रांची : ट्राइबल सब प्लान के पैसे का हो रहा है दुरुपयोग
Updated at : 05 Feb 2019 8:50 AM (IST)
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रांची : नेशनल कैंपेन ऑन दलित ह्यूमन राइट्स, नेशनल कैंपेन ऑन आदिवासी राइट्स, भोजन का अधिकार अभियान, झारखंड नरेगा वॉच, आदिवासी एक्टिविस्ट फोरम फॉर इंडिजिनस राइट्स व झारखंड इंडिजिनस पीपुल्स फोरम ने सरकार पर आदिवासी उपयोजना व दलित उपयोजना में आवंटित राशि का इस्तेमाल लगातार दूसरे सामान्य मदों में करने का आरोप लगाया है. सामाजिक […]
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रांची : नेशनल कैंपेन ऑन दलित ह्यूमन राइट्स, नेशनल कैंपेन ऑन आदिवासी राइट्स, भोजन का अधिकार अभियान, झारखंड नरेगा वॉच, आदिवासी एक्टिविस्ट फोरम फॉर इंडिजिनस राइट्स व झारखंड इंडिजिनस पीपुल्स फोरम ने सरकार पर आदिवासी उपयोजना व दलित उपयोजना में आवंटित राशि का इस्तेमाल लगातार दूसरे सामान्य मदों में करने का आरोप लगाया है.
सामाजिक कार्यकर्ता बलराम ने कहा कि यह सिर्फ नैतिक सवाल ही नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रावधानों का खुल्लमखुला उल्लंघन है. वे अशोक नगर स्थित भोजन का अधिकार अभियान कार्यालय में प्रेस से बातचीत कर रहे थे़
नेशनल कैंपेन ऑन दलित ह्यूमन राइट्स के राज्य संयोजक सुनील मिंज ने कहा कि आदिवासी उपयोजना व दलित उपयोजना के नीतिगत सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं रुक रहा है. टीएसपी के पैसे से ग्रेटर रांची बनाया जा रहा है. ग्रेटर रांची डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड आदिवासी उप योजना के 76 करोड़ रुपये खर्च करेगी. आदिवासी उपयोजना के 283 करोड़ रुपये सामान्य वर्ग के लिए इंदिरा आवास बनाने के लिए दिये जा रहे हैं.
ऊर्जा विभाग में टीएसपी के 300 करोड़ रुपये डीवीसी को दिया जा रहा है. जहां झारखंड में आदिवासी व दलित छात्रों की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में पैसा कम कर दिया गया, वहीं आदिवासी उपयोजना के पैसे का विचलन कर एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जमशेदपुर के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और वेतन के लिए दिया जा रहा है. सात करोड़ 50 लाख रुपये का विचलन पीपीपी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए हो रहा है.
आदिवासी आज विस्थापन से भयभीत हैं, पर नगर विकास व आवास विभाग आदिवासी उपयोजना के 10 करोड़ रुपये का डायवर्सन भूमि अधिग्रहण और विकास के लिए कर रहा है. बेतला पार्क से आदिवासियों को हटाने की बात चल रही है, वहीं आश्चर्यजनक रूप से उन्हीं के विकास के 15 करोड़ 55 लाख रुपये पलामू टाइगर प्रोजेक्ट के लिए दिया जा रहा है. आदिवासी ग्राम विकास समिति के तहत गांवों के विकास का मामला कोर्ट में लंबित है, पर इसके इस मद में 120 करोड़ रुपये का बजट आवंटन किया गया है़ उन्होंने बताया कि राज्य के सिर्फ 12 विभागों में ही 64,12,50,930 रुपये का विचलन है, जबकि कुल 41 में से 29 विभागों में आदिवासी उपयोजना व दलित उपयोजना का पैसा जाता है़
नेशनल कैंपन आॅन आदिवासी राइट्स के राज्य संयोजक मिथिलेश कुमार ने कहा कि सरकार को गांव-गांव जाकर जन बजट बनवाना चाहिए, ताकि वे अपने विकास के मुद्दे बजट शामिल कर सकें. मौके पर आदिवासी एक्टिविस्ट फोरम फॉर इंडिजिनस राइट्स के फिलिप कुजूर, झारखंड नरेगा वॉच की उप संयोजक तारामणी साहू, भोजन का अधिकार अभियान के अशर्फीनंद प्रसाद व आकाश रंजन भी मौजूद थे़
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