नालंदा ने कभी खेती में बनाया था वर्ल्ड रिकॉर्ड, अब खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे किसान

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Nalanda News once held world record in agriculture but now farmers

सांकेतिक तस्वीर

Nalanda News : नालंदा जिला कभी कृषि नवाचार और रिकॉर्ड उत्पादन के लिए देश-दुनिया में पहचान बनाने वाला, अब खेती के संकट से जूझ रहा है. बदलते मौसम, बढ़ती लागत और फसलों की सही कीमत नहीं मिलने से किसान परेशान हैं. नई पीढ़ी खेती से दूरी बनाकर रोजगार और बेहतर आय के लिए दूसरे क्षेत्रों की ओर रुख कर रही है.

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Nalanda News : (कंचन कुमार) कभी कृषि नवाचार और रिकॉर्ड उत्पादन के लिए देश-दुनिया में पहचान बनाने वाला नालंदा जिला अब खेती के संकट से जूझ रहा है. बदलते मौसम, बढ़ती लागत और फसलों की सही कीमत नहीं मिलने से किसान परेशान हैं. नई पीढ़ी खेती से दूरी बनाकर रोजगार और बेहतर आय के लिए दूसरे क्षेत्रों की ओर रुख कर रही है. किसानों का कहना है कि खेती अब फायदे का नहीं बल्कि घाटे का सौदा बनती जा रही है.

बढ़ती लागत ने किसानों की तोड़ी कमर

नालंदा के किसानों के सामने खेती की लागत सबसे बड़ी चुनौती बन गई है. खाद, बीज, डीजल और कीटनाशकों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. वहीं खेतिहर मजदूरों की कमी से खेती का खर्च और बढ़ गया है. छोटे और सीमांत किसान सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने के बाद भी बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जिससे लागत निकालना तक मुश्किल हो जाता है.

कभी कृषि क्रांति का मॉडल था नालंदा

एक समय नालंदा का राजगीर प्रखंड स्थित दरवेशपुरा गांव भारत का “चमत्कारी गांव” कहलाता था. यहां के किसानों ने धान, आलू और गेहूं उत्पादन में विश्व और राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा था. देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ यहां अध्ययन करने पहुंचते थे. उस दौर में नालंदा को बिहार की नई कृषि क्रांति का केंद्र माना जाता था.

सुमंत कुमार ने धान उत्पादन में बनाया था इतिहास

वर्ष 2011 में दरवेशपुरा गांव के किसान सुमंत कुमार ने एसआरआई यानी श्री विधि अपनाकर धान उत्पादन में विश्व रिकॉर्ड बनाया था. उन्होंने 22.4 टन प्रति हेक्टेयर धान उत्पादन कर चीन का रिकॉर्ड तोड़ दिया था. कम बीज, कम पानी और जैविक खाद के इस्तेमाल से मिली इस सफलता ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया था.

आलू और प्याज उत्पादन में भी बना था रिकॉर्ड

बिहारशरीफ प्रखंड के सोहदीह गांव निवासी रकेश कुमार ने वर्ष 2012 में प्याज और 2013 में आलू उत्पादन में विश्व रिकॉर्ड बनाकर नालंदा को नई पहचान दिलाई थी. उन्होंने हाई-डेंसिटी प्लांटेशन और जैविक खेती के जरिए प्याज में 660 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और आलू में 1088 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन किया था. उनकी उपलब्धि को कृषि वैज्ञानिकों ने भी प्रमाणित किया था.

पांच युवा किसानों ने बदली थी खेती की तस्वीर

दरवेशपुरा गांव के पांच युवा किसानों सुमंत कुमार, कृष्ण कुमार, नीतीश कुमार, विजय कुमार और संजय कुमार ने मिलकर धान उत्पादन में नया इतिहास रचा था. कई किसानों ने 17 टन प्रति हेक्टेयर से अधिक उत्पादन किया था. इनकी सफलता से प्रेरित होकर बिहार के एक लाख से अधिक किसानों ने श्री विधि तकनीक अपनाई थी.

गेहूं उत्पादन में भी मिली थी राष्ट्रीय पहचान

राजगीर क्षेत्र के किसान रविंद्र कुमार ने वर्ष 2011-12 में 126 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गेहूं उत्पादन कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था. सीमित संसाधनों और वैज्ञानिक तकनीक के सहारे किसानों ने साबित किया था कि मेहनत और नई पद्धति से खेती में असंभव को संभव बनाया जा सकता है.

मौसम और बाजार संकट बना सबसे बड़ी चुनौती

किसानों का कहना है कि अब मौसम पूरी तरह अनिश्चित हो गया है. कभी सूखा तो कभी बेमौसम बारिश फसल को बर्बाद कर देती है. गिरता भू-जल स्तर, सिंचाई संकट और बाजार में बिचौलियों का दबदबा भी किसानों की मुश्किलें बढ़ा रहा है. यही कारण है कि नई पीढ़ी खेती को जोखिम भरा पेशा मानने लगी है.

आधुनिक तकनीक और सरकारी मदद से लौट सकती है रौनक

हरनौत कृषि विज्ञान केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक सीमा कुमारी का कहना है कि यदि किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार, कोल्ड स्टोरेज और समय पर सरकारी सहायता मिले तो नालंदा फिर से कृषि क्रांति का केंद्र बन सकता है. उन्होंने कहा कि जैविक खेती, ड्रिप सिंचाई और वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा देकर युवाओं को दोबारा खेती से जोड़ा जा सकता है.

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विवेक सिंह

लेखक के बारे में

By विवेक सिंह

विवेक सिंह की डिजिटल मीडिया और जनसरोकारों से जुड़े विषयों में विशेष रुचि रही है. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कार्यरत हैं. वे बिहार के मिथिला क्षेत्र के निवासी हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं.

उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई की है. शिक्षा के दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, जनसंचार, फोटो जर्नलिज्म, मोबाइल जर्नलिज्म (MOJO) और मीडिया रिसर्च की गहन समझ विकसित की है. अध्ययन के दौरान उन्होंने दूरदर्शन (Doordarshan) में इंटर्नशिप भी की, जहां उन्हें न्यूजरूम की कार्यप्रणाली, टीवी समाचार निर्माण, स्क्रिप्ट लेखन, विजुअल चयन, फील्ड रिपोर्टिग और प्रसारण प्रक्रिया को नजदीक से समझने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ.

पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने मीडिया प्लेटफॉर्म The Newsdharma के माध्यम से ग्राउंड रिपोर्टिंग, जनमत संग्रह (Public Opinion), सामाजिक मुद्दों की कवरेज और स्थानीय समाचारों के संकलन का व्यापक अनुभव प्राप्त किया. उन्होंने विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े विषयों पर जमीनी स्तर से रिपोर्टिंग करते हुए आम लोगों की आवाज को प्रमुखता से सामने लाने का कार्य किया है.

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वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कार्यरत विवेक सिंह राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, खेल, अपराध, रियल-टाइम समाचारों, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक विषयों से जुड़ी खबरों पर लेखन करते हैं. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization), कंटेंट प्लानिंग और ट्रेंड-आधारित समाचार लेखन की अच्छी समझ है. ब्रेकिंग न्यूज की पहचान, त्वरित कवरेज और कम समय में तथ्यपरक समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यक्षमताओं में शामिल है.

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