठक में 37 कैदियों को रिहा करने के प्रस्ताव पर मुहर लग गयी है.

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Jharkhand News: झारखंड के अलग-अलग जेलों में उम्रकैद की सजा काट रहे 37 कैदियों के लिए खुशखबरी आयी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की बैठक में इन कैदियों को रिहा करने का फैसला किया गया है. राजधानी रांची के कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में सोमवार (17 फरवरी 2025) को आयोजित झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की बैठक में 103 मामलों की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया.

103 कैदियों का रिहा करने के प्रस्ताव पर हुआ विचार

बैठक में रिहाई से संबंधित नये मामलों के साथ-साथ वैसे कैदियों के मामलों पर भी पुनर्विचार किया गया, जिन्हें झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की पिछली बैठकों में अस्वीकृत कर दिया गया था. बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की अनुशंसा के आलोक में राज्य के विभिन्न कारागारों में आजीवन सजा काट रहे 103 कैदियों को रिहा करने के प्रस्ताव पर अधिकारियों के साथ बिंदुवार गहन विचार-विमर्श किया.

एक-एक फाइल पर हेमंत सोरेन ने किया गहन विमर्श

राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की ओर से जिन लोगों की रिहाई की अनुशंसा की गयी थी, उन पर गंभीरता से विचार किया गया. मुख्यमंत्री ने कैदियों के अपराध की प्रवृत्ति और कोर्ट, संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों, जेल अधीक्षक एवं प्रोबेशन अधिकारियों के मंतव्य की पूरी जानकारी ली. इसके बाद 37 कैदियों को रिहा करने के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी सहमति दी.

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रिहाई के बाद सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ें – हेमंत

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि इन कैदियों की रिहाई के बाद सभी की सामाजिक, आर्थिक एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि का सत्यापन जरूर करें. उन्हें झारखंड सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ें. उन्होंने कारा महानिरीक्षक को निर्देश दिया कि रिहाई के बाद इन कैदियों का ट्रैक रिकॉर्ड मेंटेन करें. जिलों के पुलिस अधीक्षक एवं अन्य अधिकारी इनकी सभी गतिविधियों की निरंतर मॉनिटरिंग करें.

बैठक में ये पदाधिकारी रहे मौजूद

बैठक में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, प्रधान सचिव गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग वंदना दादेल, डीजीपी अनुराग गुप्ता, कारा महानिरीक्षक झारखंड सुदर्शन प्रसाद मंडल, अपर विधि परामर्शी विधि विभाग नीरज कुमार, प्रोबेशन पदाधिकारी चंद्रमौलि, एआईजी तुषार रंजन गुप्ता, जेलर मो नसीम और अन्य अधिकारी मौजूद थे.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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