दोस्त से पैसा मांगना पड़ा महंगा, षड्यंत्र रचकर पारा शिक्षक की हत्या, आरोपी गिरफ्तार

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 30 May 2026 9:30 PM

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पारा शिक्षक की हत्या में शामिल आरोपी के बारे में जानकारी देते एसडीपीओ व थाना प्रभारी. फोटो: प्रभात खबर

Palamu News: पलामू के छतरपुर में पारा शिक्षक उदय सिंह की हत्या मामले का पुलिस ने खुलासा किया है. कर्ज के पैसे को लेकर हुए विवाद में उनके दोस्त और सहकर्मी सुरेंद्र यादव ने हत्या की साजिश रची थी. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर फरसा, मोबाइल और बाइक बरामद कर ली है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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पलामू से शिवेंद्र कुमार की रिपोर्ट

Palamu News: झारखंड के पलामू जिले में एक पारा शिक्षक की हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. छतरपुर थाना क्षेत्र के चिल्हो खुर्द गांव निवासी 50 वर्षीय पारा शिक्षक उदय सिंह की हत्या उनके ही करीबी मित्र और सहकर्मी पारा शिक्षक सुरेंद्र यादव ने की थी. पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. हत्या के पीछे कर्ज के पैसे और आपसी विवाद को मुख्य कारण बताया जा रहा है.

पत्नी की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला

एसडीपीओ प्रशांत कुमार ने शनिवार को प्रेस वार्ता में बताया कि गुरुवार को उदय सिंह की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी. घटना के बाद मृतक की पत्नी ने छतरपुर थाना में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और मोबाइल सीडीआर, तकनीकी साक्ष्यों तथा अन्य जानकारियों के आधार पर संदेह के दायरे में आए सुरेंद्र यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की. पूछताछ के दौरान आरोपी ने हत्या की बात स्वीकार कर ली.

कर्ज के पैसे को लेकर हुआ था विवाद

पुलिस के अनुसार सुरेंद्र यादव ने पूछताछ में बताया कि करीब छह माह पहले उसने उदय सिंह से 25 हजार रुपये कर्ज लिया था. समय बीतने के बाद उदय सिंह उससे ब्याज सहित 50 हजार रुपये की मांग कर रहे थे. इसी बात को लेकर दोनों के बीच एक सप्ताह पहले कहासुनी हुई थी. आरोपी के अनुसार विवाद के दौरान उदय सिंह ने उसके साथ धक्का-मुक्की और गाली-गलौज भी की थी. इस घटना के बाद से वह अंदर ही अंदर नाराज और आक्रोशित था.

शराब पिलाकर की हत्या

एसडीपीओ ने बताया कि गुरुवार को दोनों पारा शिक्षक पाटन बाजार में मिले थे. बातचीत के दौरान सुरेंद्र यादव ने उदय सिंह को साथ बैठकर शराब पीने का प्रस्ताव दिया. इसके बाद उसने बाजार से शराब खरीदी और दोनों गांव की ओर निकल पड़े. रास्ते में दोनों ने शराब का सेवन किया. जब उदय सिंह नशे की हालत में थे, तभी सुरेंद्र यादव ने पहले से बनाई गई योजना के तहत फरसा से हमला कर उनकी हत्या कर दी. आरोपी ने धारदार हथियार से उनका गला काट दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

गहरी दोस्ती का हुआ दर्दनाक अंत

पुलिस के अनुसार दोनों पारा शिक्षक एक-दूसरे के काफी करीबी मित्र थे. उनके घर भी करीब दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं. लंबे समय से दोनों के बीच मित्रता थी, लेकिन पैसों के लेन-देन और विवाद ने इस दोस्ती को दुश्मनी में बदल दिया. स्थानीय लोगों के लिए भी यह घटना चौंकाने वाली है, क्योंकि दोनों शिक्षकों को अक्सर साथ देखा जाता था.

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पुलिस ने बरामद किए अहम सबूत

एसडीपीओ प्रशांत कुमार ने बताया कि आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन, हत्या में इस्तेमाल किया गया फरसा और घटना में प्रयुक्त अपाची मोटरसाइकिल (जेएच 03 एडब्ल्यू 5683) बरामद कर लिया है. उन्होंने बताया कि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है. छापेमारी अभियान में एसडीपीओ प्रशांत कुमार, पुलिस निरीक्षक द्वारका राम, छतरपुर थाना प्रभारी सौरभ चौबे, अवर निरीक्षक राहुल कुमार, सहायक अवर निरीक्षक राजीव कुमार, संजय कुमार सिंह, रविंद्र तिवारी तथा सशस्त्र बल के जवान शामिल थे. पुलिस का कहना है कि सभी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ सशक्त आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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