अब सुखेंदु शेखर रॉय के बागी तेवर, बोले- बंगाल में अराजकता का हुआ अंत, क्या ममता बनर्जी के करीबियों पर गिरेगी गाज?
Published by : Mithilesh Jha Updated At : 27 May 2026 7:31 AM
Sukhendu Sekhar Ray TMC: टीएमसी के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी की हार के बाद ‘असहनीय अराजकता’ और ‘भ्रष्टाचार’ पर चिंता जतायी है. आरजी कर कांड और चुनावी पतन को लेकर उनके बागी तेवरों ने बंगाल की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है.
खास बातें
Sukhendu Sekhar Ray TMC: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी शिकस्त के बाद अब पार्टी के भीतर ‘आंतरिक विस्फोट’ की स्थिति है. काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे के बाद अब राज्यसभा के सबसे अनुभवी और वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी नेतृत्व और कार्यप्रणाली पर ऐसे सवाल उठाये हैं, जिसने तृणमूल भवन में हड़कंप मचा दिया है.
भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप देने वालों पर हमला
रॉय ने ऐतिहासिक संदर्भों का सहारा लेते हुए सीधे तौर पर राज्य की पिछली स्थिति को ‘असहनीय अराजकता’ करार दिया है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि रॉय का इशारा पार्टी के भीतर मौजूद उन ‘शकुनियों’ की तरफ है, जिन्होंने भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप दे दिया.
जूलियस सीजर और पतन का जिक्र
सुखेंदु शेखर रॉय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी पोस्ट के जरिये पार्टी के मौजूदा हालात की तुलना रोम के पतन से की है. रॉय ने लिखा- 44 ईसा पूर्व में रोमन सम्राट जूलियस सीजर की सीनेट में हत्या कर दी गयी थी. लेकिन बंगाल में मई के मध्य से पहले ही जनता ने असहनीय अराजकता की स्थिति का अंत कर दिया.
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बुद्धिजीवियों की अनदेखी, आजाद ख्याल पर पहरा
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने चेतावनी दी कि जब भ्रष्ट लोग फलते-फूलते हैं और बुद्धिमानों को परिषद (Council) से बाहर कर दिया जाता है, तब गणतंत्र का पतन निश्चित है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र विचार आवश्यक हैं, वरना व्यवस्था ढह जाती है.
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Sukhendu Sekhar Ray TMC: आरजी कर कांड में जनता की नब्ज पहचानने में फेल रही टीएमसी
रॉय के करीबियों के अनुसार, वे इस बात से बेहद आहत हैं कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में 29 सीटें जीतने वाली पार्टी महज 2 साल में कैसे अर्श से फर्श पर आ गयी.
- रॉय का मानना है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी के बाद जो जनाक्रोश सड़कों पर उतरा, पार्टी उसे समझने में पूरी तरह विफल रही.
- सुखेंदु शेखर लिखते हैं कि जब सड़कों पर अभूतपूर्व भीड़ थी, तब पार्टी के कुछ नेता इसे ‘राजनीतिक साजिश’ बता रहे थे, जबकि रॉय इसे जनता का स्वतःस्फूर्त विद्रोह मान रहे थे.
- रॉय ने निजी बातचीत में स्वीकार किया है कि पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार ‘संस्थागत रूप’ ले चुका है, जिसने तृणमूल की जड़ों को खोखला कर दिया.
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क्यों अहम है सुखेंदु शेखर रॉय की आवाज?
सुखेंदु शेखर रॉय टीएमसी में कोई मामूली चेहरा नहीं हैं. कांग्रेस की पृष्ठभूमि से आये रॉय पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बेहद करीबी रहे हैं. वे संवैधानिक मामलों और संघीय ढांचे के विशेषज्ञ माने जाते हैं. संसद में टीएमसी का सबसे प्रखर चेहरा रहे हैं. छह दशकों से बंगाल की राजनीति को करीब से देखने वाले रॉय का यह ‘विद्रोह’ इशारा कर रहा है कि पार्टी के पुराने वफादार अब आई-पैक (I-PAC) और नये नेतृत्व की कार्यशैली से बेहद खफा हैं.
टीएमसी के लिए खतरे की घंटी
काकोली घोष दस्तीदार के बाद सुखेंदु शेखर रॉय का यह रुख स्पष्ट करता है कि हार के बाद टीएमसी में पुराने बनाम नये (Old vs New) की जंग अब निर्णायक मोड़ पर है. यदि ममता बनर्जी ने जल्द ही पार्टी के भीतर ‘सर्जरी’ नहीं की, तो आने वाले दिनों में कई और बड़े विकेट गिर सकते हैं.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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