मरम्मत के बावजूद नहीं चालू हुआ फिल्टर प्लांट

Updated at : 18 Jul 2025 9:02 PM (IST)
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मरम्मत के बावजूद नहीं चालू हुआ फिल्टर प्लांट

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अंतर्गत खलारी प्रखंड के बुकबुका स्थित वाटर फिल्टर प्लांट लगातार तकनीकी और प्रशासनिक संकटों से जूझ रहा है

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प्रतिनिधि, खलारी.

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अंतर्गत खलारी प्रखंड के बुकबुका स्थित वाटर फिल्टर प्लांट लगातार तकनीकी और प्रशासनिक संकटों से जूझ रहा है. सपही नदी से जलापूर्ति के लिए गुरुवार को लगाये गये करंजतोरा स्थित पंप के खराब बियरिंग को बदलकर मरम्मत की गयी. बावजूद प्लांट सुचारू नहीं हो पाया. करीब डेढ़ घंटे तक परीक्षण के दौरान पंप सही ढंग से चला और प्लांट के टैंकों में पानी भी भर दिया गया. लेकिन इसके बाद कर्मियों ने पंप को बंद कर दिया. उनका कहना है कि विगत 10 महीनों से वेतन बकाया है और बहुग्रामीण जलापूर्ति योजना समिति के त्यागपत्र देने के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि अब वेतन कौन देगा.

मरम्मत का खर्च भी नहीं हुआ भुगतान :

रांची से आये तकनीशियन ने बियरिंग के एवज में करीब 26 हजार रुपये की मांग की, लेकिन किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली. भुगतान नहीं होने पर वह नाराज होकर लौट गया. इस घटना के बाद कर्मियों के मन में भी सवाल आया कि उनका वेतन भुगतान कौन करेगा? इसके बाद से कर्मी पंप चालू नहीं कर रहे हैं.

वेतन भुगतान को लेकर असमंजस :

वेतन की मांग को लेकर मई में भी कर्मी एक मई से नौ दिन तक हड़ताल पर थे. तब बीडीओ की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक महीने का वेतन दिया गया और बाकी का शीघ्र भुगतान करने का आश्वासन मिला था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ. वर्तमान में स्थिति फिर से वैसी ही बनी हुई है.

समिति के पास नहीं है पैसा :

एक जलसहिया के पति ने बताया कि समिति के खाते में पैसा ही नहीं है. बताया कि समिति के बैंक खाते से मरम्मत के एवज में एक बार 60 हजार रुपये भुगतान किया गया और दूसरी बार 1 लाख 10 हजार के बिल में करीब आधा 50 हजार रुपये भुगतान किया गया था. केमिकल आदि खरीदारी में भी पैसे खर्च हुए हैं. अब बियरिंग बदलने का 25-26 हजार का बिल आ गया है.

जल शुल्क भी नहीं मिल रहा :

फिल्टर प्लांट बंद रहने से उपभोक्ता मासिक जल शुल्क नहीं देते हैं. गर्मी के महीनों में जब नदी सूख जाती है, तब भी प्लांट बंद रहता है और शुल्क वसूली नहीं हो पाती है. इस बार पानी की कमी तो नहीं हुई, पर मशीनों की बार-बार खराबी से जलापूर्ति बाधित रही. इससे कर्मियों का वेतन लगातार बकाया होता गया.

4000 उपभोक्ताओं पर संकट :

प्लांट से खलारी के पांच पंचायतों के लगभग 4000 उपभोक्ता जुड़े हैं, जो वर्तमान में गंभीर पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं. बार-बार की तकनीकी खराबी, प्रशासनिक उदासीनता और वित्तीय अनियमितताओं के चलते यह महत्वपूर्ण योजना दम तोड़ती नजर आ रही है.

18 खलारी 03, बंद पड़ा खलारी के बुकबुका का वाटर फिल्टर प्लांट.

वेतन और जिम्मेदारी को लेकर बना असमंजसB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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