झारखंड में हायर एजुकेशन का हाल बेहाल, 65 फीसदी पद खाली, नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर्स को नियमित करने की मांग

DSSSB Delhi Teacher Bharti 2025
झारखंड में हायर एजुकेशन शिक्षकों की कमी से जूझ रही है. इनका 65 फीसदी पद खाली है. झारखंड असिस्टेंट प्रोफेसर अनुबंध एसोसिएशन ने नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर्स को नियमित करने की मांग की है.
रांची-झारखंड असिस्टेंट प्रोफेसर अनुबंध एसोसिएशन की बैठक केंद्रीय अध्यक्ष डॉ एसके झा की अध्यक्षता में हुई. बैठक में शिक्षकों ने राज्य सरकार से विश्वविद्यालय और कॉलेजों में कार्यरत नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर का शीघ्र नियमितीकरण करने की मांग की. डॉ एसके झा ने बताया कि झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था शिक्षकों की घोर कमी से जूझ रही है. राज्य में शिक्षकों के कुल 4317 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 65% (2808) पद रिक्त हैं. रोस्टर क्लियरेंस होने के बाद अगस्त 2023 में मात्र 2404 पदों के लिए जेपीएससी में अधियाचना भेजी गयी है. विडंबना यह है कि जिन पदों पर पिछले सात वर्षों से 700 से अधिक नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत हैं, उन पदों की भी अधियाचना भेज दी गयी है.
नैक ग्रेडिंग के लिए हो नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर का नियमितीकरण
सचिव डॉ ब्रह्मानंद साहू ने कहा कि नैक ग्रेडिंग के लिए 75 प्रतिशत नियमित शिक्षकों का होना अनिवार्य कर दिया गया है. इस स्थिति में नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर का नियमितीकरण कर शिक्षकों की कमी शीघ्र दूर की जा सकती है. केंद्रीय कोषाध्यक्ष डॉ सुमंत कुमार ने कहा कि राज्य में 1978,1980 तथा 1982 में सिर्फ 18 महीने तथा 24 महीने कार्य करने पर अस्थाई शिक्षकों का नियमितीकरण किया गया था. वर्तमान में ऐसे शिक्षक सात वर्ष से कार्य कर रहे हैं. नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर को अब रेगुलराइज करने हेतु सरकार को शीघ्र नीति निर्धारित करना चाहिए.
सरकार से नियमित करने की मांग
संघ के केंद्रीय प्रवक्ता डॉ हरेंद्र पंडित ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि यूजीसी के अनुसार सहायक प्राध्यापक की आवश्यक अर्हता रखने वाले, विधिवत चुनकर सेवा में इतने लंबे समय से कार्यरत नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर को राज्य सरकार द्वारा अब नियमित किया जाना चाहिए. वर्तमान सरकार के पहले कार्यकाल में ही इस बात की अपेक्षा सरकार से थी, क्योंकि चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री ने सभी संविदाकर्मियों को नियमित करने का वादा किया था. बैठक में डॉ सुमंत कुमार, डॉ हरेंद्र पंडित, डॉ सीडी मुंडा, डॉ प्रभाकर कुमार, डॉ अजयनाथ शाहदेव, डॉ अजीत हांसदा, डॉ तेतरु उरांव, डॉ अवंतिका कुमारी, डॉ सोयब अंसारी, डॉ वासुदेव प्रजापति, डॉ चंद्रकांत कमल, डॉ मुकेश कुमार, डॉ अन्नपूर्णा झा, डॉ ललिता सुंडी, डॉ पुष्पा तिवारी, डॉ अंजना सिंह, डॉ दीपक कुमार, डॉ लक्ष्मी कुमारी आदि शामिल हुए.
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लेखक के बारे में
By Guru Swarup Mishra
मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.
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