ऐसे होता है वर्षा का आकलन, जानें इस बार कब धोखा देगा मॉनसून, कितनी होगी बारिश

By Prabhat Khabar Digital Desk
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रांची : बारिश का मामला मौसम विज्ञान से जुड़ा है. भारत में ग्रह-नक्षत्रों की चाल के हिसाब से ज्योतिष भी मौसम के बारे में भविष्यवाणी करते रहे हैं. आज भी यह विज्ञान प्रचलित है और मौसम विभाग की भविष्यवाणी से कमतर नहीं है. रांची के पंडित रामदेव पांडेय ने prabhatkhabar.com से बातचीत में बताया कि झारखंड, बिहार, ओड़िशा और इसके आसपास के राज्यों में 22 जून से मॉनसून का प्रवेश हो सकता है. हालांकि, मौसम विभाग ने 21 जून से झारखंड में बारिश की भविष्यवाणी की है.

ऐसे होता है वर्षा का आकलन, जानें इस बार कब धोखा देगा मॉनसून, कितनी होगी बारिश

श्री पांडेय ने बताया कि आर्द्रा जल नक्षत्र है. ज्योतिष में जिस दिन आर्द्रा का प्रवेश होता है, उस समय की कुंडली बनाकर भारत में मॉनसून और वर्षा जल की स्थिति का आकलन किया जाता है. इस समय सभी ग्रहों के गोचर, तिथि, नक्षत्र, योग करण और बेला की स्थिति का अध्ययन किया जाता है. सभी नक्षत्रों के स्वामी नवग्रह होते हैं.

नक्षत्र की नाड़ी, चंडा, वात, वह्नि, सौम्य, नीरा, जला, अमृत होता है, तो ये अग्नि, वरुण, वायु और चंद्र मंडल में विराजमान होती है. सूर्य और ग्रहों की समीपता और दूरी से वर्षा का आकलन किया जाता है. पंडित रामदेव पांडेय कहते हैं कि 22 जून 2019 (शनिवार) की शाम 5:19 बजे सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेगा. इस दिन आषाढ़ कृष्ण पंचमी, धनिष्ठा नक्षत्र, विष्कुम्भ योग, तैतिल करण, वृश्चिक लग्न और कुम्भ राशि का चंद्र होगा.

श्री पांडेय के मुताबिक, इस बार मॉनसून कमजोर और अनिश्चित होगा. इसकी वजह से आम लोगों को कष्ट होगा. पक्ष-विपक्ष को जनता की चिंता कम रहेगी. तस्कर और कालाबाजारी करने वाले लाभान्वित होंगे. हालांकि, श्रमिक वर्ग संगठित होगा. दूसरी तरफ आंधी-तूफान का प्रकोप अधिक रहेगा. शुरू में तो मॉनसून अच्छा लगेगा, लेकिन बाद में लोग छला हुआ महसूस करेंगे. यानी बाद में मॉनसून दगा देगा.

झारखंड, बिहार, ओड़िशा में होगी कम बारिश

पंडित पांडेय की गणना के मुताबिक, झारखंड, बिहार, ओड़िशा और इसके आसपास के क्षेत्रों में औसत से कम बारिश होगी. तूफान जैसी प्राकृतिक आपदा से लोग परेशान रहेंगे. इस बार भारत में पेयजल संकट बढ़ेगा. उत्तर भारत में भू-स्खलन और भूकंप से लोग परेशान होंगे. हालांकि, पूर्वोत्तर के राज्यों में अच्छी बारिश होगी.

कब-कब होगी बारिश

जून : 22, 23, 24, 27 और 28

जुलाई : 2, 4, 6, 17, 18, 23, 29, और 30

अगस्त : 1, 3, 5, 8, 9, 16, 17, 19, 26, 27, 29, 30 और 31

सितंबर : 3, 9, 10, 11, 14, 17, 18, 20, 24, 28, 29 और 30

अक्टूबर : 2, 4, 6, 9, 10, 12, 15, 17, 20, 21, 26 और 29

वर्षाकाल में पृथ्वी को क्यों नहीं खोदना चाहिए

आर्द्रा नक्षत्र में पृथ्वी अपने ऋतुकाल में मानी जाती है. इस समय गांवों मे खीर-पूड़ी आदि बनाकर पृथ्वी देवी को भोग लगाया जाता है. इसी दौरान 22 जून से 26 जून तक कामाख्या मंदिर के कपाट बंद रहते हैं. इस समय यहां विश्व प्रसिद्ध अम्बुवाची मेला लगता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस समय पृथ्वी रजस्वला होती है. इसलिए इन दिनों में पृथ्वी को खोदना नहीं चाहिए. श्री पांडेय बताते हैं कि आर्द्रा हर साल वर्तमान सदी को 22 जून को ही आता है. फिर भी तिथि नक्षत्रादि के बदलने से मॉनसून की जानकारी ग्रह पंचाग के गणित से की जाती है.

मॉनसून के दौरान कब से कब तक कितनी होगी बारिश
नक्षत्र कब से कब तक कितनी वर्षा होगी
आर्द्रा 22 जून से 6 जुलाई 2019 तक डेढ़ आढक (घड़ा)
पुनर्वसु 6 जुलाई से 20 जुलाई 2019 तक दो आढक
पुष्य 20 जुलाई से 03 अगस्त 2019 तक तीन आढक
अश्लेषा 03 अगस्त से 17 अगस्त 2019 तक डेढ़ आढक
मघा 17 अगस्त से 31 अगस्त 2019 तक दो आढक
पूर्वा 31 अगस्त से 13 सितंबर 2019 तक एक आढक
उत्तरा 13 सितंबर से 27 सितंबर 2019 तक तीन आढक
हस्ता (हथिया) 27 सितंबर से 11 अक्टूबर 2019 तक डेढ़ आढक
चित्रा 11 अक्टूबरसे 24 अक्टूबर 2019 तक 3 आढक
स्वाति 6 नवंबर 2019 तक डेढ़ आढक
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