SUV के पीछे क्यों भाग रही हैं कंपनियां, क्या खत्म हो रहा है हैचबैक कारों का दौर?
Published by : Rajeev Kumar Updated At : 02 Jun 2026 2:28 PM
SUV vs Hatchback
भारतीय कार बाजार में SUV की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. ज्यादा मुनाफा और ग्राहकों की बदलती पसंद के चलते कंपनियां नए हैचबैक मॉडल लाने से बच रही हैं और SUV पर फोकस बढ़ा रही हैं.
भारतीय कार बाजार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ग्राहकों की पसंद तेजी से बदली है. कभी छोटी हैचबैक कारें मध्यम वर्ग की पहली पसंद हुआ करती थीं, लेकिन अब SUV सेगमेंट ने बाजार की तस्वीर बदल दी है. ऊंचा ग्राउंड क्लीयरेंस, दमदार रोड प्रेजेंस और आधुनिक फीचर्स की वजह से खरीदार तेजी से SUV की ओर बढ़ रहे हैं. यही कारण है कि वाहन निर्माता कंपनियां भी अब नए हैचबैक मॉडल लाने के बजाय SUV पोर्टफोलियो को मजबूत करने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं.
SUV की बढ़ती लोकप्रियता ने बदला बाजार
इंडस्ट्री के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 2025 में यात्री वाहन बिक्री में SUV और क्रॉसओवर मॉडल्स की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत तक पहुंच गई. दूसरी तरफ हैचबैक सेगमेंट की हिस्सेदारी करीब 22 प्रतिशत पर सिमट गई. दिलचस्प बात यह है कि हैचबैक की बिक्री अब भी 10 लाख यूनिट सालाना से ऊपर है, लेकिन इसमें तेज वृद्धि देखने को नहीं मिल रही.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में पूरी तरह नई पेट्रोल या डीजल हैचबैक कारों की लॉन्चिंग की संभावना बेहद कम है. जो मॉडल विकास के चरण में हैं, वे या तो मौजूदा कारों के अपडेटेड वर्जन हैं या फिर उनके इलेक्ट्रिक अवतार.
कंपनियां SUV पर ज्यादा पैसा क्यों लगा रही हैं?
ऑटो उद्योग में सबसे बड़ा कारण मुनाफा माना जा रहा है. कई मामलों में हैचबैक और SUV एक ही प्लैटफॉर्म, इंजन और अन्य मैकेनिकल पार्ट्स साझा करती हैं. इसके बावजूद ग्राहक SUV के लिए ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार रहते हैं.
यही वजह है कि जहां एक सामान्य हैचबैक पर कंपनियों का मार्जिन सीमित रहता है, वहीं समान आकार की SUV पर कई गुना ज्यादा लाभ मिल सकता है. बेहतर कमाई की संभावना कंपनियों को SUV सेगमेंट में लगातार निवेश करने के लिए प्रेरित कर रही है.
SUV vs Hatchback: हैचबैक सेगमेंट पूरी तरह खत्म नहीं होगा
हालांकि SUV का दबदबा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हैचबैक कारें बाजार से गायब हो जाएंगी. पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहकों, छोटे परिवारों और शहरों में रहने वाले लोगों के बीच इनकी मांग अब भी बनी हुई है.
कम कीमत, बेहतर माइलेज और आसान ड्राइविंग की वजह से हैचबैक आज भी बड़ी संख्या में खरीदारों को आकर्षित करती हैं. यही कारण है कि कंपनियां मौजूदा मॉडलों को बनाए रखते हुए उनमें नए फीचर्स जोड़ रही हैं.
फीचर्स के दम पर बचाई जा रही है हैचबैक की चमक
ऑटो कंपनियां अब हैचबैक कारों को पहले से ज्यादा आधुनिक बनाने की कोशिश कर रही हैं. हाल ही में लॉन्च हुई नई पीढ़ी की कुछ हैचबैक कारों में 360 डिग्री कैमरा, वायरलेस चार्जिंग, छह एयरबैग और कनेक्टेड तकनीक जैसे फीचर्स देखने को मिल रहे हैं.
पहले ये सुविधाएं केवल महंगी SUV और प्रीमियम कारों तक सीमित थीं. अब इन्हें छोटे सेगमेंट की कारों में शामिल करके ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है.
SUV vs Hatchback: आने वाले वर्षों में कैसी होगी तस्वीर?
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में SUV भारतीय बाजार की सबसे प्रमुख श्रेणी बनी रहेगी. नई लॉन्चिंग, तकनीकी निवेश और मार्केटिंग का बड़ा हिस्सा इसी सेगमेंट में जाता रहेगा.
वहीं हैचबैक बाजार धीरे-धीरे एक रिप्लेसमेंट सेगमेंट में बदल सकता है, जहां ग्राहक नई कार खरीदने के बजाय पुराने मॉडल को अपडेटेड संस्करण से बदलेंगे. इसके बावजूद किफायती व्यक्तिगत परिवहन के विकल्प के रूप में हैचबैक की भूमिका आने वाले वर्षों में भी महत्वपूर्ण बनी रह सकती है.
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