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रांची : फसल कटाई के बाद की प्रक्रिया में 40 प्रतिशत से अधिक कृषि उत्पाद बर्बाद हो रहे हैं : हजारी

Updated at : 20 Dec 2019 8:17 AM (IST)
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रांची : फसल कटाई के बाद की प्रक्रिया में 40 प्रतिशत से अधिक कृषि उत्पाद बर्बाद हो रहे हैं : हजारी

कृषि विभाग द्वारा किसानों के लिए चल रही योजनाअों से रूबरू हुए बीएयू के वैज्ञानिक रांची : बिरसा कृषि विवि के वैज्ञानिकों को गुरुवार को झारखंड के पशुपालन एवं सहकारिता विभाग द्वारा सरकार द्वारा किसानों के हित में चलायी जा रही कई योजनाअों की जानकारी दी गयी. विभाग के विशेष सचिव सह सलाहकार प्रदीप कुमार […]

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कृषि विभाग द्वारा किसानों के लिए चल रही योजनाअों से रूबरू हुए बीएयू के वैज्ञानिक
रांची : बिरसा कृषि विवि के वैज्ञानिकों को गुरुवार को झारखंड के पशुपालन एवं सहकारिता विभाग द्वारा सरकार द्वारा किसानों के हित में चलायी जा रही कई योजनाअों की जानकारी दी गयी. विभाग के विशेष सचिव सह सलाहकार प्रदीप कुमार हजारी ने इन योजनाअों का लाभ उठाने के लिए परियोजना प्रस्ताव शीघ्र विभाग को समर्पित करने का भी सुझाव दिया.
बताया गया कि किसानों के लाभ के लिए राज्य सरकार की 78 तथा केंद्र प्रायोजित 26 योजनायें कार्यरत हैं. समुचित प्रस्ताव के अभाव में बहुत सी योजनाओं में राशि खर्च नहीं हो पाती है. परियोजना प्रस्ताव को सही ढंग से बनाया जाये, तो विभाग के पास राशि की कोई कमी नहीं है.
उन्होंने कहा कि फसल कटाई के उपरांत की प्रक्रिया में 40 प्रतिशत से अधिक कृषि उत्पाद बर्बाद हो जाते हैं. यदि कृषि वैज्ञानिक अपने अनुसंधान और रणनीतियों से इस नुकसान को घटा कर 30.35 प्रतिशत पर भी ले आयें, तो देश और राज्य के साथ किसानों का बहुत भला होगा.
विवि के कृषि अर्थशास्त्री यदि यह आकलन कर सकें कि औसत वर्षापात में कितने प्रतिशत की कमी से फसल उत्पादन कितना प्रतिशत घट जाता है, तो इस विश्लेषण से विभाग को अपनी भावी किसानोपयोगी योजना बनाने में मदद मिलेगी. मल्टीलेयर खेती और बिना मिट्टी-पानी की खेती की भी उपयुक्त तकनीक एवं अन्य अभिनव कृषि तकनीकों को विकसित करने की जरूरत पर उन्होंने जोर दिया.
उन्होंने कहा कि बीएयू के वैज्ञानिकों को अपने प्रक्षेत्र से बाहर निकल कर किसानों के बीच आना चाहिए और अपने शोध तकनीक और उत्पादों की मार्केटिंग करनी चाहिए. मौके पर बीएयू के कुलपति डॉ राम शंकर कुरील ने कहा कि सीमित संसाधन के कारण विवि तकनीकों का सीमित स्तर पर ही प्रसार हो पा रहा है. कुलपति ने निर्देश दिया
कि इन तकनीकों को चिह्नित करके प्रत्येक वैज्ञानिक एक-एक परियोजना प्रस्ताव यथाशीघ्र योजना निदेशालय को सौपेंगे. इन प्रस्तावों को डॉ सुशील प्रसाद, डॉ केके झा और प्रो डीकेरूसिया की समिति देखेगी. आवश्यक संशोधन के बाद दिसंबर में ही कृषि विभाग को समर्पित करेगी, ताकि सभी प्रस्तावों को सरकार के बजट में शामिल कराया जा सके.
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