रांची : एफसीआइ ने मध्याह्न भोजन के चावल का 42 करोड़ मांगा
Updated at : 13 Feb 2020 9:33 AM (IST)
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रांची : एफसीआइ को मध्याह्न भोजन योजना के लिए दिये गये चावल के एवज में 42 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया है. एफसीआइ ने राशि की मांग की है. वहीं मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के अनुसार, एफसीआइ की कोई राशि बकाया नहीं है. इस संबंध में झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के निदेशक को […]
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रांची : एफसीआइ को मध्याह्न भोजन योजना के लिए दिये गये चावल के एवज में 42 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया है. एफसीआइ ने राशि की मांग की है. वहीं मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के अनुसार, एफसीआइ की कोई राशि बकाया नहीं है. इस संबंध में झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के निदेशक को भारत सरकार के संबंधित अधिकारी से संपर्क कर मामले का निष्पादन करने को कहा गया है. निदेशक को पूरे मामले की जानकारी 20 फरवरी तक मुख्य सचिव को देने को कहा गया है.
यह मामला 10 फरवरी को मुख्यमंत्री द्वारा विभागीय अधिकारियों के साथ की गयी समीक्षा बैठक में सामने आया था. मध्याह्न भोजन योजना के पूर्व की सभी राशि का बकाया भुगतान 28 फरवरी तक सुनिश्चित करने को कहा गया है. स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने वाली रसोइया के बकाया मानदेय का भुगतान 25 फरवरी तक करने को कहा गया है. वहीं पारा शिक्षकों की तरह रसोइया के मानदेय का भी भुगतान राज्य स्तर से ऑनलाइन करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया.
अधिक निकासी पर ब्याज सहित जमा करायें राशि : राज्य के कई विद्यालयोंमें मध्याह्न भोजन राशि की अधिक निकासी का मामला सामने आया है.
इसकी जांच करा कर मामला सही पाये जाने पर ब्याज समेत राशि जमा कराना सुनिश्चित करने को कहा गया है. मध्याह्न भोजन के लिए आवश्यकता से अधिक राशि की निकासी की गयी है. शिक्षा सचिव द्वारा दिये गये निर्देश में कहा गया है कि प्रति वर्ष देय राशि से अधिक राशि के व्यय का प्रश्न नहीं उठता है. उन्होंने निकाली गयी राशि व खर्च की गयी राशि का मिलान करने को कहा है. मध्याह्न भोजन योजना में 2014 से 2018 तक राज्यांश के मद में अधिक राशि की निकासी की गयी है.
इसे चालान के माध्यम से जमा करने को कहा गया है. 2014-15 से स्कूलों में नामांकन के विरुद्ध मध्याह्न भोजन खाने वाले बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है, पर यह स्पष्ट नहीं है कि इसके अनुरूप खाद्यान्न व राशि का व्यय हो रहा है कि नहीं. यह बढ़ोतरी 50 से 65% तक हुई है. इसकी भी जांच करने को कहा गया है. जांच के बाद दोषी पदाधिकारी पर कार्रवाई करने को कहा गया है. विद्यालयों में आवश्यकता अनुरूप किचन डिवाइस क्रय करने का निर्देश दिया गया.
स्कूलों को परेशान नहीं करे सोशल ऑडिट की टीम
प्रधान सचिव द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि शिक्षा मंत्री द्वारा यह प्रश्न उठाया गया है कि सोशल ऑडिट की टीम द्वारा कुछ स्कूलों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है. टीम के सदस्य को इसकी जानकारी दी जाये. साथ ही भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति नहीं हो, इसे सुनिश्चित किया जाये.
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