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झारखंड और ओडिशा के लिए खुशखबरी, 3 नयी रेल लाइन परियोजना से विकास को मिलेगी रफ्तार

Updated at : 23 Aug 2024 7:24 AM (IST)
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झारखंड और ओडिशा की 3 नई रेल लाइन परियोजनाओं का नक्शा.

Indian Railways News: झारखंड और ओडिशा में 3 नई रेल लाइनों को भारतीय रेलवे ने मंजूरी दे दी है. इससे दोनों राज्यों के कई जिलों में विकास को रफ्तार मिलेगी.

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Indian Railways News: भारतीय रेलवे ने दक्षिण पूर्व रेलवे की 3 नयी रेल लाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे न केवल झारखंड और ओडिशा के कई क्षेत्रों का विकास होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार का भी सृजन होगा. 3 नयी रेल लाइनों के बनने से ओडिशा के मयूरभंज और केंदुझार जिले और झारखंड के पूर्व सिंहभूम जिले जैसे पिछड़े इलाकों के विकास को गति मिलेगी.

झारखंड की आयरन एंड स्टील इंडस्ट्री को मिलेगा बूस्ट

इन 3 परियोजनाओं के पूरा होने से झारखंड की आयरन एंड स्टील इंडस्ट्री को तो बूस्ट मिलेगा ही, थर्मल प्लांट्स को तेजी से कोयले की आपूर्ति शुरू हो जाएगी. टाटानगर और रांची इंडस्ट्रियल क्लस्टर की कनेक्टिविटी बेहतर होगी. बंगाल और बिहार से झारखंड के संताल परगना में आवागमन आसान हो जाएगा.

टाटा से रांची और खड़गपुर की दूरी हो जाएगी 30 किलोमीटर कम

मेल एक्सप्रेस ट्रेनों और मालगाड़ी के लिए टाटानगर (जमशेदपुर) से रांची और खड़गपुर की दूरी 30 किलोमीटर घट जाएगी. पारादीप, धामरा और सुवर्णरेखा बंदरगाह तक कोयला और स्टील की ढुलाई में तेजी आएगी. यह सस्ती भी होगी. उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र के साथ-साथ पूर्वी सिंहभूम के श्रद्धालुओं के लिए भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी की यात्रा आधे घंटे कम हो जाएगी.

160 किलोमीटर की रफ्तार से इस रूट पर चल सकेंगी ट्रेनें

पूर्वी सिंहभूम और उत्तरी छोटनागपुर के उद्योगों को सस्ते में कोयले और डोलोमाइट की आपूर्ति शुरू हो जाएगी. इस रूट से उन इलाकों में भी पहुंच आसान हो जाएगी, जहां अभी जाना काफी दुरूह है. इस नए लाइन पर ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगी.

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ट्रेन से मुर्गा महादेव और मां तारिणी पीठ जाना होगा आसान

धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच सुनिश्चित होगी. पश्चिमी सिंहभूम के मुर्गा महादेव मंदिर और मां तारिणी पीठ घाटगांव तक लोग इस रेल मार्ग से पहुंच सकेंगे. पर्यटन स्थल सिमलीपाल बायोस्फेयर रिजर्व तक जाना भी आसान हो जाएगा. क्वार्ट्ज और क्वार्ट्जाइट आधारित उद्योगों को बहुत फायदा होगा.

6294 करोड़ रुपए की लागत से पूरी होंगी रेल परियोजनाएं

6294 करोड़ रुपए की लागत से पूरी होने वाली इन रेल परियोजनाओं के पूरा होने के बाद टाटानगर और पारादीप एवं पूर्वी तट पर स्थित अन्य बंदरगाहों के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी. इस परियोजना से 76 लाख मानव दिवस के रोजगार का सृजन होगा. 259 करोड़ किलो कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी. यानी 10.3 करोड़ पेड़ जितना कार्बन सोखेंगे, इस परियोजना से उतने कार्बन का उत्सर्जन रोका जा सकेगा.

