Political News : पलामू की विकास योजनाओं में हो रही अनियमितताओं की शिकायत
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 03 Mar 2025 3:02 PM
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से सोमवार को पांकी के विधायक डॉ कुशवाहा शशिभूषण मेहता ने राजभवन में भेंट कर पलामू जिले की विभिन्न योजनाओं में हुई अनियमितताओं की जानकारी देते हुए विधिसम्मत कार्रवाई करने का आग्रह किया है.
रांची (विशेष संवाददाता). राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से सोमवार को पांकी के विधायक डॉ कुशवाहा शशिभूषण मेहता ने राजभवन में भेंट कर पलामू जिले की विभिन्न योजनाओं में हुई अनियमितताओं की जानकारी देते हुए विधिसम्मत कार्रवाई करने का आग्रह किया है. विधायक ने राज्यपाल से कहा कि मेसर्स सिलदिलिया कंस्ट्रक्शंस द्वारा पांकी प्रखंड के अंतर्गत ढूब-छतरपुर मार्ग में निर्माणाधीन पुल ध्वस्त हो जाने के मामले में ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा 23 जुलाई 2021 को उच्चस्तरीय जांच दल का गठन किया था, लेकिन साढ़े तीन वर्षों के बाद भी इस मामले में कुछ नहीं हुआ. ग्रामीण कार्य विभाग के सहायक अभियंता ने कार्यपालक अभियंता को मेसर्स सिलदिलिया कंस्ट्रक्शंस द्वारा की जा रही योजनाओं में अनियमितता के संबंध में पत्र भी लिखा था. सहायक अभियंता के पत्र के आलोक में कार्यपालक अभियंता द्वारा संवेदक को पत्र लिखा गया, लेकिन स्थिति यथावत है. विधायक ने राज्यपाल से कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और एफडीआर योजना के तहत पलामू जिले में लिये गये पांच कार्यों की खराब स्थिति को लेकर पलामू उपायुक्त ने ग्रामीण कार्य विभाग को पत्र लिखा था. इसके बावजूद अब तक दोषी संवेदक के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी. इसके अलावा जल जीवन मिशन योजना के तहत निर्मित लघु पेयजलापूर्ति योजनाओं में भी गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आयी हैं. श्री मेहता ने कहा कि कुल 63 क्लस्टर सब-क्लस्टर योजनाओं में कई अधूरे कार्यों को पूर्ण दिखाकर भुगतान कर दिया गया है. विधायक ने कहा कि क्लस्टर-86 में 1.80 करोड़ रुपये का कार्य दिखा कर एफएचटीसी लक्ष्य 1302 के विरुद्ध 1305 पूरा दिखाया गया, जबकि एकरारनामे की राशि 4.718 करोड़ रुपये है. विधानसभा रिपोर्ट में 935 एफएचटीसी पूरा बताया गया है, जिससे विभागीय रिपोर्ट और वास्तविकता में भारी अंतर है. मनातू और तरहसी प्रखंडों में भी कई योजनाएं अधूरी हैं, लेकिन उन्हें 100 प्रतिशत पूरा दिखाकर भुगतान किया गया है. कई स्थानों पर बोरिंग नहीं हुआ, कुछ जगहों पर केवल नींव बनायी गयी और कुछ अधूरी संरचनाएं छोड़ दी गयीं.
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