रांची : नये हाइकोर्ट भवन का निर्माण कार्य जल्दी पूरा करें

Updated at : 07 Sep 2019 1:26 AM (IST)
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रांची : नये हाइकोर्ट भवन का निर्माण कार्य जल्दी पूरा करें

निर्माणाधीन नये भवन का कितना कार्य हुआ है और कितना बाकी है, सरकार शपथ पत्र के माध्यम से बताये रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को धुर्वा में निर्माणाधीन हाइकोर्ट बिल्डिंग काे लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने सुनवाई के दाैरान राज्य सरकार […]

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निर्माणाधीन नये भवन का कितना कार्य हुआ है और कितना बाकी है, सरकार शपथ पत्र के माध्यम से बताये
रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को धुर्वा में निर्माणाधीन हाइकोर्ट बिल्डिंग काे लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने सुनवाई के दाैरान राज्य सरकार के शपथ पत्र को देखा.
खंडपीठ ने माैखिक रूप से कहा कि बिल्डिंग के बचे शेष कार्यों को पूरा करने के लिए 15 माह का समय अधिक है. बिल्डिंग का निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए, ताकि वहां पर कोर्ट शिफ्ट हो सके. खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि हाइकोर्ट के नये भवन का कितना कार्य हो चुका है. कितना कार्य बाकी है.
इसे पूरा करने के लिए और कितनी राशि खर्च होगी. डीपीआर से अधिक भी कार्य हुआ है क्या. खंडपीठ ने महाधिवक्ता को शपथ पत्र के माध्यम से बताने को कहा. मामले की अगली सुनवाई 20 सितंबर को होगी. इससे पूर्व सरकार की अोर से महाधिवक्ता अजीत कुमार ने बताया कि पांच सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद मेसर्स रामकृपाल कंस्ट्रक्शन के साथ हुए एग्रीमेंट को पत्रांक 1625/30.7.2019 के प्रभाव से क्लोज कर दिया गया है. शेष कार्य पूरा करने में 15 माह का समय लगेगा. हस्तक्षेपकर्ता संवेदक की अोर से बताया गया कि हाइकोर्ट बिल्डिंग के निर्माण में कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई है. जो भी कार्य हुए हैं, वह भवन निर्माण विभाग के निर्देश के आलोक में किया गया है.
एडवोकेट एसोसिएशन की अोर से आइए दायर कर पांच एकड़ जमीन, 1500 चेंबर आदि की मांग की गयी.
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी अधिवक्ता राजीव कुमार व राजेश्वर पांडेय ने अलग-अलग जनहित याचिका दायर कर निर्माण में वित्तीय अनियमितता बरतने का आरोप लगाया है.
धुर्वा में 165 एकड़ जमीन पर हाइकोर्ट की नयी बिल्डिंग का निर्माण हो रहा है. सरकार ने लगभग 365 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी थी. मेसर्स रामकृपाल कंस्ट्रक्शन प्रालि को कार्य साैंपा गया था. निर्माण पर अब तक लगभग 697 करोड़ रुपये खर्च होचुके हैं.
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