झारखंड में 7 हजार अनुबंध स्वास्थ्यकर्मी आंदोलन पर, इनमें से 21 आमरण अनशन पर, न देखनेवाला न सुननेवाला

आंदोलन का दायरा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. पहले ही मानदेय बढ़ोतरी की मांग को लेकर राज्य की 42 हजार सहियाकर्मी आंदोलन पर हैं.
रांची: स्थायीकरण और वेतन वृद्धि की मांग के साथ झारखंड के करीब सात हजार अनुबंध स्वास्थ्यकर्मी 21 दिनों से आंदोलनरत हैं. इनमें से 21 लोग 14 दिनों से राजभवन के सामने आमरण अनशन पर बैठे हैं. इनमें से हर दिन किसी न किसी की तबीयत बिगड़ रही है. लेकिन उन्हें पूछने, देखनेवाला कोई नहीं है. सरकार का भी कोई बड़ा अधिकारी अब तक यहां नहीं पहुंचा है.
अनशन का नेतृत्व कर रहे झारखंड अनुबंधित पारा चिकित्सा कर्मी संघ के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते हैं : अनशनकारियों की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है, लेकिन सरकार का कोई नुमाइंदा हमलोगों से बात नहीं कर रहा है. स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता भी हमारी सुध नहीं ले रहे हैं. ऐसे में कोई अप्रिय घटना होती है, तो सीधे तौर पर सरकार जिम्मेदार होगी.
इधर, इस आंदोलन का दायरा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. पहले ही मानदेय बढ़ोतरी की मांग को लेकर राज्य की 42 हजार सहियाकर्मी आंदोलन पर हैं. राज्य यक्ष्मा अनुबंध कर्मचारी संघ ने भी सोमवार को रांची में धरना देकर 13 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है.
आंदोलन में शामिल देवघर की शिवरानी कुमारी की हालत बेहद खराब हो गयी थी. गंभीर हालत में उन्हें एयरलिफ्ट कर दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया है, जहां वे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं. उनके फेफड़े और लीवर में संक्रमण काफी बढ़ गया है.
बीमार आंदोलनकारियों की देखभाल के लिए सदर अस्पताल की प्रशिक्षु नर्सों को लगा दिया गया है. अनुभवहीन प्रशिक्षु नर्सों ने शिवरानी को स्लाइन चढ़ाने के लिए बार-बार सुई चुभोई, जिससे उन्हें इंफेक्शन हो गया है. वहीं, एएनएम-जीएनएम संघ की वरिष्ठ महासचिव और रांची सदर अस्पताल में 15 वर्षों से तैनात एएनएम वीणा कुमारी की ब्लड प्रेशर और मधुमेह की समस्या बढ़ गयी है. उन्हें भी रिम्स की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया है. वह फिलहाल ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं. दो अन्य अनशनकारियों को भी सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
आंदोलनरत अनुबंध स्वास्थ्यकर्मियों ने राज्य सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है. कहा कि वर्ष 2019 में चुनाव के दौरान हेमंत सोरेन और उनकी पार्टी ने वादा किया था कि सरकार बनने के तीन माह के अंदर सभी अनुबंध स्वास्थ्यकर्मियों को स्थायीकरण या नियमितीकरण किया जायेगा.
लेकिन, मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने वादा पूरा नहीं किया. आंदोलनकारियों ने कहा कि वे 15 वर्षों से काम कर रहे हैं. लेकिन, काम के हिसाब से उन्हें वेतन और सरकारी सुविधाएं नहीं मिल रहीं. जो मानदेय मिल रहा है, उसमें बच्चों को पढ़ाना और घर चलाना मुश्किल है. वहीं, उनके बराबर काम करनेवाले स्थायी कर्मियों को तीन गुना अधिक वेतन मिलता है. कोरोना काल में इनलोगों ने जान हथेली पर लेकर आमलोगों की जान बचायी, लेकिन विभाग की तरफ से उन्हें किसी तरह का लाभ नहीं दिया गया.
झारखंड अनुबंधित पारा चिकित्सा कर्मी संघ ने विभाग पर बनाया था ‘पारा मेडिकल नियमावली-2018’ में आंशिक संशोधन का दबाव
स्वास्थ्य विभाग के पारा मेडिकल कर्मियों के लिए वर्ष 2014 की तरह विभागीय समायोजन की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की थी
आंदोलनकारियों की मांग : वर्ष 2014 में कुछ स्वास्थ्यकर्मियों को नियमित किया गया था, उसी तर्ज पर उन्हें भी नियमित किया जाये
स्वास्थ्यकर्मियों की स्थिति दिन-ब-दिन खराब हो रही है. कई कर्मचारियों को बेहतर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वहीं, कई कर्मचारियों की धरनास्थल पर ही तबीयत खराब होती जा रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि अगर वे जीत कर आयेंगे, तो अनुबंधकर्मियों को नियमित करेंगे. लेकिन अब तक अपना वादा पूरा नहीं किया. – विनय कुमार सिंह, अध्यक्ष, झारखंड अनुबंधित पारा चिकित्सा कर्मी संघ
नाम स्थिति
1. शिवरानी कुमारी एम्स में भर्ती
2. वीणा कुमारी सिंह रिम्स में भर्ती
3. एंजलीना खाखा सदर अस्पताल में भर्ती
4. सूर्यकांति कुमारी अस्पताल से लौटीं
5. पूनम कुमारी सदर अस्पताल में भर्ती
6. नंदनी कुमारी अस्पताल से लौटीं
7. बबीता कुमारी सदर अस्पताल में भर्ती
8. सुनीता कुमारी हजारीबाग अस्पताल में भर्ती
9. धरनी कुमारी अस्पताल से लौट कर अनशन पर
10. ममता कुमारी अस्पताल से लौट कर अनशन पर
11. पूर्णिमा कुमारी अस्पताल से लौट कर अनशन पर
12. ललिता कुमारी अस्पताल से लौट कर अनशन पर
13. अनीता कुमारी अस्पताल से लौट कर अनशन पर
14. टेरेसा मिंज अस्पताल से लौट कर अनशन पर
15. अरुणा टोप्पो अस्पताल से लौट कर अनशन पर
पुरुष अनशनकारी
1. नवीन रंजन रिम्स में भर्ती
2. विनय कुमार सिंह अस्पताल से लौट कर अनशन पर
3. सत्येंद्र कुमार अस्पताल से लौट कर अनशन पर
4. प्रदीप कुमार अस्पताल से लौट कर अनशन पर
5. सुशांत कुमार दास अस्पताल से लौट कर अनशन पर
7. रंजीत सुरीन अस्पताल से लौट कर अनशन पर
8. कुमार लोकेश 48 घंटे पहले अनशन पर बैठे
9. रितेश कु जायसवाल 48 घंटे पहले अनशन पर बैठे
रांची. आमरण अनशन को लेकर जब स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण सिंह से दूरभाष पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि अभी मैं मीटिंग में हूं, बाद में बात करता हूं. इस संबंध में जब स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया. उनके पीए ने कहा कि अभी स्वास्थ्य मंत्री की तबीयत ठीक नहीं है. आराम कर रहे हैं. उठते हैं, तो बात कराते हैं. फिर बात नहीं करायी.
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By Prabhat Khabar News Desk
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