रांची साइंस सेंटर देखरेख के अभाव में खो रहा अपना वजूद
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Dec 2019 9:52 AM (IST)
विज्ञापन

2010 में चिरौंदी में सेंटर का उद्घाटन, नौ साल में ही स्थिति बदतर रांची : चिरौंदी स्थित रांची साइंस सेंटर. कैंपस में वैज्ञानिकों की प्रतिमा हैं. इनके सामने बोर्ड पर वैज्ञानिकों के नाम और उनकी उपलब्धियों का जिक्र किया गया है. इन्हें देखकर व पढ़कर विज्ञान के प्रति रुचि जगती है, विज्ञान के चमत्कार व […]
विज्ञापन
2010 में चिरौंदी में सेंटर का उद्घाटन, नौ साल में ही स्थिति बदतर
रांची : चिरौंदी स्थित रांची साइंस सेंटर. कैंपस में वैज्ञानिकों की प्रतिमा हैं. इनके सामने बोर्ड पर वैज्ञानिकों के नाम और उनकी उपलब्धियों का जिक्र किया गया है. इन्हें देखकर व पढ़कर विज्ञान के प्रति रुचि जगती है, विज्ञान के चमत्कार व विभिन्न आयामों को देखने की इच्छा जागती है.
लेकिन जैसे ही आप साइंस सेंटर के मुख्य भवन में प्रवेश करेंगे, अव्यवस्थाओं को देख निराशा होगी. कैंपस से लेकर मुख्य भवन के अंदर में विज्ञान की दुनिया को दिखाने के लिए कई उपकरण व कक्ष बनाये गये हैं. कहीं, फर्श पर रखे सामान खराब दिखेंगे तो विज्ञान के नये-नये प्रयोगों से रूबरू करानेवाले कक्ष भी बंद पड़े हैं.
सुरक्षा का कोई इंतजाम
साइंस सेंटर के अंदर मौजूद उपकरणों व व्यवस्था की देख-रेख के लिए एक से दो ही कर्मचारी हैं. ग्राउंड फ्लोर पर रखे कई यंत्र विज्ञान के विभिन्न आयाम को दर्शाते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है. इसके अलावा यहां झारखंड की जनजातियों व संस्कृति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण चीजें रखी गयी हैं. साइंस सिटी में आनेवाले लोग इसे भी छूकर देखते हैं. फर्स्ट फ्लोर पर पूरी तरह से विज्ञान की दुनिया है. यहां विज्ञान के माध्यम से कैसे-कैसे चमत्कार होते हैं, यह दिखाया गया है. यहां आने पर लोग नयी-नयी चीजों को देख कर कुछ अधिक उत्साहित हो जाते हैं और चीजों को छूने व पकड़ कर अनुभव करने लगते हैं. कर्मचारियों की कमी के कारण इन्हें कोई नहीं रोकता है.
कई यंत्र काम नहीं करते
सेकेंड फ्लोर पर विज्ञान के चमत्कार को दर्शाने वाली कई ऐसी चीजें हैं, जो केवल सामान बन कर रह गये हैं. इसमें जमी परछाई, बदलता रंग, थ्रीडी तकनीक, उठती चिनगारी, उछलता डिस्क, रंगीन परछाई सहित कई यंत्र शामिल हैं. ये केवल शोपीस की तरह रह गये हैं. एक तो इनके बारे में बतानेवाला कोई नहीं है और न ही खराब हो गये उपकरणों को ठीक करवाने की दिशा में काम हो रहा है. लोग उत्साह के साथ आते हैं, लेकिन खराब चीजों को देख कर मायूस होकर लौट जाते हैं.
कर्मियों को हक का इंतजार
साइंस सिटी में 15 से 20 कर्मचारी काम करते हैं. सभी चिरौंदी के है और जमीन के एवज में उन्हें यहां काम मिला है. इसमें कई कर्मचारी ऐसे हैं, जिनको अपनी जमीन का पूरा मुआवजा तक नहीं मिला है. दिहाड़ी पर ये यहां काम करते हैं. कर्मचारियों का कहना है कि हमें स्थायी नियुक्ति की बात कही गयी थी, लेकिन हमें हमारा हक नहीं मिला.
रांची साइंस सेंटर के कैंपस में चार से पांच डायनासोर का स्टेच्यू लगाया गया है. इसमें से तीन को सहारा देकर खड़ा किया गया है. किसी को ईंट के सहारे तो किसी को रॉड या बांस का सहारा देकर. एक ही डायनासोर है, जो अपने दम पर खड़ा है. इन्हें देखने के लिए हर दिन सैकड़ों की तादाद में छोटे बच्चे आते हैं. कोई छूकर देखता है तो कोई पास जाकर. इस दौरान अगर कोई घटना हो गयी, तो इसका जिम्मेवार कौन होगा.
कर्मियों की कमी के कारण साइंस सेंटर में रखी चीजों की निगरानी नहीं की जा रही है. यहां आनेवाले लोग व बच्चे सेंटर में रखी चीजों को हाथ से छूकर देखते हैं. इससे उनके नष्ट होने का खतरा बना है.
साइंस सिटी में हर दिन लगभग 300 से अधिक लोग आते हैं. रांची के अलावा बाहर से भी स्कूल के बच्चे साइंस सिटी और यहां स्थित तारामंडल देखने आते हैं. नये साल में यहां आनेवालों की संख्या दोगुनी हो सकती है. हर महीने साइंस सिटी को लगभग 1 लाख 80 रुपये की कमाई होती है. फिर भी कैंपस का हाल बदहाल है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




