रांची : पांच हेक्टेयर से कम की खदान को जिलों से ही पर्यावरण स्वीकृति

Updated at : 22 May 2019 12:56 AM (IST)
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रांची : पांच हेक्टेयर से कम की खदान को जिलों से ही पर्यावरण स्वीकृति

नये इनवायरमेंटल इंपैक्ट असेसमेंट नोटिफिकेशन का ड्राफ्ट जारी पांच हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल की लघु खदान कीे पर्यावरण स्वीकृति के लिए नहीं करनी होगी जनसुनवाई सुनील चौधरी, रांची : अब छोटे खदानों खासकर पांच से 25 हेक्टेयर तक के खदानों की पर्यावरण स्वीकृति के लिए जनसुनवाई (पब्लिक हेयरिंग) की बाध्यता समाप्त की जा रही है. […]

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  • नये इनवायरमेंटल इंपैक्ट असेसमेंट नोटिफिकेशन का ड्राफ्ट जारी
  • पांच हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल की लघु खदान कीे पर्यावरण स्वीकृति के लिए नहीं करनी होगी जनसुनवाई
सुनील चौधरी, रांची : अब छोटे खदानों खासकर पांच से 25 हेक्टेयर तक के खदानों की पर्यावरण स्वीकृति के लिए जनसुनवाई (पब्लिक हेयरिंग) की बाध्यता समाप्त की जा रही है. वहीं पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल के लघु खदानों के लिए पर्यावरण स्वीकृति जिला पर्यावरण आकलन कमेटी (डीइएसी/डीइआइएए) से ही मिल जायेगी.
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने नये सिरे से इनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट नोटिफिकेशन 2019 का जीरो ड्राफ्ट जारी किया है. इस ड्राफ्ट को राज्य सरकार के मुख्य सचिव को भेजकर सरकार से सुझाव व आपत्तियां मांगी गयी है. बताया गया कि इस ड्राफ्ट की अधिसूचना जारी होते ही पर्यावरण स्वीकृति के पूर्व की अधिसूचना समाप्त हो जायेगी.
क्यों पड़ी जरूरत
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी )द्वारा 13.9.2018 तथा 11.12.2018 के आलोक में पांच से 25 हेक्टेयर तक के बालू घाटों व अन्य लघु खनिजों के पर्यावरणीय स्वीकृति में इनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट (इआइए), इनवायरमेंटल मैनेजमेंट प्लान (इएमपी) एवं जनसुनवाई अनिवार्य कर दी गयी थी.
इस कारण देशभर के कई बालू घाटों व पत्थर खदानों का संचालन रुक गया है. पूर्व में ही पर्यावरण स्वीकृति के लिए गठित जिला स्तरीय कमेटी और राज्य स्तरीय कमेटी को कोर्ट में चुनौती दी गयी थी कि इनके पास पर्यावरण की विशेषज्ञता हासिल नहीं है, फिर कैसे पर्यावरण स्वीकृति दे सकते हैं.
हालांकि एनजीटी द्वारा नये सिरे से नियम बनाने का सुझाव भी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को दिया गया था. इसी कड़ी में यह इनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट नोटिफिकेशन 2019 का जीरो ड्राफ्ट जारी किया गया है. बताया गया कि इसमें पर्यावरण स्वीकृति (इसी) की प्रक्रिया को काफी सरल किया गया है. यह नयी अधिसूचना वर्ष 2006 में जारी पुरानी अधिसूचना का स्थान लेगी.
क्या है अधिसूचना के प्रारूप में
प्रारूप अधिसूचना 2019 जिला स्तर के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन प्राधिकरण (डीइआइएए) को जिला मजिस्ट्रेट या जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला-स्तरीय परियोजनाओं को मंजूरी देने, पर्यावरणीय मंजूरी देने या अस्वीकार करने का अधिकार देता है. 15 मार्च, 2016 को मंत्रालय ने पहली बार लघु खनिज के व्यक्तिगत खनन पट्टे के लिए पांच हेक्टेयर और डीइआइएए को कलस्टर में 25 हेक्टेयर तक पर्यावरणीय मंजूरी देने का अधिकार दिया था.
इस फैसले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में चुनौती दी गयी थी, क्योंकि विशेषज्ञों ने कहा कि जिला अधिकारियों को खनन के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने में विशेषज्ञता की कमी है. लेकिन इस प्रारूप में डीइआइएए के पास व्यापक शक्तियां दी गयी हैं. पर एनजीटी के आदेश के बाद सबसे बड़ी बाधा थी परियोजना या खदानों के लिए सार्वजनिक परामर्श लेना या जनसुनवाई से अनुमति लेना.
क्या होगा लाभ
अभी झारखंड में करीब 200 बालू घाटों से उत्खनन पूरी तरह बंद है, क्योंकि पर्यावरण स्वीकृति के लिए उनके पास पब्लिक हेयरिंग का एनओसी नहीं है. इस प्रक्रिया को पूरा करने में कम से कम आठ से 10 माह का समय लगेगा. पर यदि अधिसूचना बीच में लागू हो जाती है, तो ये बालू घाट कुछ प्रक्रियाओं को पूरा करते ही एक माह में खुल जायेंगे.
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