3 रेल लाइन से ओडिशा और झारखंड के कई जगह जुड़ेंगे

इन नयी रेल लाइनों में बादामपहाड़-केंदुझारगढ़ रेल लाइन, बांगरीपोसी-गोरुमहिसानी रेल लाइन और बुरामारा-चाकुलिया रेल लाइन है. 82.06 किलोमीटर लंबी बादामपहाड़-केंदुझारगढ़ रेल लाइन परियोजना ओडिशा के मयूरभंज और क्योंझर जिलों को कवर करेगी.

बांगरीपोसी-गोरुमहिसानी रेल लाइन पर खर्च होंगे 2269.49 करोड़

इस लाइन के निर्माण में 1875.72 करोड़ रुपए की लागत आयेगी. 85.60 किलोमीटर लंबी बांगरीपोसी-गोरुमहिसानी रेल लाइन परियोजना भी ओडिशा के मयूरभंज जिले को कवर करेगी. इसकी लागत 2269.49 करोड़ रुपए है.

बुरामारा-चाकुलिया रेल परियोजना की लंबाई 59.96 किलोमीटर

बुरामारा-चाकुलिया नयी रेल लाइन परियोजना की लंबाई 59.96 किलोमीटर है. यह परियोजना ओडिशा के मयूरभंज और झारखंड के पूर्व सिंहभूम जिले को कवर करेगी. इस लाइन के निर्माण के लिए 1459.13 करोड़ रुपए आवंटित किये गये हैं.

झारखंड और ओडिशा के रेल यात्रियों को होगा फायदा

तीनों नयी रेल लाइनों के एनाउंस होने से झारखंड और ओडिशा के आम यात्रियों को काफी लाभ होगा. नयी लाइनों के बनने से व्यापार को भी काफी लाभ होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा.

औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगा बढ़ावा

ओडिशा और झारखंड के खनिज समृद्ध क्षेत्रों में 3 लाइनों के निर्माण से माल ढुलाई की गुंजाइश बनेगी और इससे आस-पास के औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा. इससे नतीजतन, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे.

रेलवे को भी होगा फायदा

नई रेल लाइन के बन जाने के बाद पूर्व तटीय इलाके से उत्तरी भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों को भीड़-भाड़वाले रूपसा-खड़गपुर-टाटानगर (हावड़ा-मुंबई डाउन लाइन और हावड़ा-चेन्नई डाउन लाइन) होकर नहीं जाना होगा.

52 किमी घट जाएगी टाटानगर से क्योंझर की दूरी

इस रेल लाइन का निर्माण पूरा होने के बाद टाटानगर और क्योंझर के बीच की दूरी 52 किलोमीटर घट जाएगी. इससे जखपुर (कलिंगनगर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) और टाटानगर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी.

दक्षिण पूर्व रेलवे में कौन सी 3 रेल लाइनें बनेंगीं

दक्षिण पूर्व रेलवे ने झारखंड और ओडिशा में 3 नयी रेल लाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी है. ये तीनों रेल लाइनें बादामपहाड़-केंदुझारगढ़ रेल लाइन, बांगरीपोसी-गोरुमहिसानी रेल लाइन और बुरामारा-चाकुलिया रेल लाइन हैं.

ओडिशा और झारखंड की 3 नई रेल लाइन परियोजनाओं के क्या होंगे फायदे

झारखंड और ओडिशा में 3 रेल लाइनों का निर्माण पूरा होने के बाद कई क्षेत्रों का विकास होगा. बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा. ओडिशा के मयूरभंज और केंदुझार जिले झारखंड के पूर्वी सिंहभूम से जुड़ेंगे और विकास को गति मिलेगी.

दक्षिण पूर्व रेलवे की 3 नई रेल लाइन परियोजनाओं पर कितना खर्च होगा

दक्षिण पूर्व रेलवे ने झारखंड और ओडिशा में जिन 3 रेल लाइनों के निर्माण को मंजूरी दी है. उस पर कुल 6,294 करोड़ रुपए की लागत आएगी. इसका निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद टाटानगर और पारादीप एवं पूर्वी तट पर स्थित अन्य बंदरगाहों तक पहुंचना आसान हो जाएगा.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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