झारखंड सरकार अब AI और डेटा साइंस से चलायेगी सत्ता, CM हेमंत सोरेन ने लॉन्च किया 'CM-DIP' प्लेटफॉर्म
Published by : Sameer Oraon Updated At : 26 Mar 2026 10:51 PM
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
Hemant Soren: सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए झारखंड सरकार ने तकनीक का सबसे बड़ा दांव खेला है. डेटा साइंस और डेटा विजुअलाइजेशन पर आधारित 'सीएम-डिप' प्लेटफॉर्म अब राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, निवेश और जनकल्याणकारी योजनाओं की निगरानी का मुख्य केंद्र होगा. पढ़ें ये विशेष रिपोर्ट
Hemant Soren, रांची, (सुनील चौधरी की रिपोर्ट): झारखंड सरकार ने अपनी व्यवस्था में आधुनिक तकनीक को शामिल करने की तैयारी कर ली है. सरकार अब एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और डेटा साइंस का उपयोग करेगी. इसी दिशा में सीएम डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (सीएम-डिप) बनाया गया है. इसकी घोषणा सीएम हेमंत सोरेन ने बजट सत्र में की थी. यह प्लेटफॉर्म विभागों के आंकड़ों को एकीकृत कर नेतृत्व को त्वरित और सटीक निर्णय लेने में सक्षम बनायेगा. इस प्लेटफॉर्म का मूल विचार है-एक प्लेटफॉर्म, एक सत्य और एक कमांड व्यू. इससे योजनाओं की वास्तविक स्थिति का सही आकलन संभव होगा.
आठ प्रकार के विशेष डैशबोर्ड प्रस्तावित
सीएम-डिप में आठ प्रकार के विशेष डैशबोर्ड प्रस्तावित किये गये हैं, जिनमें सेक्टर, विभागीय, जिला और नीति डैशबोर्ड शामिल हैं. इसके अतिरिक्त निवेश ट्रैकर, इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रैकर और लाभुक अनुभव डैशबोर्ड भी बनायें जायेंगे. इनके माध्यम से सभी अधिकारियों को उनकी भूमिका के अनुसार आवश्यक जानकारी उपलब्ध होगी. सीएम-डिप प्लेटफॉर्म को तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित किया गया है.
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इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स है पहला स्तंभ
पहला स्तंभ है इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, जिसके तहत बड़े निर्माण कार्यों, उनके चरणों और संसाधनों की वास्तविक समय में निगरानी की जायेगी. दूसरा स्तंभ इन्वेस्टमेंट पाइपलाइन है, जिसमें निवेश समझौते, परियोजनाओं की स्वीकृति और उनके क्रियान्वयन की स्थिति पर नजर रखी जायेगी. तीसरा स्तंभ वेलफेयर स्कीम्स है, जिससे लाभुकों तक योजनाओं की पहुंच और सेवा की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जायेगा. इस प्लेटफॉर्म में स्मार्ट अलर्ट सिस्टम, प्रदर्शन मूल्यांकन और लाभुकों से सीधा फीडबैक लेने जैसी सुविधाएं शामिल होंगी.
वर्ष 2013–14 में शुरू हुआ था फाइल ट्रैकिंग सिस्टम, अबतक लागू नहीं
झारखंड में सरकारी फाइलों की निगरानी और काम-काज में पारदर्शिता लाने के लिए फाइल ट्रैकिंग सिस्टम (ई-ऑफिस) की शुरुआत वर्ष 2013–14 के आसपास हुई थी. इसका उद्देश्य फाइलों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग, लंबित मामलों की जानकारी और कामकाज में तेजी लाना था. हालांकि, एक दशक बाद भी राज्य के कई विभागों में अभी तक पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है और कई जगहों पर फिजिकल फाइलों पर निर्भरता बनी हुई है. यही वजह है कि सरकार अब नये सिरे से चीफ मिनिस्टर डेटा इंटेलिजिंग प्लेटफॉर्म बना रही है ताकि एआइ आधारित मॉनीटिरंग हो सके.
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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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