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आधुनिक स्टील का मैनेजर TPC उग्रवादियों के लिए वसूलता था लेवी, ऐसे हुआ मामले का खुलासा

Updated at : 19 Jun 2023 8:27 AM (IST)
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आधुनिक स्टील का मैनेजर TPC उग्रवादियों के लिए वसूलता था लेवी, ऐसे हुआ मामले का खुलासा

टीपीसी उग्रवादियों ने ग्रामीणों की भलाई और सुरक्षा के नाम पर ‘शांति सह संचालन समिति’ गठित की थी. इस समिति ने डीओ होल्डर्स और ट्रांसपोर्टरों से अलग-अलग मद में 254 रुपये प्रति एमटी की दर से वसूली का फैसला किया था.

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अधुनिक स्टील का मैनेजर अजय कुमार सिंह टीपीसी उग्रवादियों के लिए कोयला ट्रांसपोर्टरों से लेवी वसूलता था. अजय सिंह और कंपनी के जीएम संजय जैन जंगल में आयोजित टीपीसी उग्रवादियों की एक बैठक में भी हिस्सा लिया था. एनआइए ने अम्रपाली प्रोजेक्ट से जुड़े टेरर फंडिंग मामले की जांच के बाद इन तथ्यों की जानकारी कोर्ट को दी थी. एनआइए द्वारा पेश तथ्यों के आलोक में कोर्ट ने आधुनिक पावर के मैनेजर का डिस्चार्ज पिटीशन खारिज कर दिया है.

टेरर फंडिंग के मामले में दूसरा आरोप पत्र दायर किये जाने बाद आधुनिक पावर एंड नेचुरल रिसोर्स के मैनेजर अजय कुमार सिंह ने डिस्चार्ज पिटीशन दायर किया था. मामले की सुनवाई के दौरान अजय कुमार की ओर से यह दलील पेश की गयी कि इस पूरे प्रकरण में वह निर्देश है. टीपीसी उग्रवादी हथियारों से लैस रहते थे. वह डीओ होल्डर्स और ट्रांसपोर्टरों से जबरन पैसा वसूलते थे.

डीओ होल्डर और ट्रांसपोर्टर उनके खौफ से और अपनी व्यापारिक गतिविधियों को सुचारू रखने के लिए मजबूरी में उन्हें पैसे देते थे. उनका उग्रवादियों की गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं थी. वास्तव में वह तो पीड़ित थे.

एक-दूसरे से मिले हुए थे टीपीसी उग्रवादी और कंपनियों के अधिकारी :

सुनवाई के दौरान एनआइए की ओर दलील दी गयी कि आम्रपाली प्रोजेक्ट से जुड़ी पावर कंपनियों के अधिकारी, ट्रांसपोर्ट और टीपीसी के उग्रवादी एक-दूसरे से मिले हुए थे. इन कंपनियों में आधुनिक पावर एंड नेचुरल रिसोर्से, ललितपुर पावर जेनरेशन कंपनी, बालाजी ट्रांसपोर्ट, एसको कॉनकास्ट एंड मिनरल्स और बीकेबी ट्रांसपोर्ट का नाम शामिल है.

जांच में पाया गया कि टीपीसी उग्रवादियों ने ग्रामीणों की भलाई और सुरक्षा के नाम पर ‘शांति सह संचालन समिति’ गठित की थी. इस समिति ने डीओ होल्डर्स और ट्रांसपोर्टरों से अलग-अलग मद में 254 रुपये प्रति एमटी की दर से वसूली का फैसला किया था. इस राशि में टीपीसी उग्रवादियों, ग्रमीणों, सीसीएल के अधिकारियों, स्थानीय पुलिस अधिकारियों, पत्रकारों सहित अन्य का हिस्सा तय था. बाद में 254 रुपये के घटा कर 200 रुपये प्रति एमटी की दर से वसूलने का फैसला किया गया.

मैसेंजर के जरिये उग्रवादियों तक पहुंचायी जाती थी लेवी की रकम, 10 रुपये का नोट था कोडवर्ड

एनआइए ने कोर्ट को बताया कि आधुनिक पावर के मैनेजर अजय कुमार सिंह डीओ होल्डर्स और ट्रांसपोर्टरों से उग्रवादियों के निर्धारित लेवी की राशि (200 रुपये प्रति एमटी) की वसूली करते थे. बाद में यह रकम उग्रवादियों को दे दी जाती थी. उग्रवादी संगठन को लोग अपने किसी आदमी को भेज कर यह रकम व्यापारियों से मंगा लेते थे. उग्रवादियों की ओर से जिस व्यक्ति को पैसा लाने के लिए भेजा जाता था, उसे 10 रुपये का एक नोट दिया जाता था.

10 रुपये के इसी नोट का फोटो उस व्यक्ति के पास भेजा जाता था, जिसके पास से लेवी की जमा रकम लेनी होती थी. संबंधित व्यापारी नोट के नंबर से मैसेंजर की पहचान कर उसे पैसा दे देता था. एनआइए ने कोर्ट को यह भी बताया कि आधुनिक पावर के सभी अधिकारियों को यह जानकारी थी कि उग्रवादियों को पैसे दिया जा रहे हैं. इसकी पुष्टि के लिए कंपनी के अधिकारियों द्वारा एक-दूसरे को भेजे गये मेल का हवाला दिया गया.

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