रांची : केवीके में सस्ती और उपयोगी तकनीकों को शामिल करें

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Mar 2019 2:18 AM

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रांची : झारखंड और बिहार में कार्यरत 63 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के ऑन-फार्म परीक्षण वार्षिक कार्ययोजना को अंतिम स्वरूप देने के लिए शुक्रवार को बीएयू में दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई. अटारी, पटना जोन के निदेशक डॉ एके सिंह ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों का मुख्य उद्देश्य किसानों के लिए कृषि और संबंधित […]

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रांची : झारखंड और बिहार में कार्यरत 63 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के ऑन-फार्म परीक्षण वार्षिक कार्ययोजना को अंतिम स्वरूप देने के लिए शुक्रवार को बीएयू में दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई.
अटारी, पटना जोन के निदेशक डॉ एके सिंह ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों का मुख्य उद्देश्य किसानों के लिए कृषि और संबंधित क्षेत्रों में मानव संसाधन प्रबंधन कार्यक्रमों के माध्यम से कृषि और संबद्ध प्रौद्योगिकियों का मूल्यांकन, शोधन और तकनीकी हस्तांतरण करना है.
कार्यशाला में केवीके के पांच ऑन-फार्म परीक्षण (ओएफटी) के अधीन कृषि अभियांत्रिकी एवं पशु विज्ञान विषयों पर केवीके वैज्ञानिक और विषय विशेषज्ञ की सलाह से वार्षिक कार्ययोजना को अंतिम स्वरूप दिया जायेगा.
लाभकारी तकनीकों को कार्ययोजना में शामिल किया जाये : विवि के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ जगरनाथ उरांव ने केवीके वैज्ञानिकों को स्थानीय कृषि विवि द्वारा विकसित लागत में किसानों के लिए लाभकारी तकनीकों को कार्ययोजना में शामिल करने पर जोर दिया. कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञ प्रो डीके रूसिया ने बताया कि इस केवीके कार्ययोजना में कृषि मशीनीकरण, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण की बेहतर एवं सस्ती तकनीकों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जा रहा है.
पशु विज्ञान विशेषज्ञ डॉ एमपी सिन्हा ने बताया कि झारखंड एवं बिहार राज्य में पशुओं की मुख्य समस्याओं के निदान एवं स्थानीय कृषि विवि के विकसित तकनीकों के परीक्षण से किसान की आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. कार्यशाला का आयोजन आइसीएआर की कृषि तकनीकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), पटना जोन एवं प्रसार शिक्षा निदेशालय, बिरसा कृषि विवि के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है. कार्यशाला में विशेषज्ञों में डॉ सुशील प्रसाद, डॉ उत्तम कुमार, डॉ मिंटू जॉब एवं डॉ प्रमोद रॉय के अलावा केवीके के 35 कृषि अभियांत्रिकी वैज्ञानिक और 38 पशु विज्ञान वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं.
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