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पश्चिमी सिंहभूम में सामूहिक नरसंहार : सात युवकों को ग्रामीणों ने पकड़ा, पीट कर किया अधमरा, घसीट कर जंगल में सिर धड़ से अलग कर दिया

Updated at : 23 Jan 2020 6:56 AM (IST)
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पश्चिमी सिंहभूम में सामूहिक नरसंहार : सात युवकों को ग्रामीणों ने पकड़ा, पीट कर किया अधमरा, घसीट कर जंगल में सिर धड़ से अलग कर दिया

बुरुगुलीकेरा से लौटकर सूरज/श्याम/प्रताप पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुदड़ी प्रखंड के बुरुगुलीकेरा गांव में हुए सामूहिक नरसंहार के तीन दिन बाद पुलिस ने बुधवार सुबह पास के जंगल से सात ग्रामीणों का शव बरामद कर लिया. सभी के सिर धड़ से अलग थे. मंगलवार रात से गांव में कैंप कर रहे पुलिस बल ने बुधवार […]

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बुरुगुलीकेरा से लौटकर
सूरज/श्याम/प्रताप
पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुदड़ी प्रखंड के बुरुगुलीकेरा गांव में हुए सामूहिक नरसंहार के तीन दिन बाद पुलिस ने बुधवार सुबह पास के जंगल से सात ग्रामीणों का शव बरामद कर लिया. सभी के सिर धड़ से अलग थे. मंगलवार रात से गांव में कैंप कर रहे पुलिस बल ने बुधवार तड़के ही सर्च अभियान शुरू कर दिया. सुबह 9:30 बजे तक ग्रामीणों का शव बरामद हो सका.
बताया जाता है कि बुरुगुलीकेरा की ग्रामसभा में पहले सातों ग्रामीणों की बुरी तरह पिटाई की गयी. जब सभी अधमरा हो गये, तो उन्हें घसीटते हुए करीब दो किमी दूर जंगल में ले जाया गया. वहां सभी के हाथ-पैर बांध कर सिर कलम कर दिया गया. बुधवार को सातों ग्रामीणों का शव मिलने के बाद इस लोमहर्षक घटनाक्रम का खुलासा हो पाया. इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है. पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है. सीआरपीएफ, रैफ व जिला बल के 200 जवान कैंप कर रहे हैं.
19 जनवरी की शाम की घटना
यह घटना 19 जनवरी की शाम की है. हालांकि, पुलिस को घटना की सूचना दो दिन बाद 21 जनवरी को मिली. सूचना मिलने पर एसपी, डीसी समेत पुलिस व प्रशासनिक अमला बुरुगुलीकेरा पहुंचा. ग्रामीणों के विरोध के कारण पुलिस शव की तलाश नहीं कर सकी. बुधवार सुबह पुलिस टीम ने पुन: जंगल में सर्च अभियान चलाया और सात युवकों का शव बरामद किया.
हत्या से पहले हुई ग्रामसभा में लोगों ने कहा था सड़े हुए आलू को फेंक देना चाहिए
पुलिस अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने कहा हमने ही की है सातों युवकों की हत्या
गुदड़ी प्रखंड के बुरुगुलीकेरा गांव की घटना
मारे गये जेम्स बुढ़, जावरा बुढ़, लोंबा बुढ़, कोजे टोपनो, एतवा बुढ़, निर्मल बुढ़ व बोबास लोमगा के अलावा गुसरू बुढ़ व सुकुआ बुढ़ पर 16 जनवरी की रात पांच ग्रामीणों के घर में घुस कर उत्पात मचाने और घरों में रखे सामान को क्षतिग्रस्त करने का आरोप था. इससे नाराज ग्रामीणों ने 19 जनवरी को गांव में ग्रामसभा बुलायी. ग्रामसभा में ही सभी नौ युवकों को मौत की सजा सुनायी गयी. सजा सुन कर दो युवक गुसरू बुढ़ व सुकुआ बुढ़ भाग निकले. इससे ग्रामीण गुस्से में आ गये. ग्रामीणों ने शेष सातों युवकों को पकड़ लिया और उनकी पिटाई शुरू कर दी, जिससे सभी अधमरा हो गये. इस दौरान मृतकों के घरवाले भी मौजूद थे. ग्रामीणों ने कहा-‘सड़ा आलू को फेंक देना चाहिए.’ इसके बाद ग्रामीण सातों युवकों को जंगल की ओर ले गये और वहां हत्या कर दी गयी.
शवों को जंगल से लेकर आते जवान
मृतकों के नाम
जेम्स बुढ़ (30)
जावरा बुढ़ (22)
लोंबा बुढ़ (25)
कोजे टोपनो (23)
एतवा बुढ़ (27)
निर्मल बुढ़ (25)
बोबास लोमगा (25)
चार ग्रामीण अब भी लापता
ग्रामसभा में नौ युवक मौजूद थे, जिनमें सात की हत्या कर दी गयी है. वहीं, दो युवक गुसरू बुढ़ व सुकुआ बुढ़ फरार हो गये थे. इसके अलावा गांव के दो अन्य लोग लोदरो बुढ़ और रोशन बारजो भी लापता हैं. पुलिस चारों की तलाश कर रही है.
गुदड़ी थाना प्रभारी निलंबित
सात ग्रामीणों की हत्या मामले में एसपी इंद्रजीत महथा ने गुदड़ी थाना प्रभारी अशोक कुमार को निलंबित कर दिया है. अशोक कुमार पर लापरवाही, कर्तव्यहीनता के आरोप लगाये गये हैं. निलंबन पत्र में लिखा है कि 20 जनवरी को ही मृतक के परिजनों ने थाना प्रभारी को सातों लोगों को बंधक बनाये जाने की जानकारी दी गयी थी. इसके बाद भी थाना प्रभारी ने कोई कार्रवाई नहीं की.
पत्थलगड़ी समर्थक है पूरा गांव, मारे गये सभी ग्रामीण थे विरोधी
बुरुगुलीकेरा गांव की आबादी करीब 500 है. वहीं शुरू से गांव के ज्यादातर लोग पत्थलगड़ी के समर्थन में रहे हैं. बीते वर्ष जब राज्य में पत्थलगड़ी का मामला उछला था, तब गांव के अधिकांश लोगों ने अपना राशन व आधार कार्ड प्रशासन को वापस कर दिया था. इसके बाद से ग्रामीण सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं ले रहे हैं.
इसकी सूचना प्रशासन को है, लेकिन इसे लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया. हालांकि पत्थलगड़ी को लेकर पिछली सरकार में राज्यभर में कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. पत्थलगड़ी के समर्थकों की विचारधारा है-‘ग्राम सभा सबसे ऊपर.’ वे राष्ट्रपति व राज्यपाल को ही मालिक मानते हैं. उनका कहना है कि वे आदिवासी हैं. इस देश के मालिक हैं. विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री आदि हमारे नौकर हैं.
बताया जाता है कि नरसंहार में मारे गये सातों ग्रामीण पत्थलगड़ी विचारधारा के विरोधी थे, जबकि गांव के अधिकांश आबादी पत्थलगड़ी समर्थक है. पुलिस अधीक्षक इंद्रजीत महथा ने बताया कि ‘गांव में जिनके घरों में तोड़फोड़ की बात कही जा रही है. वे सभी पत्थलगड़ी समर्थक हैं, जबकि मारे गये सभी उसके विरोधी बताये जा रहे हैं. सभी पहलुओं पर छानबीन की जा रही है. जल्द ही पूरे मामले का खुलासा होगा.’
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