झारखंड सरकार अब AI और डेटा साइंस से चलायेगी सत्ता, CM हेमंत सोरेन ने लॉन्च किया 'CM-DIP' प्लेटफॉर्म

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
Hemant Soren: सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए झारखंड सरकार ने तकनीक का सबसे बड़ा दांव खेला है. डेटा साइंस और डेटा विजुअलाइजेशन पर आधारित 'सीएम-डिप' प्लेटफॉर्म अब राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, निवेश और जनकल्याणकारी योजनाओं की निगरानी का मुख्य केंद्र होगा. पढ़ें ये विशेष रिपोर्ट
Hemant Soren, रांची, (सुनील चौधरी की रिपोर्ट): झारखंड सरकार ने अपनी व्यवस्था में आधुनिक तकनीक को शामिल करने की तैयारी कर ली है. सरकार अब एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और डेटा साइंस का उपयोग करेगी. इसी दिशा में सीएम डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (सीएम-डिप) बनाया गया है. इसकी घोषणा सीएम हेमंत सोरेन ने बजट सत्र में की थी. यह प्लेटफॉर्म विभागों के आंकड़ों को एकीकृत कर नेतृत्व को त्वरित और सटीक निर्णय लेने में सक्षम बनायेगा. इस प्लेटफॉर्म का मूल विचार है-एक प्लेटफॉर्म, एक सत्य और एक कमांड व्यू. इससे योजनाओं की वास्तविक स्थिति का सही आकलन संभव होगा.
आठ प्रकार के विशेष डैशबोर्ड प्रस्तावित
सीएम-डिप में आठ प्रकार के विशेष डैशबोर्ड प्रस्तावित किये गये हैं, जिनमें सेक्टर, विभागीय, जिला और नीति डैशबोर्ड शामिल हैं. इसके अतिरिक्त निवेश ट्रैकर, इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रैकर और लाभुक अनुभव डैशबोर्ड भी बनायें जायेंगे. इनके माध्यम से सभी अधिकारियों को उनकी भूमिका के अनुसार आवश्यक जानकारी उपलब्ध होगी. सीएम-डिप प्लेटफॉर्म को तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित किया गया है.
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इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स है पहला स्तंभ
पहला स्तंभ है इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, जिसके तहत बड़े निर्माण कार्यों, उनके चरणों और संसाधनों की वास्तविक समय में निगरानी की जायेगी. दूसरा स्तंभ इन्वेस्टमेंट पाइपलाइन है, जिसमें निवेश समझौते, परियोजनाओं की स्वीकृति और उनके क्रियान्वयन की स्थिति पर नजर रखी जायेगी. तीसरा स्तंभ वेलफेयर स्कीम्स है, जिससे लाभुकों तक योजनाओं की पहुंच और सेवा की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जायेगा. इस प्लेटफॉर्म में स्मार्ट अलर्ट सिस्टम, प्रदर्शन मूल्यांकन और लाभुकों से सीधा फीडबैक लेने जैसी सुविधाएं शामिल होंगी.
वर्ष 2013–14 में शुरू हुआ था फाइल ट्रैकिंग सिस्टम, अबतक लागू नहीं
झारखंड में सरकारी फाइलों की निगरानी और काम-काज में पारदर्शिता लाने के लिए फाइल ट्रैकिंग सिस्टम (ई-ऑफिस) की शुरुआत वर्ष 2013–14 के आसपास हुई थी. इसका उद्देश्य फाइलों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग, लंबित मामलों की जानकारी और कामकाज में तेजी लाना था. हालांकि, एक दशक बाद भी राज्य के कई विभागों में अभी तक पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है और कई जगहों पर फिजिकल फाइलों पर निर्भरता बनी हुई है. यही वजह है कि सरकार अब नये सिरे से चीफ मिनिस्टर डेटा इंटेलिजिंग प्लेटफॉर्म बना रही है ताकि एआइ आधारित मॉनीटिरंग हो सके.
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By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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