रांची : संग्रहालय में जनजातीय विद्रोह का प्रतिबिंब नजर आये
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Dec 2018 9:25 AM (IST)
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बिरसा मुंडा कारागार के जीर्णोद्धार, संरक्षण व संग्रहालय निर्माण विषय पर सेमिनार रांची : बिरसा मुंडा कारागार के जीर्णोद्धार, संरक्षण व संग्रहालय निर्माण के संदर्भ में इसके लिए गठित समिति के सदस्यों व विषय विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन व सुझावों के लिए सोमवार को जनजातीय शोध संस्थान में सेमिनार का आयोजन हुआ़ इस अवसर पर आइआइटी […]
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बिरसा मुंडा कारागार के जीर्णोद्धार, संरक्षण व संग्रहालय निर्माण विषय पर सेमिनार
रांची : बिरसा मुंडा कारागार के जीर्णोद्धार, संरक्षण व संग्रहालय निर्माण के संदर्भ में इसके लिए गठित समिति के सदस्यों व विषय विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन व सुझावों के लिए सोमवार को जनजातीय शोध संस्थान में सेमिनार का आयोजन हुआ़ इस अवसर पर आइआइटी दिल्ली के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो ललित दास ने कहा कि इस संग्रहालय में न्याय व स्वतंत्रता के लिए हुए जनजातीय विद्रोह का प्रतिबंब दिखना चाहिए़ इससे पूर्व टीआरआइ के निदेशक रणेंद्र कुमार ने बताया कि यह आयोेजन प्रस्तावित बिरसा मुंडा संग्रहालय में झारखंड के विभिन्न विद्रोह व आंदोलनों के अगुओं से संबंधित जानकारियों के लिए है़
सेमिनार के पहले सत्र में जंगल महाल विद्रोह, पहाड़िया विद्रोह, तमाड़ विद्रोह, कोल विद्रोह, कोल विद्रोह में वीर बुधु भगत की भूमिका व भूमिज विद्रोह पर चर्चा हुई़ डिजाइन हैबिटेट, दिल्ली द्वारा विभिन्न स्थानों में बनाये गये संग्रहालयों का वीडियो प्रस्तुतिकरण भी दिया गया़ दूसरे सत्र में संथाल हूल, फूलो-झानो व अन्य महिलाओं की संथाल हूल में भूमिका, 1857 का विद्रोह व गोनू पिंगुवा की भूमिका, सरदारी आंदोलन, खेरवार अांदोलन, तेलंगा खड़िया आंदोलन व टाना भगत आंदोलन पर चर्चा की गयी़
इस सेमिनार में डॉ एके सेन, डाॅ विकास कुमार, अंजू टोप्पो, राज कुमार, डॉ सुजाता सिंह, डॉ मृत्युंजय कुमार, अंजना सिंह, सीमा ममता मिंज, आइके चौधरी, संजय सिन्हा, संजय कुमार बिरुली, डॉ शशि केरकेट्टा व विभिन्न विश्वविद्यालय व महाविद्यालय के प्राध्यापक मौजूद थे़
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